जवानी की आग में चूत का सहारा

3 स्माल सेक्स स्टोरी को जोड़ कर मैंने अपनी कहानी लिखी है. इसमें मैंने अपनी बुआ, चाची और एक पड़ोस की लड़की को कुछ दिनों के भीतर चोदा.

मेरा नाम विजय है.

ये 3 स्माल सेक्स स्टोरी 5 साल पुरानी हैं.

मुझे अपने गांव जाना था. वहां पर हमारे रिश्तेदारों के यहां शादी थी. मुझे भी सभी घर वालों के साथ उस शादी में जाना था.

हालांकि मेरा जाने का मन नहीं था लेकिन मैंने जाने का मन बना लिया.
फिर मैंने अपने गांव की बस पकड़ी और सुबह गांव पहुंच गया.

वहां पहुँचते ही मेरा मन पूरी तरह से बदल गया क्योंकि उधर हर तरफ शादी का माहौल था; एक से एक बढ़कर माल दिख रहे थे.
अगले दिन शादी खत्म हो गई.

जो दुल्हन थी, वो मेरी बुआ लगती थी.
बुआ एकदम देसी माल जैसी थी. उसका सांवला रंग, गोल चेहरा, बड़े थोड़े मोटे होंठ, बड़ी बड़ी चूचियां और मोटी उठी सी गांड, जिसको देखते ही लंड खड़ा हो जाता था.
एक हफ्ता यूं ही गुजर गया और मैं बस बुआ की ही याद करता रहा.

फिर शादी के बाद जब बुआ को वापस चौथी में लेकर लाया गया, तो वो पहले से भी ज्यादा मस्त माल हो गयी थी.

उसको जब मैंने देखा तो देखते ही चोदने का मन करने लगा मगर हिम्मत नहीं होती थी.
वो आखिर मेरी बुआ जो थी.

गले दिन मैं घर में अकेला था और सब लोग खेत और अपने कामों में लगे थे.

मैं बाथरूम जाने लगा.
तभी मुझे लगा कि अन्दर कोई नहा रहा है, चूड़ियों के खनकने की आवाज आ रही थी.
तो मैं वहीं छुप कर देखने लगा.

बाथरूम के दरवाजे के एक छेद से अन्दर झांक कर देखा तो वो बुआ ही थी.
वह बिल्कुल नंगी थी और खड़ी होकर अपनी चूचियों को मसल रही थी.

बुआ की मस्त रसीली चूचियां देखते ही मेरा लंड खड़ा हो गया.
मैंने नीचे नजर दौड़ाई तो बुआ की जांघों के बीच उनकी गुलाबी चूत बहुत ज्यादा सुन्दर दिख रही थी.

बुआ की चूत देख कर मन कर रहा था कि अभी अन्दर घुस जाऊँ और उसको पटक कर चोद दूँ.

यही सोच कर मैं ना जाने कब अपने लंड को हाथ में लेकर हिलाने लगा.
मेरी आंखें बंद हो गयी थीं और मैं बस बुआ की चूत में अपने लंड को महसूस कर रहा था.

फिर जैसे ही मैं झड़ने को हुआ कि अचानक से दरवाजा खुला और मेरा माल सीधे उसके सामने ही गिरने लगा.
वो मेरे सामने एकदम नंगी खड़ी थी और मुझे देख रही थी.
मैं भी उसको देखने लगा.

बुआ कुछ कहने वाली थी कि उससे पहले ही मैंने उसको कस कर पकड़ लिया.
वो खुद को छुड़ाने की कोशिश कर रही थी और मैं उसे किस करने में लगा था.

वो पहले तो इधर उधर मुँह करने लगी. मैंने उसके मुँह को छोड़ा और मैं उसकी एक चूची को मुँह में लेकर चूसने लगा.
अपने दूसरे हाथ से सीधे बुआ की चूत को सहलाने लगा.

वो भी शायद बाथरूम में चुदासी होकर अपनी चूत से खेल रही थी तो मेरे ऐसा करने से वो गरमा गई और अब उसके मुँह से ‘आ आ आह.’ की सिसकारी निकलने लगी.
जल्दी ही उसकी चूत भी गीली और चिकनी हो गयी थी.

मैंने वहीं बुआ की एक टांग उठाकर उसको दीवार से सटा दिया और अपने लंड को उसकी चूत के मुँह से लगा दिया.
जैसे ही लंड चूत से मिला, बुआ ने एक लम्बी ‘आ आ आह …’ की सिसकारी ली और अपनी चूत को ढीला कर दिया.

मैंने एक धक्का मारा और ‘आ आह आह मर गई की कराह के साथ मेरा आधा लंड बुआ की चूत में घुस गया.

वो कुछ देर बाद मेरा साथ देने लगी, तो मैंने दूसरा झटका और कसकर दे मारा.
तब बुआ थोड़ा चीखती हुई बोली- तुम्हारा लंड बड़ा है, थोड़ा धीरे-धीरे डालो.
मैंने कहा- ठीक है, पर आपकी चूत बहुत टाइट है बुआ!
वो कहने लगी- हां, अभी ज्यादा इस्तेमाल नहीं हुई है ना!
ये कह कर वो हंसने लगी.

फिर मैं अपने लंड को बुआ की चूत के अन्दर आगे पीछे करने लगा.

थोड़ी देर में बुआ को भी मजा आने लगा और वो भी जोश में आ गयी.
अब बुआ ने मुझसे तेज तेज धक्का मारने को कहा.

फिर तो बस मैंने बुआ की दोनों टांगें अपनी कमर पर सैट की और उसे दीवार से टिका कर सटासट पेलना चालू कर दिया था.
बुआ मेरी गर्दन को पकड़ कर मेरे सीने से अपनी चूचियाँ रगड़ रही थी और मेरे होंठों को अपने होंठों से लगा कर बेहद गर्म तरीके से चूम रही थी.

उसकी जीभ मेरे मुँह में चल रही थी और चूत में लंड अपना काम कर रहा था.
मैं अपने हाथों से उसकी गांड को उठा कर उसे धकाधक पेल रहा था.

बुआ मेरे होंठों से अपने होंठ हटा कर मेरे गालों को चूमती हुई मजा ले रही थी.
वो बेहद मदहोशी से सिसकार रही थी- आह मेरे राजा … बहुत मजा आ रहा है बस ऐसे ही चोदो … फाड़ दो मेरी चुत!

कुछ दस मिनट बाद वो अपने बदन को अकड़ाती हुई झड़ गयी.
उसकी चूत के गर्म रस से मैं भी न रुक सका और उसकी चूत में झड़ गया.

चुदाई के बाद हम दोनों अलग हो गए.
वो शर्मा कर वहां से चली गयी और मैं भी अपने लंड को साफ करके चल गया.

अब तो मुझे बस उसकी चूत का नशा हो गया था.
जब ही उसको देखता, मेरा लंड खड़ा हो जाता.

उस समय गर्मी का मौसम था.
लोग अक्सर दोपहर में सो जाते थे.

मैं अपने चाचा के घर में अक्सर जाता था, उनका घर मेरे बगल में ही था.

चाची भी बहुत मस्त माल थीं.

बुआ की चुदाई के दो दिन बाद दोपहर में मैं चाची के घर ही सो गया था.
करीब एक बजे दोपहर में मुझे लगा कि कोई मेरे बगल में बैठा है.
मैंने धीरे से अपनी आंखें खोल कर देखा और फिर से सोने लगा.

वो चाची ही थीं और वो मुझसे सटकर बैठी थीं.
मेरा लंड भी उनके शरीर की गर्मी से खड़ा होने लगा था. मैं गर्मी में हमेशा हल्की तौलिया ही बाँधता था.

जैसे जैसे मेरा लंड खड़ा हो रहा था, मुझे उसके चारों तरफ कुछ अजीब सा लग रहा था.
मैंने फिर धीरे धीरे देखा तो चाची बार बार अपना हाथ मेरे लंड के पास लाती और हटा ले रही थीं.

मैंने जानबूझ कर करवट ली और अपने हाथ से कुछ इस तरह से अपनी तौलिया हटा दी कि उन्हें ऐसा लगे कि वो अपने आप हट गई है.

फिर मैंने अपने खड़े लंड को एक दो बार हिला कर बाहर निकाल दिया और सोने का बहाना करने लगा.
अब मेरा लंड चाची की आँखों के सामने था.

मुझे उनकी तेज तेज चल रही सांसों से लगने लगा कि चाची अब गर्म हो गयी हैं.
अचानक मेरे लंड को किसी ने पकड़ लिया और जोर से किस कर लिया.

मैंने भी मौके का फायदा उठाकर तुरन्त हाथ पकड़ लिया और उनके चेहरे को लंड पर ही दबा दिया.

चाची समझ गईं.
उन्होंने तुरन्त खड़े लंड को मुँह में लेकर चूसना चालू कर दिया और मेरे लंड के सुपारे को चाटना शुरू कर दिया.

मुझे लंड चुसवाने में बहुत मजा आ रहा था.
मैंने भी अपना हाथ उनकी चूत पर रख दिया और उसे दबाने लगा.

चाची की ‘आ आह …’ निकल गई और उन्होंने मेरे लंड को अपने तक लेकर चूसना शुरू कर दिया और साथ ही वो मेरे अंडों को भी सहलाने लगी थीं.

अब आवाज निकालने की मेरी बारी थी ‘आह उई ऊऊह बहुत मस्त चूसती हो चाची.’

मैंने ये कहा, तो चाची हंसने लगीं और बोलीं- तुम्हारा गन्ना है भी तो बड़ा … इतना मोटा लठ देख कर रहा नहीं गया, तो चूस लिया.

मैंने कहा कि तो क्या अब तक मूंगफली ही चूसती रही हो चाची?
चाची हंसने लगीं और बोलीं- बड़े हरामी हो … सब समझ गए.

मैंने कहा- चाची, अब इसे अपनी चूत का मजा भी तो दे दो.
चाची बोलीं- हां अब तुम मेरी चूत की प्यास बुझा ही दो. अभी घर में भी कोई नहीं है.

मैं उठा और उनके कपड़े उतारने शुरू कर दिया.
वो नंगी होकर चित लेट गईं और मैंने उनकी चूत से अपने लंड मिला कर एक करारा झटका दे मारा.

मेरे इस बम पिलाट शॉट से मेरा आधे से ज्यादा लंड चूत में घुसता चला गया और चाची की जोरदार चीख निकल गई ‘आह मर गई … रुक जा बेदर्दी …’
मगर मैं रुका नहीं और 3-4 करारे झटके मारता हुआ पूरा लंड उनकी चूत में घुसेड़ दिया.

चाची कलपती रहीं- आह आह उईईई!
वो चीख पुकार करती रहीं और मैं धक्के देने में लगा रहा.

मुझे चाची कि एकदम तंग चूत चुदाई में बहुत मजा आ रहा था.

कुछ ही देर में चाची भी मस्त होने लगीं और अब वो भी अपनी गांड को खूब उठा उठा कर चुदवा रही थीं.

फिर थोड़ी देर में हम दोनों एक साथ ही झड़ गए और सो गए.
जब मैं उठा तो चाची नहीं थीं.
फिर मैं वहां से वापस अपनी बुआ के घर आ गया.

जैसे ही मैं वापस आया, बुआ मेरा इंतजार कर रही थीं.
फिर हम सभी ने खाना खाया और सोने की तैयारी करने लगे.
मगर मुझे नींद नहीं आ रही थी, तो मैं चुपचाप उसके कमरे में चला गया.

उसका कमरा बंद था, मतलब बुआ कमरे में नहीं थी.
मैं छत पर गया और बैठ कर सोचने लगा कि अब मैं क्या करूं.
उस समय रात के एक बजे थे कि अचानक मेरी नजर हमारे पास की ही छत पर जा पड़ी. उधर हल्की सी मोबाइल की रोशनी थी और उससे ये लगा कि कोई तो है जो जग रहा है.
लेकिन कौन है … अब मैं ये जानना चाह रहा था.

मैं ध्यान से उसे देखने लगा तो पता चला कि वो कोई लड़की है, जो किसी से बात कर रही थी.
मैं उसकी तरफ आकर्षित होने लगा और आगे बढ़ कर उसको देखने लगा.

थोड़ी देर में वो उठी और अपना मोबाइल वहीं पर रखकर कहीं जाने लगी.
मैं उसको देखता रहा, फिर चुपके से उसकी छत पर जाकर उसका मोबाइल उठा कर अपने साथ ले आया और वहीं पर खड़ा होकर उसके आने का इन्तज़ार करने लगा.

थोड़ी देर बाद जब वो वापस आयी, तो अपना मोबाइल ढूंढने लगी. मैंने उससे कुछ नहीं कहा.
कुछ 20 मिनट के बाद मैंने मोबाइल की लाइट जलाई तो वह चौंक गयी और मेरी तरफ देखने लगी.

मैंने उसे इशारे से पास बुलाया, तो वह नहीं आयी.
फिर मैंने धीरे से कहा- कुछ ढूंढ रही हो? मुझे पता है कहां है!

अब वह मेरे पास आयी और बोली- हां, बताओ कहां है?
मैं उसके पास गया और उसे जब करीब से देखा, तो मेरा लंड खड़ा हो गया.

वो एक कोई 20 साल की कसी हुई नाटे कद की लड़की थी. उसकी चूची बहुत ही कमाल की थीं.
मैं उससे बोला- क्या हुआ?

उसने कहा- मेरा मोबाइल नहीं मिल रहा है … मैं यहीं रख कर पानी पीने गयी थी!
मैंने कहा कि अगर मिल गया तो?
‘तो दे दो!’

मैंने कहा कि एक शर्त पर!
उसने कहा- क्या?

मैंने कहा कि तुम मुझे दो किस करोगी और मैं तुमको 3 किस करूंगा.
पहले तो वो गुस्सा हो गयी और मुझ पर धीरे-धीरे चिल्लाने लगी.
फिर मैं चुपचाप वापस आने लगा, तो उसने धीरे से कहा कि ठीक है और कुछ नहीं करोगे?
मैंने कहा- हां.

चूंकि चिड़िया फंस गयी थी.
अब मैं उसके पास गया और सीधे उसकी कमर में हाथ डाल कर उसके होंठ पर किस करने लगा.

करीब 5 मिनट तक मैंने उसके होंठों को चूमा और चूसा.
फिर उसने कहा- हो गया?
मैं बोला- अब तुम भी करो.

तो वो भी किस करने लगी और मैं भी उसकी पीठ से लेकर गांड तक हाथ फेरता रहा.
फिर वो हट गयी तो मैंने दूसरे किस के लिए कहा.

उसने फिर से होंठ आगे किए … लेकिन इस बार मैंने उसकी चूचियों पर हाथ फेरा और कहा- यहां करना है किस.
वो थोड़ा घबरा गई.

तो मैंने उससे कहा- घबराओ नहीं … सिर्फ किस करेंगे.
वो मान गयी.

मैंने धीरे-धीरे उसके कपड़े हटाए और उसकी एक चूची के निप्पल को हाथों से मसल दिया.
उसकी आह निकलने लगी और ऐसे बारी बारी से दोनों निप्पल को घिसता और चूसने लगा.
वो ‘आआ ईई …’ करने लगी और मुझे अपनी चूचियों पर दबाने लगी.

अब तक वह गर्म हो गयी थी और ना चाहते हुए भी मेरा साथ देने लगी.

फिर मैंने धीरे धीरे उसकी चूत के पास अपने हाथ फिराना शुरू कर दिया.
मस्त फूली हुई चूत थी उसकी … और एकदम गीली भी.

मैं उसकी चूत के दाने को भी घिसने लगा.
वो आ आ आह आह की सिसकारी भी लेने लगी.

तभी मैंने एक उंगली उसकी चूत में घुसा दी.
उसने हल्का सा दर्द महसूस किया.

मैंने दूसरी उंगली भी पेल दी और अन्दर बाहर करने लगा.
कुछ देर के दर्द के बाद अब उसे भी मजा आने लगा था और वो अब साथ देने लगी थी.
मैंने अपने लंड को उसके हाथ में पकड़ा दिया.

उसने कहा- ये तो बहुत मोटा और बड़ा है!
मैंने कहा- पहले जो लिया है, वो इसी तरह का था क्या?
वो कहने लगी- वो इससे छोटा था.

मैंने उससे लंड चूसने को कहा तो वो तुरन्त उसे मुँह में ले कर चूसने लगी.
मेरी तो ‘आह आह …’ की आवाज निकलने लगी.
साली बहुत मस्त चूस रही थी.

फिर उसने कहा- अब डाल दो मेरी चूत में आग लगी है.
मैंने लंड उसकी चूत पर रखा और एक जोरदार झटका दे मारा.

मेरा टोपा उसकी बुर में घुस गया.
वो रोने लगी मगर मैंने दो तीन झटके और जोरदार मारे और अपना पूरा लंड उसकी बुर को फाड़ कर अन्दर घुसेड़ दिया.

मैं थोड़ी देर उसके निप्पल चूसता रहा. वो शांत हो गई और मेरा साथ भी देने लगी.
मैं धक्के देने लगा.
वो भी गांड उठा उठा कर ज़वाब देने लगी.

करीब 10 मिनट में हम दोनों झड़ गए और ढेर हो गए.
मैं उसके बाद उससे चिपक कर लेटा ही रहा.

थोड़ी देर में मैंने फिर उसकी बुर में उंगली करनी शुरू कर दी.
वो फिर से तैयार हो गयी.

इस बार मैंने उसे घोड़ी बनाया और पीछे से उसकी बुर में लंड पेल दिया.

लंड अन्दर पेल कर मैं झटका पर झटका मारने लगा.
कुछ देर बाद हम दोनों साथ में ही झड़ गए और उसने मुझे किस किया.

हम दोनों अलग हो गए.
मैंने उसका नंबर ले लिया और अब चूत चुदाई की जरूरत पड़ने पर उसे बुलाकर पेल लेता हूं.

आपको मेरी 3 स्माल सेक्स स्टोरी कैसी लगी, कमेन्ट जरूर करना.
[email protected]

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