दोस्त की पुत्रवधू की चूत मारी

Xxx पंजाबी गर्ल सेक्स कहानी मेरे दोस्त की बहू की है जिसका पति कनाडा गया हुआ था. पंजाबी लड़की लंड के बिना नहीं रह सकती तो उसे मैं दिखा और उसने मुझे अपने जलवे दिखने शुरू कर दिए.

मित्रो, मेरी कहानी
दोस्त की विधवा पत्नी ने मरवाई चूत
में आपने पढ़ा कि मैं अपने दिवंगत दोस्त की बीवी को उसी की पहल पर चोद चुका था. पर उसकी पुत्रवधू भी मुझे कामुक इशारे करके फांस रही थी. मैं भी उसकी जवान चूत मारने में क्यों चूकता.

अब आगे Xxx पंजाबी गर्ल सेक्स कहानी:

करीब एक सप्ताह बाद रात को एक बजे मेरे मोबाइल की घंटी बजी।
कुलवंत का फोन था।

“हैलो कुलवंत, घर में सब कुशल मंगल है न?”
“तुम अभी हमारे घर आ जाओ, गगन की तबीयत काफी बिगड़ी हुई है। उसे इलाज के लिए पीजीआई अस्पताल लेकर जाना है।”
“मैं अभी आया भाभी, आप तैयार रहना।”

मैं कम्बल ओढ़े एक्टिवा पर उनके घर पहुंच गया।
कुलवंत ने कार की चाबी पकड़ा दी।

गैराज से कार निकाल कर बाहर खड़ी कर मैं गगन के बैडरूम में चला गया।
गगन बैड पर कम्बल ओढ़े लेटी हुई थी- अंकल, मुझे उठाकर कार तक ले जाएं; मुझसे चला नहीं जा रहा। शायद ब्लडप्रेशर लो हो गया है।

उसे बाहों में उठाते समय कम्बल एक तरफ गिर गया।

उसने झीनी नाईटी पहनी हुई थी। गुलाबी नाईटी में से उसके सेक्सी बूब्स दिख रहे थे।

वह मेरे सीने से चिपक गई।
गगन के बूब्स मेरे छाती में गड़े जा रहे थे।

कार मैं बिठाते समय मैंने अंधेरे का फायदा उठाते हुए गगन के बूब्स दबा दिए।
उसने मेरी और मुस्कुराते हुए बहुत सेक्सी निगाहों से देखा।

कुलवंत अपनी पोती कीरत को लेकर मेरे साथ आगे बैठ गई।

अस्पताल पहुंच कर मैंने व्हीलचेयर पर बैठाते हुए एक बार फिर गगन के बूब्स दबा दिए।
उसके मुंह से उई… ई… ई… ई की आवाज़ निकल गई।

“क्या हुआ गगन?”
“कुछ नहीं मम्मी!” मुझे आंख मारते हुए बोली- व्हीलचेयर पर बैठते समय बाजू पर थोड़ा प्रेशर पड़ गया था।

वार्ड में पहुंचने पर डॉक्टर ने गगन का चैकअप करने के बाद कहा- घबराने वाली कोई बात नहीं। टैंशन होने से इस का ब्लडप्रेशर काफी लो हो गया है। इसीलिए यह कमजोरी महसूस कर रही है।

डाक्टर ने पर्ची पर दवाई लिख कर नर्स को पकड़ा दी।
नर्स ने गगन को पानी से दो तीन टैबलेट देकर एक इंजेक्शन लगा दिया।

कुछ समय बाद गगन गहरी नींद में सो गई।
उसी समय नर्स ने हमें बाहर बैठ कर इंतजार करने को कहा।

मैं और कुलवंत गैलरी में आ गए।
ठंड बहुत ज्यादा थी।
गैलरी में स्नाटा छाया हुआ था। हमारे अलावा गैलरी में और कोई भी नहीं था।

कुलवंत मेरे साथ कम्बल ओढ़ कर बैठ गई।
वह बहुत उदास दिखाई दे रही थी, मेरे हाथ को अपने हाथ में लेकर बोली- जगतार, पता नहीं गगन को टेंशन किस बात की है? घर में किसी चीज की कोई कमी नहीं।

“कमी तो बहुत है कुलवंत!”
“किस चीज़ की कमी है जगतार उसे?”
“कुलवंत माना कि घर में सब कुछ है। लेकिन गगन को शरीरिक सुख देने वाला उसका पति ही जब उसके पास नहीं रहेगा तो टैंशन तो होगी ही!”

मैं बोला- कुलवंत, मुझे कहना तो नहीं चाहिए लेकिन फिर भी कहने को मजबूर हूं। कहीं मेरी बात सुन कर मेरे से नाराज भी न हो जाना।
“तुम कहो जगतार! मैं तेरी किसी भी बात का गुस्सा नहीं करूंगी।”

“कुलवंत एक शादीशुदा लड़की कई दिनों तक भोजन किए बगैर तो रह सकती है लेकिन सेक्स की भूख कभी भी बर्दाश्त नहीं कर सकती। गगन की अभी उम्र ही क्या है? घरेलू और अच्छे परिवार की लड़की है। इसी लिए घर की चौखट से बाहर नहीं गई। वरना उसकी जगह कोई और होती तो कब की किसी से फ्रेंडशिप कर चुकी होती। जसवंत ने इसे इस उम्र में अकेली छोड़ कर बहुत बड़ी गलती की है।”

“जगतार, मैं उसकी हालत को अच्छी तरह से समझती हूं लेकिन मैं कर भी क्या सकती हूं?” उसने मेरे कंधे पर सिर रख लिया।

मैंने उसे अपनी छाती से लगा कर कहा- चिन्ता मत कर, मैं हूं न तेरे साथ! सभी कुछ ठीक हो जाएगा।

तभी एक नर्स ने गैलरी में आ कर कहा- गगन जग चुकी हैं। आप उसे घर लेकर जा सकते हैं।

कुलवंत ने डॉक्टर से डिस्चार्ज स्लिप और दवा ली।
मैंने आराम से गगन को उठाया और व्हीलचेयर पर बिठा दिया।
वह मुझे सेक्सी निगाहों से देख रही थी।

अस्पताल से बाहर लाकर मैंने उसे गोद में उठाकर एक बार फिर कार की पिछली सीट पर बिठाते समय गगन के बूब्स दबा दिए।
गगन के मुंह से आह की आवाज सुन कर कुलवंत ने मेरी तरफ देखा।

मैंने गगन से पूछा- क्या हुआ? गगन तुम ठीक तो हो।
“ठीक हूं अंकल, आप चिंता न करें।”

कुलवंत अपनी पोती कीरत के आगे बैठ गई।
मैं गाड़ी स्टार्ट कर घर की तरफ चल पडा।

घर के बाहर पहुंचने पर कुलवंत गेट खोल कर कीरत के साथ भीतर चली गई।
मैं गगन को कार के अंदर से उठा कर बाहर निकालने लगा तो वह बोली- अंकल, आप मुझे सहारा दे कर भीतर ले जाएं।

लेकिन उससे जब चला ना गया तो बोली- प्लीज अंकल, आप मुझे उठा कर ही भीतर ले जाएं।

उसी दौरान कुलवंत बाहर आ गई।
उसने भी मुझे गगन को उठा कर भीतर ले जाने को कहा।

मैंने गगन को अपनी बाहों पे उठाया तो वह मेरे सीने से चिपक गई।
मुझे अपने सीने पर उसके बूब्स की चुभन महसूस हो रही थी।

बाहर अंधेरा होने की वजह से कुलवंत टार्च लेने के लिए कोठी में चली गई।

मैंने इस अवसर का फायदा उठाते हुए गगन के होठों को चूमा और उसके बूब्स दबा दिए।
गगन मुस्कुराते हुए बोली- अंकल तुम बहुत ही शरारती और सेक्सी हो। कोई भी अवसर का फायदा उठाने से आप नहीं चूकते। लेकिन बूब्स को बहुत ही अच्छी तरह से मसलते हो। मुझे बहुत अच्छा लगा है। अंकल शादी के बाद पहली बार किसी ने मेरे होठों को चूमते हुए इतने प्यार से बूब्स दबाए हैं। लेकिन सिर्फ बूब्स दबाने या चूमने से मेरा काम नहीं चलेगा। मुझे आप से और भी बहुत कुछ चाहिए।

“और क्या चाहिए गगन?”
गगन कुछ कहने ही वाली थी कि तभी कुलवंत टार्च ले कर बाहर आ गई।
कुलवंत आगे टार्च की रोशनी दिखाते हुए चल रही थी और मैं उसके पीछे गगन को उठा कर उसे बैडरूम में ले गया।

उसे बिस्तर पर बिठा कर मैंने गगन को दवा देने के लिए कुलवंत को रसोई से गर्म पानी लाने को कहा।
उसके जाते ही गगन ने मेरे होठों को चूसने लगी।
मैं भी उस के बूब्स को दबाने लगा।

होठों को चूमते हुए गगन बोली- अंकल, आपने तो मेरे अंदर आग लगा दी है। अब अवसर मिलते ही इसे शांत भी कर देना! प्लीज अंकल मेरी भूख मिटाने के लिए जल्द ही प्रयास करना होगा। वरना सैक्स की भूख और शरीर की अग्नि मुझे जला देगी।
“चिंता मत करो, गगन, मैं जल्द ही तुम्हारी चूत की आग बुझा दूंगा।”

इसी बीच कुलवंत ने आकर गगन को गुनगुने पानी से दवा देकर रूम हीटर चालू कर दिया।

गगन को कम्बल देने के बहाने मैंने एक बार फिर गगन का बूब्स दबा दिए।
उसने नशीली निगाहों से मेरी तरफ देख कर आंखें बंद कर लीं।

मैं और कुलवंत बैड के साथ पड़ी कुर्सियों पर बैठ गए।

“अच्छा कुलवंत, अब मैं चलता हूँ।”
“जगतार, सुबह तक यहीं ठहर जाओ। कहीं फिर से हॉस्पिटल न जाना पड जाए।”
उसी समय गगन बोली- अंकल मम्मी ठीक कह रही हैं। आप गेस्टरूम सो जाएं, सुबह चले जाना।

मैं तो खुद यही चाहता था।

तब मैं और कुलवंत बाहर आ गए।
गेस्ट रूम का ताला खोलकर कुलवंत मुझसे लिपट कर बोली- इतनी ठंड और रात में हमारी मदद करने के लिए धन्यवाद। तुम न होते तो पता नहीं गगन का क्या हाल होता।

“कुलवंत तेरे और तेरे परिवार की मदद के लिए मैं खुछ भी कर सकता हूं।” यह कहते हुए मैंने उसके बूब्स दबाते हुए होंठों को चूसने लगा।
वह भी मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए मेरे होंठों को चूम रही थी.

सुबह करीब 6 बजे मुझे लगा जैसे कोई मेरे बालों पर हाथ फेरते हुए मेरे मेरे होठों को चूम रहा हो!
मैंने अचानक अपनी आँखें खोलीं।

गगन मेरे बालों में हाथ फेरते हुए मेरे होंठो को चूम रही थी।
वह मेरे ऊपर लेट गई।

“तुम यहां कैसे आई?”
“दूसरे दरवाजे से … कुलवंत तेरे बेडरूम में आ गई तो?”
“मेन दरवाजे की अंदर से कुंडी लगा कर आई हूं। अगर आ भी गई तो एक दो बार कुंडी खड़का कर चली जाएंगी। वो मुझे कभी भी डिस्टर्ब नहीं करना चाहेंगी।”

मैंने उसके बूब्स मसलते हुए पूछा- गगन रानी, अब तबीयत कैसी है?
“अंकल तबीयत तो उसी समय ठीक हो गई थी जब आपने रात को अस्पताल ले कर जाते और वापिस आते समय मुझे अपने सीने से लगाकर मेरे होंठों को चूमा और चूसा था। अंकल, आपको अच्छी तरह से प्यार करना आता है। जसवंत ने मेरे कभी भी बूब्स नहीं थे दबाए। उसे तो प्यार ही नहीं करना आता। हमेशा फटाफट कपड़े उतारकर अपनी छोटी सी लुल्ली (लंड) मेरी चूत में डाल कर पांच सात झटके मार कर झड़ कर दूसरी तरफ मुंह करके सो जाता था। अंकल, इतने सालों में वह मुझे एक बार भी सन्तुष्ट नहीं कर पाया। मैं चूत की प्यास को उंगली से ही बुझाने की कोशिश करती रही हूं।”

गगन बोलती रही- उस दिन जब आपने मुझे प्यार से अपने सीने से लगाया था, मेरा दिल आपको छोड़ने को नहीं कर रहा था। क्या आपने महसूस नहीं था किया?
“अच्छी तरह से किया था मेरी जान!”

उसने पैंट के ऊपर से मेरे लंड को पकड़ लिया- अंकल, मैंने तो उस दिन इस मूसल जैसे लंड को भी अच्छे से महसूस किया था। उसी समय मैंने आप से जमकर चुदाई करवाने का मन बना लिया था। अंकल, मेरा दिल तो उसी समय तुमसे अपनी चूत का चितौड़गढ़ बनवाने को करने लगा था। लेकिन मम्मी की वजह से मैं कुछ कर नहीं थी पाई।

गगन मेरे होंठ चूसने लगी।
मैं भी उसकी बूब्स को दबाने लगा।

उसने पहले अपनी नाईटी उतारी और बाद में मेरे सारे कपड़े उतार दिए।
उसके बूब्स को दबाते हुए निप्पल चूसने लगा तो उसके मुंह से ऊंह आह ओह उई आवाज़ निकलाने लगी।

मैं उसकी नाभि चाटने लगा।

“अंकल, बहुत मज़ा आ रहा है।”

फिर मैं उसकी मखमली चूत चाटने लगा।
“उई मम्मी क्या कर रहे हो अंकल? मजा आ गया … ऐसे ही चाटते रहो। हाए ऊंह उई मां … मेरे को कुछ होता जा रहा है अंकल!”

मैं चूत के अंदर अपनी जीभ डाल कर अंदर बाहर करने लगा।
“अंकल चूत में खुजली हो रही है।”

मैंने जीभ को अंदर बाहर करना जारी रखा।
वह मेरे सिर को पकड़ कर अपनी चूत पर दबाए जा रही थी- अब रुकना मत, चाटते रहें। बूब्स और निप्पल भी खींचें। बहुत मज़ा आ रहा है। अब रुकना मत अंकल और उई … ई … ईई … मम्मी … मैं गई कहते हुए उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।

मैंने सारा पानी चाट कर चूत की सफाई कर दी।
मुझे अपनी बाहों में लेकर मेरा सिर छाती पर रख कर प्यार से सहलाते हुए बोली- अंकल आप असल में सेक्स गुरु हैं। काश आप मेरे पति होते!
“गगन अब हम पति पत्नी जैसे ही रहेंगे।”

मैं उसके बूब्स दबाने लगा।

मैंने उसे कुर्सी पर बैठने को कहा।
उसने कुर्सी पर बैठ कर कहा- अंकल, प्लीज अब मेरी चूत की खुजली को भी मिटा दो।

मैंने अपने लंड को उसके होंठों पर रगड़ना शुरू कर दिया।
“क्या कर रहे हो अंकल?”
“गगन लंड को अपने मुंह में लेकर कुल्फी जैसे चूस … तुझे बहुत मजा आएगा।”
“अंकल मैंने ब्लू फिल्म में लड़कियों को लंड चूसते देखा है।”

वह मुंह में लंड लेकर चूसने लगी।
मैं लंड से उसके मुंह को चोद रहा था।
वह मजे से लंड चूस रही थी।

मैंने उसके उसके बूब्स को दबाते हुए मुंह को चोदने की गति बढ़ा दी।

“आह गगन, मेरी जान, तुम लंड बडे़ अच्छे से चूस रही हो। बहुत मजा आ रहा है। आह उह … मजा आ गया गगन!” कहते हुए मैंने सारा लंड मुंह में घुसेड़ कर उसके सिर को लंड की ओर दबा लिया।
उसे सांस लेने में दिक्कत होने लगी।

इसी दौरान लंड ने वीर्य की पिचकारी मार कर गगन के मुंह को वीर्य से लबालब भर दिया।
वह लंड बाहर निकालना चाहती थी पर मैंने निकलने न दिया।

इसी दौरान उसने सारा वीर्य गटक लिया तो ढीला होकर लंड अपने आप मुंह से बाहर निकल गया।
वह तुरंत बाथ रूम में अपना मुंह साफ कर आई।

आते ही मुझे बांहों में लेकर वह बोली- अंकल, आपने बड़ी चलाकी से मुझे सारा वीर्य पिला दिया। वीर्य का मैंने पहली बार स्वाद चखा है। लंड चूस कर मुझे वैसे ही मजा आया, जैसे चूत चटवाने से आ रहा था।

हम दोनों बेड पर लेट गए।
मैं गगन के बूब्स दबाने और मसलने लगा।
गगन मेरे लंड को हिलाए जा रही थी।

थोड़ी देर में लंड खड़ा होकर खूंटे जैसा दिखने लगा।

“अंकल, अब इस मूसल जैसे अपने लंड से मेरी चूत की ऐसे चुदाई करके इसके परखच्चे उड़ा दो। वर्षों से प्यासी है मेरी चूत! अंकल, बूब्स और निप्पल और ज़ोर से दबाकर चूसो।
वह बोल रही थी- प्लीज अंकल, अब रहा नहीं जा रहा। प्लीज चूत को फ़ाड़ इसकी हालत खस्ता कर दो। ज़रा इसे भी तो पता चल जाए कि असल मर्द चुदाई कैसे करते हैं। बूब्स और निप्पल मसल मसल कर लाल कर दो। अब मैं और नहीं रुक सकती।”

वह Xxx पंजाबी गर्ल सेक्स की मारी मेरे लंड को पकड़ कर चूत पर घिसने लगी- मुझे इतने प्यार से चोदना कि आज का दिन मैं और मेरी चूत कभी न भूलें।
मैंने बूब्स मसलते हुए कहा- चिंता मत कर … तेरी ऐसी चुदाई करूंगा कि तुझे ज़िन्दगी भर याद रहेगा।

उसके निप्पल चूसते हुए मैंने कहा- आज की चुदाई के बाद कभी भी जसवंत से नहीं चुदना चाहेगी तू!
मैं अपनी एक उंगली गगन की चूत में धकेल कर तेजी से अंदर बाहर करने लगा।

“उई … ई … ई … मम्मी मैं मर गई। अंकल बहुत मजा आ रहा है। प्लीज दो उंगलियां डाल दो। अंदर बाहर करने की गति भी बढ़ा दो! अंकल बहुत मज़ा आ रहा है। प्लीज, अब और तंग न करो!”

उसकी टांगों को फैला कर मैंने अपने कंधों पर रख लिया, चूत पर लंड सैट कर बूब्स को पकड़ कर एक ज़ोरदार धक्का लगाया।
मेरा आधा लंड चूत में घुस गया।
उसकी चीख निकल गई।

बूब्स को दबाते हुए मैंने उसके होंठों को अपने मुंह में ले लिया।
गगन दर्द से कराह रही थी।

कुछ समय बाद वह थोड़ी शांत हुई तो मैंने एक और ज़बरदस्त झटका लगाते हुए पूरा लंड चूत में घुसा दिया।

गगन की हालत खस्ता हो गई; उसकी आंखों में आंसू आ गए।

करीब दो मिनट मैं उसके बूब्स और होंठो को प्यार से चूसता और सहलाता रहा।

“अंकल, आपने तो सच में ही मेरी चूत फाड़ दी।”
“गगन इसमें मेरी कोई गलती नहीं। तेरी चूत ही इतनी टाईट है। मेरा लंड बड़ी कठिनाई से अंदर गया है।”

“बहुत दर्द हो रहा है।”
“गगन, चुदाई का मजा लेने के लिए थोड़ सा दर्द तो सहन करना ही पड़ेगा। थोड़े समय बाद तुम्हें दर्द में भी चुदाई का मजा आएगा। दर्द में बहुत मजा आएगा।”

मैं उसके बूब्स और निप्पल चूसे जा रहा था।

10 मिनट बाद वो नीचे से चूतड़ उछाल कर हिलने लगी।
मैंने भी धीरे धीरे लंड को अंदर बाहर करना शुरू कर दिया।

वह भी मुझे सपोर्ट करने लगी- उह उई मां मर गई … अंकल आप बहुत अच्छे से चोद रहे हैं। अब दर्द के साथ मजा भी आ रहा है। अंकल अब ज़ोर ज़ोर से झटके मारो। प्लीज मेरी चूत को फाड़ दो। ओह माई गॉड … चुदाई करवाने में ऐसा मजा पहले कभी नहीं मिला। प्लीज बूब्स पर दांतों के निशान बना दो. निप्पल भी चूसो।

गगन मजे में बोलती रही- प्लीज और तेजी से लंड चूत के अंदर बाहर करो। आह … उह … उई … उई … ईई … अंकल तुमने मेरा दिल जीत लिया। आप कितने सेक्सी हो। मूसल जैसा लंड मेरी बच्ची दानी से टकरा रहा है। अब दर्द नहीं हो रहा। प्लीज अपनी पूरी ताकत से मेरी चूत में लंड के झटके मारो। हां ऐसे ही प्लीज। मजा आ रहा है।

वह सेक्स का आनंद ले रही थी और बोल रही थी- ओह आह उई मां मेरी चूत में कुछ हो रहा है। आह आह आह उई मैं गई … ईई … ई… अंकल और स्पीड से लंड चूत में डालो की चूत का चितौड़गढ़ बन जाए।

मैं बूब्स को मसलते हुए झटके मारे जा रहा था।
“अंकल बहुत मजा आ रहा है।”

गगन नीचे से चूतड़ उछाल उछाल कर लंड अपनी चूत में ले रही थी- ओह माई गॉड … सेक्स करते समय इतनी मजा कभी नहीं आया।

इसी दौरान उसने अपनी टांगें मेरी कमर पर कस ली- उई मम्मी, मेरे को क्या होता जा रहा है?

उसने आह… उई… ई… ई… करते मुझे अपनी छाती से चिपका लिया और उसकी चूत ने पानी छोड़ दिया।

वह मेरे होंठों को चूमते हुए बोली- अंकल, आपने आज मुझे स्वर्ग के नज़ारे दिखा दिए।
मैं लगातार झटके मारे जा रहा था।
चूत के पानी छोड़ने से अब लंड आसानी से अंदर बाहर हो रहा था।

गगन फिर से गर्म हो गई।

अब मैंने उसे बैड से नीचे उतर कर घोड़ी बनने को कहा।
जैसे ही वह घोड़ी बनी, मैं उसके दोनों बूब्स को पकड़ कर एक झटके से पूरा लंड चूत में घुसा कर स्पीड से धक्के मारने लगा।

“अब मैं आपके बिना नहीं रह सकती।” मेरी पीठ पर हाथ फेरते हुए बोली- अंकल, आपके लंड ने मुझे और चूत को खुश कर दिया है।
उसने मेरे होंठों को अपने मुंह में भर लिया।

इसी दौरान जबरदस्त तरीके से चुदाई करते हुए लंड ने गगन की चूत को वीर्य से लबालब भर दिया।

मैं गगन के ऊपर लेट गया।

करीब 10 मिनट हम ऐसे ही लेटे रहे।
जब मैं गगन के ऊपर से उठा तो चूत से वीर्य निकलने लगा।
गगन बहुत खुश और संतुष्ट दिखाई दे रही थी; उसने बेड से नीचे उतर कर मुझे कसकर गले लगा लिया- अंकल तुम सच में सेक्स गुरु हो। आपके लंड ने चूत का बुरा हाल कर दिया है। थोड़ा दर्द भी हो रहा है। मेरी चूत को देखो। सूज कर डबलरोटी बन गई है।

वह बाथरूम जाने लगी तो उससे चला न गया।
उसे उठा कर मैं बाथरूम में ले गया।

गीजर के गर्म पानी से उस Xxx पंजाबी गर्ल ने पहले मेरा लंड धोया और बाद में अपनी चूत साफ की।
बाहर आ कर एक दूसरे को बाहों में भर कर हम बेड पर लेट गए।
हम दोनों एक दूसरे को चूम रहे थे।

“अंकल, अगर मैं आज गर्भनिरोधक गोलियां न लूं तो यकीनन मेरे जुड़वां बच्चे होंगे। अंकल मेरा दिल आपका बच्चा पैदा करने के लिए करता है. पर जसवंत के यहां न होने से ऐसा होना संभव नहीं।”

मित्रो, आपको मेरी सच्ची Xxx पंजाबी गर्ल सेक्स कहानी कैसी लगी?
प्लीज मेरी मेल पर और कमेंट करके जरूर बताएं।
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