अंकल से सील तुड़वा कर प्रेग्नेंट हो गई (Virgin Girl Full Sex Kahani)

वर्जिन गर्ल फुल सेक्स कहानी एक कम्पनी में पर्सनल सेक्रेटरी की जॉब करने वाली लड़की की है. लोकल बस में आते जाते वह एक अंकल से सेट हो गयी. अंकल ने उसकी सील तोड़ी.

दोस्तो, आपकी रिया एक बार फिर से एक सच्ची कहानी लेकर आई है जो कि मेरी खास सहेली की है.
आज मैं वह सच्ची कहानी आपसे शेयर कर रही हूं.

मेरी सहेली का नाम टीना है वह एक मल्टी कंपनी में पर्सनल सेक्रेटरी की पोस्ट पर नौकरी करती है.

उसकी उम्र 24 साल और बॉडी फिगर 34-30-36 है.
वह बहुत ही खूबसूरत गोरी चिट्टी और सेक्सी है, वह पीजी में रहती है.

अब वर्जिन गर्ल फुल सेक्स कहानी उसी की जुबानी:

मैं एक कंपनी में अपने पर्सनल सेक्रेटरी हूं और सुबह शाम में सिटी बस से ही ऑफिस आती जाती थी.
सुबह-शाम सिटी बस में काफी खचाखच भीड़ होती थी जिस कारण मैं बस के गेट के साथ ही पीछे के हिस्से में राइट हैंड पर एक छोटा पार्टीशन जहां पर सीटें नहीं थी, सिर्फ खड़े होने की जगह थी, उस हिस्से में ही घुस कर खड़ी हो जाती थी.

इस दौरान खचाखच भीड़ में काफी लोग मेरी चूचियों, चूतड़ों पर हाथ साफ कर दिया करते थे लेकिन बस में खचाखच भीड़ होने के कारण मैं चुप रहती.

मैं कई दिनों से नोटिस कर रही थी कि एक 55 साल के आसपास उम्र का आदमी हमेशा मेरे साथ ही टच होकर अपना लंड मेरे चूतड़ों की दरार में सटा कर खड़ा होता था.
शुरू शुरू में मैं उसको गुस्से से देखती थी लेकिन धीरे-धीरे उसकी हरकतों से मुझे अजीब सा आनन्द आने लगा था.

और इस दौरान हमारी आपस में बातचीत शुरू हो गई उसने बताया कि उसका नाम अरविन्द है वह सरकारी दफ्तर में एक इन्वेस्टिगेशन ऑफीसर है.
इसलिए मैं बस में आते जाते उससे खुलकर बातें करने लगी थी.

वह भी अक्सर मेरे पीछे खड़ा होकर अपने लंड से मेरे चूतड़ों में ठोकर मारता रहता था और मौका देखकर मेरी चूचियों को भी दबा दिया करता था जिसमें मुझे आनन्द आने लगा था.

अब वह खचाखच भीड़ में मनचलों लोगों से मेरी हिफाजत भी करने लगा था इसलिए मैं उसकी तरफ आकर्षित होती चली गई.
हमने अपने फोन नंबर भी आपस में एक्सचेंज कर लिए थे.

और कई बार ऑफिस में काम ज्यादा होने की वजह से लेट हो जाती थी तो वह मुझे फोन पर पूछ कर मेरे साथ ही आता था इसलिए मुझे अंधेरा होने पर भी उसका साथ मिल जाता था.

इस टाइम बस में भीड़ कम होती थी और हम बस में पीछे वाले हिस्से में ही खड़े होते थे. उस टाइम उस हिस्से में कोई और नहीं होता था. इसका फायदा उठाकर अरविन्द मुझे अपनी बाहों में भर कर मेरे होठों पर लंबा चुंबन ले लिया करता था.
मस्ती में आकर मैं भी उसे सहयोग करने लगी थी.

मैं ऑफिस में पर्सनल सेक्रेटरी होने के कारण अक्सर साड़ी और स्कर्ट पहनती थी जिस कारण मेरा रूप सौंदर्य और खिलकर लोगों की आंखों में हवस की आग भर देता था,

एक दिन लेट होने के कारण हम दोनों बस के पिछले हिस्से में थे.
उस दिन मैंने स्कर्ट पहनी हुई थी जिसमें आगे की तरफ एक लंबा कट था.

उस दिन अरविन्द मुझे अपनी बाहों में भींच कर मेरे रस भरे होठों को चूस रहा था मेरे टॉप में अपना हाथ डाल कर मेरे चूचियों को मसल रहा था.
मेरे अंदर चिंगारी भर कर लावा फूटने लगा था.

तभी अरविन्द ने अपनी पैंट की जिप खोलकर अपना लंबा मोटा लंड निकाल मेरे हाथ में दे दिया.
मैं हैरान होकर उसके लंबे मोटे फौलादी लंड को हाथ में लेकर हिलाने लगी थी और हैरान थी इस उम्र में भी उसका लंड इतना फौलादी था!

अरविन्द अपने हाथ से मेरी गांड और मेरी चूत को सहला रहा था.

उसने मेरी स्कर्ट ऊपर को उठानी चाही तो मैंने उसे रोककर अपनी स्कर्ट को घुमा कर आगे वाला लंबा कट पीछे कर दिया जिससे मेरे स्कर्ट बिना उठाए आधे से ज्यादा मेरे चूतड़ नंगे हो गए और
अरविन्द अपना लौड़ा मेरे चूतड़ों के बीच में देकर हल्के हल्के से धक्के लगाने लगा.

मेरी चूत पानी छोड़ कर काफी गीली हो चुकी थी.
मैंने मौके की नजाकत को देखकर अपनी टांगें चौड़ी कर ली और आगे को झुक गई.

अब अरविन्द का लंड मेरी चूत के मुंह पर ठोकर मार रहा था.

अरविन्द अपने लंड को हाथ से पकड़ कर मेरी चूत के मुंह पर सेट कर मुझे इशारा किया तो मैं अपने दांत भींच कर आने वाले दर्द को सोच कर तैयार थी.
तभी अरविन्द ने अपने लंड को जोर का धक्का दिया.

लंड मेरी चूत के मुंह पर जोर से ठोकर मार कर फिसल गया और मेरे मुंह से आह निकल गयी.
मैं आगे को खिसक गई.

फिर अरविन्द ने मेरे हाथ में अपना लंड देकर इशारा किया तो मैंने अरविन्द का लंड पकड़ कर अपने चूतड़ों के नीचे से अपनी चूत के मुंह पर लगा कर अरविन्द को उसका लौड़ा दबाकर इशारा किया.
तो अरविन्द ने फिर से तगड़ा धक्का दिया.

इस बार भी अरविन्द का लंड मेरी चूत के मुंह पर चोट मारता हुआ फिसल गया.
ऐसे मैंने और अरविन्द ने 6 – 7 बार कोशिश की लेकिन अरविन्द का फौलादी मोटा लंबा लंड हर बार मेरी चूत के मुंह पर जोर से चोट मारकर फिसल जाता.

इस तरह मेरी चूत दुखने लगी थी.

मेरी चूत कुंवारी और टाइट होने के कारण अरविन्द का लौड़ा घुस नहीं पा रहा था.

अब हमारा स्टॉप भी आने वाला था इसलिए हमने अपने कपड़े ठीक कर के अपने आप को संभाला.

उस सारी रात में अरविन्द के फौलादी लंड के बारे में सोचती रही और मीठे मीठे सपनों में सो गई.
मैं यह भी सोच रही थी कि अगर अरविन्द का फौलादी लंड बस में मेरी चूत में घुस जाता तो मेरी चीखें निकलने के कारण बस वालों को पता चल जाता.

यह बात मैंने अगले दिन फोन पर अरविन्द को बताई तो अरविन्द को पता चला कि मैं कुंवारी हूं.

अरविन्द ने फोन करके बताया कि तीन हॉलीडे एक साथ पड़ रहे हैं.
उसने 3 दिन की और छुट्टी लेकर पूरा सप्ताह मेरे साथ अपने फार्म हाउस पर प्रोग्राम बनाया.

मैं अरविन्द को मना नहीं कर पाई और मैं भी 3 दिन की और छुट्टी लेकर पूरा सप्ताह उसके फार्म हाउस पर जाने के लिए पार्लर से वैक्सिंग फेशियल वगैरह काम करा कर तैयार हो गई.

उस दिन अरविन्द ने स्पेशल मुझे साड़ी पहनने के लिए बोला था.

तय समय पर मैं पहुंची तो अरविन्द अपनी कार लेकर मेरा इंतजार कर रहा था.

मुझे इस रूप में देखकर वह खुशी से फूला नहीं समा रहा था.
मैंने उस दिन नारंगी साड़ी ब्लाउज और उसी रंग चूड़ियों का सेट पहना था. मैचिंग हेयर स्टाइल और फुल मेकअप में थी मैं!

मेरे कार में बैठते ही अरविन्द ने आगे बढ़कर मेरे होठों पर एक किस किया.
फिर अरविन्द ने कार चला कर आगे मार्केट में एक किनारे रोक रोक कर वह कुछ सामान लेने चला गया.

वापस आया तो उसके हाथ में तीन रम की बोतल और खाने-पीने का ढेर सारा सामान था.

फिर 5 घंटे की ड्राइव करके हम अरविन्द के फार्म हाउस पर पहुंच गए.

वह एक छोटा लेकिन बहुत ही अच्छा फार्म हाउस था.
उसमें बीचोंबीच थ्री बैडरूम सेट बना हुआ था और फार्म हाउस के बीचों-बीच एक स्विमिंग पूल भी था.

फार्म हाउस का मेनगेट बंद करने के बाद अरविन्द ने मुझे मेरी साड़ी खींचकर अपनी बाहों में भर लिया इस कारण मेरी दोनों चूचियां अरविन्द के सीने में दब गई.

उसने अपने होंठ मेरे होठों से लगाकर एक लंबा किस ले लिया.
मैं भी अपनी बाहों का हार बनाकर उसके गले में डाल उसको सहयोग करने लगी.

काफी देर तक मेरे होंठ चूसने के बाद उसने मुझे अपनी बाहों में उठा कर बेडरूम में बेड पर लिटा दिया और मेरे ऊपर आ वह लगातार मेरे होंठों को चूस कर और अपने हाथों से मेरे चूचियों को दबाने लगा जिस कारण मेरे होठों से सिसकारियां निकलने लगी.

फिर उसने मेरे ब्लाउज की डोरियों खींचकर ब्लाउज अलग कर दिया, साथ ही साथ मेरे पेटीकोट का नाड़ा खींच कर उतार दिया.

अब मैं अरविन्द की बाहों में ब्रा पेंटी में रह गई थी.
अरविन्द लगातार मेरे होंठों को चूस रहा था जैसे कि वह मेरे जिस्म को देखकर अपने होशोहवास खोकर पागल सा हो गया था.

उसने जल्दी ही अपने कपड़े उतारे और नंगा हो गया.
फिर मेरी ब्रा पैंटी भी उतार दी.

अब हम दोनों बेड पर एक दूसरे की बाहों में नंगे थे.

अरविन्द एक चूची मेरी मुंह में लेकर चूसने था दूसरी चूची को अपने हाथों से मसल रहा था.
मेरे अंदर एक लावा सा भर गया था जिस कारण मेरी चूत काफी गीली हो चुकी थी.

मैं मन ही मन डर रही थी कि फुल सेक्स में अरविन्द का लंबा मोटा लंड मेरी चूत में कैसे घुस पाएगा.
अरविन्द ने मेरी दोनों चूचियों पर लाल लाल निशान डाल दिए थे और अपने दांतों से काटने का भी … लेकिन अरविन्द बारी बारी से मेरे होठों को और मेरी दोनों चूचियों को जमकर चूस रहा था.

मैं अरविन्द के नीचे दबी हुई थी.
अरविन्द मेरे ऊपर होने के कारण उसका लंबा मोटा फौलादी लंड मेरी जांघों के बीच में मेरी चूत पर ठोकर मार रहा था.

कमरे में मेरी जोर जोर से सिसकारियां गूंज रही थी- आहह हहह उई उई मां आह ओह ईईई …ऊऊऊ ऊउम मम्मम आह हहह … मां आह ओह ईईई ऊऊ!
अब मैं भी अपने चूतड़ को उछालने लगी थी.

तभी अरविन्द मेरी दोनों टांगें चौड़ी करके अपना लंड मेरी चूत पर रगड़ने लगा जिससे मुझे अजीब सा आनन्द आ रहा था.

फिर अरविन्द अपना मुंह मेरी चूत पर लगा कर चूसने लगा.
मैं अपने होशोहवास खो बैठी थी और मैंने अपने हाथों से अरविन्द का सर अपनी चूत पर जोर से दबा लिया और चूतड़ को उछालने लगी.
“आह ओह ईई ऊऊ … उम आह हहह … उई मांह”

तभी अरविन्द ने अपना लंड मेरी चूत के मुंह पर लगाकर एक जोर का धक्का मारा.
मेरे मुंह से एक लंबी दर्द भरी चीख निकल गई- आह ओह ईईई ऊऊच ऊं … उई मां मर गई … आह ओह ईईई … ऊऊऊ!

अरविन्द का लंड मेरी चूत को फाड़ता हुआ अंदर घुस चुका था.
लेकिन अरविन्द ने मेरी चीखों पर ध्यान ना देकर ताबड़तोड़ तगड़े धक्के लगाकर अपना लंबा मोटा फौलादी लंड मेरी चूत में जड़ तक पहुंचा दिया.

मेरी आंखों में आंसू आ गए दर्द के कारण … मेरी चूत से खून की धार छूट गयी थी.
दर्द के मारे मैं अपना सर इधर उधर पटकने लगी थी.
मेरी जोर जोर से दर्द भरी चीखें निकल रही थी- आह हहह उई मां मरर गई … आह ओह … ईईई ऊऊऊ … ऊचच चचच … उममह ममम … आह हहह … उई मां!

अरविन्द ताबड़तोड़ धक्के मार मार कर मेरी चूत के चीथड़े उड़ा रहा था.
उसका लौड़ा हर धक्के पर मेरी बच्चेदानी में जा रहा था.

अपना एक हाथ मैंने अपनी चूत पर लगा कर देखा तो अरविन्द का पूरा लंड मेरी चूत में तेजी से अंदर बाहर हो रहा था.
मैंने चूत पर और अरविन्द के लंड पर उंगलियां लगाई तो मेरे हाथ पर काफी सारा खून लग गया था.

मैं समझ गई कि अरविन्द ने अपने लंबे मोटे फौलादी लंड से मेरी सील तोड़ दी. इस कारण मेरी चूत से काफी खून निकल रहा था.

तभी मेरी चूत ने पानी छोड़ दिया और मुझे अब दर्द के बजाए आनन्द आने लगा था.
अब मेरी दर्द भरी के सिसकियों के साथ साथ मस्ती की भरी सिसकारियां भी गूंजने लगी और मैं अपनी बाहों में अरविन्द को जकड़ कर अपने चूतड़ ऊपर उछालने लगी.

इस कारण अरविन्द की जांघें मेरी जांघों से जोरों से टकराकर पट्ट पट … फच फच … फच फच की आवाजें हो रही थी.

अरविन्द काफी ताकत से मुझे ताबड़तोड़ चोद रहा था.
मैं अब तक दो बार झड़ चुकी थी लेकिन अरविन्द रुकने का नाम नहीं ले रहा था.

बहुत देर तक चोदने के बाद अरविन्द ने मेरी दोनों टांगें उठा कर अपने कंधों पर रख ली और ताबड़तोड़ अपना लंड मेरी चूत में पेलने लगा.
अरविन्द का लौड़ा मेरी बच्चेदानी को हर बार ठोकर मार रहा था जिस कारण मैं बार-बार उछल रही थी.

हर 15 -16 धक्कों पर मेरी चूत पानी छोड़ कर झड़ रही थी.
और मेरे चार बार झड़ने पर अरविन्द ने ताबड़तोड़ धक्के लगाकर अपना लौड़ा मेरी चूत में जड़ तक पहुंचा कर अपना वीर्य मेरी चूत में उड़ेल कर मेरी पूरी चूत अपने वीर्य से भर दी.

मुझे अरविन्द का गर्म गर्म वीर्य अपनी चूत में महसूस हो रहा था और वीर्य की गर्माहट चूत के अंदर काफी अच्छा सुकून दे रहा था.
इस कारण मेरी दोनों आंखें बंद होकर मैंने अपने होठों को अरविन्द के होठों से बढ़ा दिया था.

अरविन्द मेरे ऊपर ही इसी हालत में लेट गया.
अभी भी अरविन्द का लौड़ा मेरी चूत के अंदर था और मेरी चूत का पानी और अरविन्द का वीर्य दोनों मिलकर मेरी चूत से बह रहे थे.

कुछ देर लेटने के बाद अरविन्द मुझसे अलग हुआ तो उसका लंड भी उछलकर मेरी चूत से बाहर हो गया.
इस कारण ढेर सारा वीर्य और मेरी चूत का पानी बेड की चादर पर गिरने लगा.

अरविन्द ने पूरे सप्ताह दारू पीकर रात दिन मुझे चोद चोद कर लड़की से औरत बना दिया.

अब मुझे भी अपने अंदर एक भरपूर औरत होने का अहसास होने लगा था और मेरी दोनों चूचियां और दोनों चूतड़ साइज बढ़ गया था.

इस पूरे सप्ताह में अरविन्द ने फुल सेक्स का मजा लेकर मुझे तकरीबन 40 बार जमकर चोदा.

फिर 1 दिन ऑफिस में मुझे उल्टियां हुई और महीने पर पीरियड ना आने के कारण मुझे प्रेग्नेंट होने का पता चला.
तो घबराकर मेरी जान निकल गई.

यह बात मैंने अरविन्द को फोन पर बताई तो अरविन्द ने अपने एक विश्वास के डॉक्टर से संपर्क कर मेरी प्रेगनेंसी गिराकर रुकवा दी.
इस दौरान मुझे 3 दिन ऑफिस से छुट्टी लेकर कंप्लीट आराम करना पड़ा.

यह थी मेरी सच्ची घटना जो मैंने आप लोगों के साथ शेयर कर अपना दिल हल्का किया.

प्रिय पाठको, आपको मेरी यह वर्जिन गर्ल फुल सेक्स कहानी कैसी लगी? मुझे मेल और कमेंट्स में बताएं.
[email protected]

लेखिका की पिछली कहानी: शादी से पहले सुहागरात मनाई

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