अपनी चाहत को अपना बना ही लिया (Apni Chahat Ko Apna Bana Hi Liya)

नमस्कार दोस्तो.. मैं अन्तर्वासना का एक नियमित पाठक हूँ और दो सालों से रोजाना इसकी कहानियां पढ़ता आया हूँ।

आज मैं अपने ज़िन्दगी की उस हसीन घटना के बारे में बताऊँगा.. जिसने मेरी वर्षों पुरानी दिल में दबी एक हसरत की चिंगारी को आग का रूप दे डाला।

मेरा नाम करन है। जब मैंने बारहवीं के बाद एक विश्वविद्यालय में प्रवेश लिया।

कालेज में आने से पहले मेरे मन में कई विचार आए.. जैसे कि मैं जब कालेज जाऊँगा तो वहाँ एक लड़की पटाऊँगा क्योंकि वहाँ आने से पहले मेरा दो बार दिल टूट चुका था।

खैर छोड़िये गुजरे ज़माने की बातों को.. मैं कालेज में पंजीकरण कराने पहुँचा.. और बैठ कर अपनी बारी का इंतजार करने लगा।
कुछ देर इधर-उधर नजर घुमाने के बाद मेरी नजर एक टेम्पो पर पड़ी.. जो कालेज की तरफ आ रहा था।

उसमें से एक दम्पति उतरे तो मैंने भी देख कर नजरें फिरा लीं।
परन्तु किस्मत को कुछ और ही मंजूर था, मैंने न चाहते हुए भी फिर उधर देख लिया।

उसमें से एक चाँद से मुखड़े वाली गुलाबी होंठों वाली.. शराबी आँखों वाली लड़की निकली.. तो मैं ही क्या सारा कालेज उसे टकटकी बाँध कर देखने लगा।

मैं मन ही मन उसको चाहने लगा।

बाद में पता चला कि उसका नाम चिंकी था, वो मेरी क्लास की है।

कालेज नया था.. तो दोस्त भी नए बनाने थे और फिर कुछ दिनों में एक ग्रुप को ज्वाइन कर लिया।

उसमें एक लड़का था चिंटू.. जो साला पक्का लौंडियाबाज किस्म का था। उसने चिंकी से दोस्ती कर ली और अगले सेमेस्टर में उसमें उसको पटा भी लिया। मैं चाह कर भी कुछ न कर पाया।

जब किस्मत में लिखे हों लौड़े.. तो कहाँ से मिलेंगे पकोड़े!

कुछ लड़के हमसे अलग हो गए और हम चार बचे.. चिंटू.. चिंकी मैं और हमारा एक दोस्त सन्नी।
हमारी सबकी दोस्ती अच्छी चलने लगी।

बात है.. जब हम सेकेण्ड इयर में थे। हमने कहीं घूमने का कार्यक्रम बनाया और तय किया कि हम सब एग्जाम के बाद नैनीताल चलेंगे।

कार्यक्रम के मुताबिक हम चारों नैनीताल पहुँच गए और एक होटल में जाकर दो कमरों को बुक किया। अपने कमरों की चाभियाँ लेकर हम अपने कमरे में पहुँच गए।

एक में मैं और सन्नी.. एक में वो दोनों।

सफ़र की थकान के कारण हमें जल्द ही नींद आ गई। किन्तु थोड़ी देर बाद कुछ आवाजें सुन कर मेरी नींद उचट गई और मैंने महसूस किया कि वो दोनों अपनी चुदाई में मशगूल थे।

ये नज़ारा देख कर मेरी झांटें राख हो गईं।
फिर उसी समय मैंने एक प्लान बनाया।

अगले दिन हम नैनीताल की मनमोहक वादियों में घूमने गए।
वहाँ जाकर हमने ढेर सारी फोटो खिचवाईं। मेरे लिए वो पल बड़ा ही सुखद था.. जब चिंकी ने मेरे साथ चिपक कर फोटो ली।

उसकी एक छुवन.. जिसके लिए मैं न जाने कितनों दिनों से प्यासा था।
उसके छूने से मुझे ज़न्नत का मज़ा आया और मैं उसके ख्यालों में खोने लगा।
सन्नी मुझे ख्यालों की दुनिया से बाहर लाया।

देर शाम जब हम वापस आ रहे थे.. तो मैंने उन सबसे छिप कर मेडिकल स्टोर से कुछ नींद की नशे की और वाइग्रा की टेबलेट ले लीं.. साथ ही एक कोल्ड ड्रिंक की बड़ी बोतल भी ले ली।

जब हम होटल पहुँचे तो मैंने उनको कोल्ड ड्रिंक के लिए आमंत्रित किया।

मैंने चार गिलास कोल्ड ड्रिंक के तैयार किए और चुपके से दो गिलास में नींद की गोलियां मिला दीं और एक में नशे और वाईग्रा मिला दी।

नींद की दवा वाले गिलास मैंने सन्नी और चिंटू को पिला दिए और नशे वाला गिलास चिंकी को पिला दिया।

कुछ देर हँसी-ठिठोली करने के बाद दवा ने उन तीनों पर अपना असर दिखाया और वो दोनों वहीं मेरे कमरे में ढेर हो गए और खर्राटे भरने लगे।

चिंकी को भी कुछ होने लगा.. तो मैंने उससे कहा- आज हम सब काफी थक गए हैं.. तभी ये जल्दी सो गए।

मैं उसको लेकर उसके कमरे में चला गया और बातें करने लगे।
मैंने नॉनवेज बातें शुरू कर दीं।

उधर दवाई अपना असर दिखा रही थी।

इसी बीच मैंने उसका हाथ अपने हाथों में ले लिया और सहलाने लगा।
फिर मैंने अपने दिल में दबे प्यार का उससे इजहार किया.. तो वो मुझे एक अजीब सी नशीली नज़रों से देखने लगी।

उसको बताया कि कैसे मैं तड़पता था और सामने से उसके एक दोस्त बनने का नाटक करता रहा।
मेरी बातों को सुन कर उसकी आँखों में आंसू आ गए।

खड़े होकर मैंने उसकी नजरों में अपनी नजरें डाल कर उसे अपनी तरफ खींच लिया और मैंने उसे अपनी बांहों में भर लिया और वो मुझसे छूटने की नाकाम कोशिश करने लगी।

वो सिसकियाँ भरते हुए मुझसे कहने लगी- यह गलत है.. मैं तुम्हारे दोस्त की गर्लफ्रेंड हूँ।
तो मैंने भी उससे कहा- मैंने कितनी बार तेरे नाम की मुट्ठ मारी।

मैंने उसके चेहरे को उठा कर उसके रसभरे तपते हुए गुलाबी होंठों पर अपने प्यार की आग में जलते हुए होंठ रख दिए।
नशे का असर हो रहा था और कुछ देर मना करने के बाद वो मेरा साथ देने लगी।
मैंने उसके हाथ छोड़ दिए और उसके हाथ मेरे सर पर फिरने लगे।

कुछ मिनट उसके होंठ चूसने के बाद मैं उसे गोद में उठा कर बिस्तर पर ले आया, मैंने उसकी टी-शर्ट निकाल दी।
ऊपरी कपड़ा निकालते ही मेरी आँखें चौंधिया गईं।
मेरे आँखों के सामने उसका दूधिया संगमरमर सा तराशा हुआ बदन था.. जिसकी तमन्ना मैंने सिर्फ अपनी कल्पनाओं में ही की थी।

मैं तो समझ नहीं पा रहा था कि क्या करूँ.. कैसे और कहाँ से शुरूआत करूँ।

वो अपने मम्मों को अपने हाथ से छिपाने की कोशिश कर रही थी।
मैंने धीरे से उसके हाथ से हटाए और उसकी चूचियों पर एक प्यारी सी पप्पी ली.. तो उसके शरीर में एक अजीब सी सिहरन सी उठी। वो मेरे सीने में अपना सर रख कर शर्माने लगी।

फिर मैंने धीरे से उसकी पीठ पर हाथ फेरा और उसकी काली ब्रा.. जो उसके सफ़ेद से दूध जैसे बदन पर ऐसी लग रही थी.. जैसे चन्दन के पेड़ से कोई काला सा नाग लिपटा हो.. के हुक खोल दिए।

हुक खुलते ही मैंने वो चीज देखी जिसका दीवाना मेरा सारा कालेज था। आज वो दो सफ़ेद कबूतर मेरी आँखों के सामने थे। जी कर रहा था कि एक बार में ही इनका सारा दूध निकाल कर पी लूं।

वो उन्हें मुझसे छुपाने लगी थी।
तभी मैंने उसके दोनों हाथ उन कबूतरों पर से हटा दिए।

अब मैंने उसे बिस्तर पर लिटा दिया और उसके चूचों का मर्दन करने लगा। उन्हें चूसने लगा उसके मुँह से सीत्कारें निकलने लगीं..
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इसी के साथ मेरी अन्दर की दबी भावनाओं ने रौद्र रूप धारण कर लिया।
ऐसा लग रहा था कि जैसे दो प्रेमी सदियों बाद मिले हों और एक-दूसरे में खो जाना चाह रहे हों।

फिर मैंने अपनी शर्ट निकाल दी और पैंट भी।
कुछ देर उसके स्तनपान करने के बाद मैंने उसकी जींस भी निकाल दी और एक ही झटके में पैंटी भी निकाल फेंकी।
एक चन्दन सी.. संगमरमर रंग जैसी हसीन काया मेरी आँखों के समक्ष थी।

वो भी नशे के असर से चुदाई के मूड में आ गई और मेरे लण्ड को मेरी अंडरवियर के ऊपर से दबाने लगी।
मैंने अपनी भी अंडरवियर निकाल दी।
अब हम दोनों पूर्ण रूप से नग्न थे।

मुझे ऐसा लग रहा था कि जैसे कि मेरा कोई सपना साकार हो रहा है।
उसकी काया का ऐसा कोई भी हिस्सा न होगा.. जहाँ मेरे होंठों की मुहर न लगी हो।

मैंने उससे कहा- अब तुम मेरा लण्ड चूस लो।
चूँकि वो पूरी तरह नशे में थी.. इस लिए उसने देर न करते हुए.. लौड़े को प्यार करने लगी।
उसकी हर छुअन से मेरे शरीर में करंट सा दौड़ने लगा।

चूँकि वो पहले ही चिंटू से कई बार चुद चुकी थी.. तो वो एक पारंगत खिलाड़ी लग रही थी।
अचानक से मेरे शरीर एक लम्बी सी सिहरन उठी.. और मैं उसके मुँह में ही झड़ गया।

फिर मैंने भी एक टेबलेट खा ली.. क्योंकि मैं जानता था वाइग्रा खाई हुई लड़की को संतुष्ट करना एक साधारण लण्ड के बस की बात नहीं होती है।

हम दोनों अब एक-दूसरे के अंगों से खेल रहे थे।
फिर मैंने देर ने करते उसे पीठ के बल लिटा कर उसकी दोनों टांगों को चौड़ाई में फैला दिया।

मेरी आँखों के सामने दो घाटियों के मध्य का रमणीय स्थल था.. जहाँ भूरे रंग के बाल उसकी चूत की खूबसूरती में चार चाँद लगा रहे थे।

मैंने उसकी चूत के मुहाने पर अपना मुँह रखा.. तो वो सिहर उठी। फिर मैं उसकी चूत में अपनी जीभ को आगे-पीछे करके उसकी चूत को अपने मुँह से चोदने लगा।

कुछ मिनट उसकी चूत चूसने के बाद उसका शरीर अकड़ने लगा और मेरे चेहरे पर तेज धार आने लगी.. वो उसके कामरस की धारा थी।
उसकी चूत को साफ़ करके मैं फिर उसका चेहरा चूमने लगा।

कुछ पल बाद मेरा फिर से खड़ा हो गया.. इस बार देर न करते हुए मैंने उसको लिटा कर उसकी टाँगें फैला दीं और उस पर अपने लण्ड के टोपे को रगड़ने लगा।
ज्यों-ज्यों मैं अपना लण्ड चूत पर रगड़ता.. वो उतना ही उत्सुक होती जाती।

उसकी उत्तेजना बढ़ रही थी, वो कह रही थी- प्लीज़ फक मी.. फक मी.. डाल दे इसे मेरे अन्दर.. अपनी इच्छा कर लो पूरी.. आह्ह..
उसके इतने निवेदानात्मक बातों का मुझ पर असर हुआ और धीरे से मैंने अपना लण्ड उसकी चूत में डाल दिया।
उसकी चीख निकल गई।

अगले ही पल मैंने एक और जोरदार झटका मारा.. तो पूरा लण्ड उसकी चूत में समा गया।

उसकी इस बार चीख निकली तो शायद पूरे होटल ने सुनी होगी।
मेरा लण्ड उसकी बच्चेदानी से जा टकराया।

फिर मैं तेजी सी आगे-पीछे करने लगा और वो भी एक मंजे हुए खिलाड़ी की तरह मेरे हर शॉट का जवाब उछल-उछल कर दे रही थी।

पूरी पिच हमारे रस से गीली हो चुकी थी।
लम्बी और अकल्पनीय चुदाई के बाद हम दोनों झड़ने को हुए.. तो वो बोली- आज मेरे तुम्हारे पहले मिलन पर.. तुम अपना वीर्य मेरे अन्दर ही छोड़ो।

मैं भी एक जोरदार शॉट लगाने के बाद अन्दर ही झड़ गया।
इस प्रकार मैंने चिंकी की उस रात जम कर चुदाई की और उसको कई बार चोद कर ही माना।
मैं उसकी चूत में ही लण्ड डाल कर सो गया।

सुबह जब मेरी आँख खुली तो वो वहाँ नहीं थी।
मैंने देखा कि वो बालकनी में बैठी रो रही थी।
जब मैंने उसे चुप होने कहा.. तो उसने मुझसे कहा- हमने दोस्ती को ठेस पहुँचाई है।
उसने पूछा- रात को क्या हुआ था?

तो मैंने भी उसको हमारे सेक्स के बारे में बता दिया।
साथ ही ये भी बता दिया कि कैसे मैंने ये पूरा प्लान किया और मैंने उससे अपने प्यार का इजहार किया।

इश्क वहीं हैं.. हुस्न जहाँ है।

तो वो रोते हुए बोली- ये जानते हुए भी कि मैं किसी और से बहुत बार हमबिस्तर हुई हूँ.. तब भी?

‘मैंने तुमसे प्यार किया है.. तुम्हारे जिस्म से नहीं..’
मेरे ऐसा कहते ही वो मुझसे लिपट गई और बोली- कोई किसी से इतना प्यार कैसे कर सकता है।

वो चिंटू से पहले ही परेशान रहती थी.. तो उसने उससे ब्रेकअप कर लिया।

परन्तु हमने अपने रिश्ते को गुमनाम रखा.. पर सन्नी से नहीं.. क्योंकि वो मुझे अपने भाई जैसा मानता था।

कालेज के बचे दो साल हमने हाहाकारी चुदाई की.. और जिंदगी भर का सेक्स इन्हीं दो सालों में किया।

हमने सिर्फ एक-दूसरे को प्यार किया कोई वादा नहीं।
क्योंकि जिन परिस्थितियों से वो मुझे मिली.. उसे किसी के भी घर वाले मंजूर नहीं करते।

आज उसकी शादी हो चुकी है.. किन्तु शादी के बाद मैंने.. और उसने कभी मिलने की कोशिश नहीं की।
हम फ़ोन से.. या फेसबुक से कभी-कभार बातचीत कर लेते हैं।

उसने अपने पहले बच्चे का नाम भी मेरे नाम पर रखा।

मैं उसके परिवार में उसके गुजरे हुए कल की छवि नहीं प्रदर्शित करना चाहता था।

पर इस ज़िन्दगी में कभी न कभी मिलोगी कहीं न कहीं पर.. हमको यकीन हैं।

तो दोस्तो, ये थी मेरी प्यार की एक दास्तान.. मुझे बताइएगा.. कैसी लगी आप सबको।
[email protected]

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