पड़ोसी लड़के और दरोगा के साथ पार्क में गुलछर्रे (Hot Girl Park Sex Kahani)

हॉट गर्ल पार्क सेक्स कहानी एक कमसिन लेकिन बहुत ज्यादा गर्म लड़की की चुदाई की है. उसने पड़ोसी दूकान वाला लड़का पटाया और रात को उसके साथ पार्क में चुदाई करने गयी.

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नमस्कार दोस्तो, मैं आपकी अंजलि भाभी … जामनगर, गुजरात की रहने वाली हूं।

मेरी उम्र अभी 32 साल की है।

लेकिन मेरी ये कहानी मेरी शादी के पहले की है। आपके सामने पेश है मेरी चौथी कहानी।

आप मेरी पहली तीनों कहानियां पढ़ सकते हैं।
उन्हें पढ़ने के बाद आपको पता चलेगा कि मैं कितनी चुदक्कड़ और ठरकी लड़की हूं।
मुझे नए नए लन्ड लेना पसंद है, साथ ही साथ नए नए तरीके भी!

आप जानते हैं कि ये सब मैं अपनी छीनाल मॉम शिल्पा से सीखी थी।
मेरी मॉम बड़े घरकी एक बहुत ही बड़ी चुदक्कड़ औरत है और उसी के ये सब गुण मुझमें भी आ गए।

मैं जैसे जैसे बड़ी होती गई, और भी ज्यादा ठरकी होती गई।
मैंने कभी किसी से क्लोज़ रिलेशन नहीं बनाया, ना स्कूल में न ही कॉलेज में!
मेरा फंडा फिक्स था, जिस जिस पे दिल आता, बस सीधा उसके आगे अपनी टांगें चौड़ी कर देती।

मैं मेरी अगन ऐसे ही मिटाती।
और इस सब में मेरी मॉम की भी सहमति थी क्योंकि वो भी यही सब करती।

तो ज्यादा देर न करती हुई मैं बढ़ती हूं आज एक और नई और मेरी धमाकेदार चुदाई की हॉट गर्ल पार्क सेक्स कहानी की ओर!

मैं उन दिनों कॉलेज में थी।
हमारे मोहल्ले में एक लड़का था, सम्बित नाम का!
वो मुझसे एक साल छोटा था।

5’6″ हाईट, गोरा चिट्टा, जिम वाली बॉडी, एकदम जवानी उछालता हुआ लौंडा।

मेरी एक सखी थी पूनम!
उसका और सम्बित का लफड़ा था।
उसने बताया था कि सम्बित का लन्ड बहुत तगड़ा है और वो बहुत बढ़िया ठोकता है।

तो अब मेरा भी मन हुआ कि क्यों ना अपनी चूत रानी को सम्बित की सवारी कराई जाए।
एक ही मोहल्ले में रहने की वजह से मेरी उससे पहचान तो थी।

वो भी बहुत आवारा लड़का था।
कई बार मुझे ताड़ते हुए मैंने देखा था।
मैं थी ही ऐसी माल कि हर कोई अपना लन्ड मसल दे।

अब मैंने सम्बित को लाइन देना शुरू किया।
मैं उसको रिझाने में लग गई।

सम्बित के घर पे उनकी एक किराने की दुकान थी।
कॉलेज से वापस लौट के सम्बित दुकान पर बैठता।

अब मैं जानबूझकर एक बार दोपहर में दुकान गई।
तो वो मोबाइल में कुछ देख रहा था।

मेरे जाते ही वो एकदम हड़बड़ा गया और मोबाइल उसने जल्दबाजी में लॉक किए बिना काउंटर पर रख दिया।

मैंने देखा तो उसमें ब्लू फिल्म चल रही थी।
एक अफ्रीकन काला आदमी अपने ये बड़े लन्ड से एक गोरी चिकनी लड़की को चोद रहा था।

मैं मोबाइल में देखने लगी और सम्बित की तरफ देख कर हंसने लगी।
वीडियो अभी चालू ही था।

अब मैंने सोचा कि सही वक्त है सम्बित से नजदीकियां बनाने का।
मैंने बात शुरू करते हुए कहा- ऐसा भी कहीं होता है इतना बड़ा लौड़ा? नकली होगा शायद!

मेरे मुंह से लौड़ा सुनके वो हंस दिया और बोला- अरे नहीं, यह असली है। नीग्रो लोगों के लन्ड नॉर्मली इतने ही बड़े और लंबे होते हैं।

मैं कातिलाना अंदाज में उससे बातें करने लगी।
मैंने कहा- तेरे पास और भी हैं?
सम्बित- क्या? ब्लू फिल्में? अरे मेरे पास तो एक से बढ़िया एक वीडियो हैं … देखना चाहती है तू?
मैं- हां यार मुझे अच्छा लगता है। मगर तू कोई गलत मतलब मत निकाल!
उसने कहा- ये मेरा मेमोरी कार्ड ले जा, देख के मुझे बाद में वापस कर देना.

मैं कार्ड ले गई।
और दूसरे दिन उसे लौटाने दोपहर फिर दुकान गई।

सम्बित अकेला ही दुकान पर था।
मैं गई और उसे बात करने लगी।

सम्बित ने कहा- अंजु अंदर आ जा … देखूं तेरे मोबाइल में क्वालिटी कैसी दिखती है। तेरा मोबाइल बहुत बढ़िया है।
मैं अंदर गई और उससे सट कर बैठ गई।

मैंने मेरा मोबाइल चालू किया।
बढ़िया क्वालिटी में मैंने फिल्म चलाई।

दोपहर के समय हमारे मोहल्ले में एकदम सन्नाटा रहता।
उस सन्नाटे में हम दोनों दुकान में चुदाई की वीडियो देख रहे थे।

मैंने जीन्स और टॉप पहना हुआ था। फिल्म देखते हुए मैं अदाएं दिखाने लगी। मैंने अपना हाथ सम्बित के जांघ पर रख दिया।
उसने भी मेरा मूड समझा।

सम्बित ने मुझे इशारा किया और हम दुकान में ही एक कोने में चले गए।
वहां दुकान के सामान की बोरियां थी। सम्बित ने मुझे बोरियों से सटाकर खड़ा किया, मेरा मोबाइल उसने साइड में रख दिया और मेरे करीब आ गया।

अब उसने टॉप के ऊपर से ही मेरे बूब्स पर हाथ फेरा।
मुझे ये पल बहुत रोमांचित कर रहा था।

अब उसने मेरे बूब्स दबाना शुरू किया।

मैं उसके दोनों हाथ पकड़ कर अपने चूचों पर रख कर दबाने लगी।

अब उसने मेरी गर्दन पकड़ के मुझे अपने और पास खींच लिया, साथ ही मेरे होंठों पे किस करने लगा।
मैं भी पूरे उत्साह से उसका साथ देने लगी।
हमारी जीभ एक दूसरे के मुंह में चलने लगीं।

माहौल एकदम रोमांटिक हो गया था।

अब उसने मेरी टॉप को ऊपर उठाया और मेरी ब्रा के अंदर हाथ डालकर मेरी चूची मसलने लगा।
हमारा चुम्बन अभी तक जारी था।

उसने हालत को समझा, दुकान में कोई भी आ सकता इसलिए सम्बित मुझसे अलग हो गया।

मैंने नाराज होकर कहा- क्यों? क्या हुआ?
सम्बित बोला- यहां नहीं, आज रात फ़िल्म पे साथ आएगी।
मैं ना कह नहीं सकती थी, मैंने हां कह दिया।

बाहर कोई नहीं देखकर मैंने फिर उसे अपने ओर खींचा, मैं उसके हाथ अपनी गांड पर रख कर दबाने लगी।

वो तैयार नहीं था पर मैं उतावली हो रही थी।
मुझे उसका लौड़ा देखना था।

मैं नीचे बैठ गई और उसकी जिप खोलने लगी।
वो ना नुकुर करने लगा मगर मैंने उसकी एक न सुनी।

जिप खोलते ही का अंडरवियर हटाकर उसका लन्ड मैंने बाहर निकाला।
इतना बढ़िया था उसका लन्ड!
काला था मगर झांटें साफ़ की हुई थी।
और ठीक से खड़ा न होने के बावजूद लगभग 4 इंच का होगा।

मेरे तो मुंह में पानी आ गया।
मैंने आव देखा न ताव … झट से उसे मुंह में लेकर उसे चूसने लगी।
सम्बित मंद मंद सिसकारियां भरने लगा।
उसने मेरे बालों को पकड़ कर अपना लन्ड आगे पीछे करना शुरू किया।

अब उसका लन्ड और तन गया।
गर्म गर्म लोहे जैसा सख़्त उसका लन्ड मैंने थूक लगा कर चूसना जारी रखा और उसकी गोटियों से खेलते हुए उन्हें भी जीभ से चाटने लग गई।

अब मैंने एक उंगली उसकी गांड में डाल दी।
इतने सारी जल्दबाजी में वो अपने आप को ज्यादा कंट्रोल नहीं कर पाया और पांच मिनट में ही झड़ने को हुआ।

उसने मुझे इशारा किया मगर मैंने लन्ड को मुंह में से बाहर नहीं निकाला; उसे लॉलीपॉप सी चूसती रही।

कुछ धक्के लगाने के बाद उसने मेरे मुंह में वीर्य की धार छोड़नी शुरू किया जो मैं मजे से निगलने लगी।

एक के बाद एक उसने ढेर सारा पानी मेरे मुंह में छोड़ा।
उसका सारा वीर्य मैंने पी डाला।
फिर उसके लन्ड पर लगा सारा पानी चाट चाट कर साफ़ कर दिया।

उसने जल्द ही ज़िप बंद की और कुर्सी पर बैठ गया।

मैं उठकर उसके पास गई।

तो वह मुझे बोला- साली तू लड़की है या धंधे वाली? कितनी गर्मी हैं तुझमें … तेरी मां रण्डी है, मोहल्ले में सब जानते हैं लेकिन तू तो उससे भी बहुत बड़ी छीनाल है। तेरी गर्मी निकालनी होगी।

मैंने जवाब दिया- तो निकाल ना … किसने मना किया!
सम्बित बोला- रात को चल … दिखाता हूं, मेरे लन्ड की ताकत!
मैंने उसे चिढ़ाते हुए कहा- अरे अभी यहीं दिखा ना … क्यों फट रही है तेरी?

उसने कहा- मेरी मां हाथ जोड़ता हूं, मेरी अम्मी आ सकती है। रात तक रुक फिर आराम से करेंगें। लेकिन एक शर्त है।
मैंने कहा- क्या?
सम्बित- एक बार तेरी मां की लेनी है। दिलवा देगी? बहुत कड़क आंटी है तेरी मां!

मैंने कहा- ठीक है! मगर जब मॉम माने तभी!
उसने कहा- हां, पर मुझे चाहिए।
मैंने बोला- अरे, मॉम ना नहीं कहेंगी। उसे भी जवान लौड़े बहुत पसंद है। पर पहले मुझे तो चोद … बाद मैं उसकी भी ले लेना आराम से!

मैं जल्द से वहां से घर गई।

तब मैं रात के लिए कुछ सेक्सी कपड़े पहनने को देखने लगी।
मैंने लाल रंग का घागरा और ब्लू टॉप पसंद किया।

इतने में मॉम बाहर से आई।
मुझे कपड़ों के ढेर के आगे देख कर बोली- किसके नीचे टांगें चौड़ी करनी हैं मेरी जान?
मैं- मेरा छोड़ो मेरी छीछोरी मॉम, तुम किससे अपनी मरवा कर आ रही हो?

कहते ही मॉम ने मुझे बाहों में भर लिया और मेरे साथ मस्ती करने लगी।
मैंने भी उसके बूब्स मसले और मॉम के मुंह में मुंह डाल के किस किया।

तब मैंने मॉम को बता दिया कि मैं आज रात को फिल्म देखने जा रही हूं।
मॉम ने कहा- देखने या खुद की बनवाने!
हम जोर जोर से हंस पड़ी।

शो शाम छह बजे से रात नौ बजे तक का था।

मैं तैयार हो गई और सम्बित को कॉल किया।
उसने मुझे गली के नाके पर बुलाया।

मैं तैयार होकर साढ़े पांच बजे नाके तक चल के गई।
घागरा और ब्लू टॉप में मैं एकदम पटाखा माल लग रही थी मैं!

जाते वक्त मैंने देखा कि गली के लड़के मुझे ही देख रहे थे।
व भद्दे कमेंट करने लगे।

लेकिन मैं उन्हें नजरंदाज करके नाके पर पहुंची।
सम्बित वहां अपनी गाड़ी लेकर खड़ा था।
मैं जाकर उसके पीछे बैठ गई।

हम सिनेमा हॉल जाने लगे।

रास्ते में मैं सम्बित के लन्ड पर हाथ से सहलाने लगी।
उसने कहा- अरे रुक साली छीनाल थोड़ा सब्र कर!

हम कुछ देर में सिनेमा हॉल पहुंच गए, हॉल में हम अपनी सीट पर बैठ गए।

फिल्म शुरू हुई।
मैं सम्बित से एकदम सटकर बैठ गई; मैं सम्बित के पैंट के ऊपर से ही उसके लन्ड को पकड़ कर सहलाने लगी।

सम्बित भी अब मुझसे चिपक गया और मेरे दूध दबाने लगा।
अब मैंने उसका लन्ड बाहर निकाला और नीचे झुक कर उसे मुंह में लेकर चूसना चालू किया।

फिल्म इंटरवल तक आ पहुंची थी।
अब हम दोनों अपने आप को कंट्रोल नहीं कर सकते थे।

इंटरवल होते ही सम्बित ने जिप बंद करके बाहर चलने को कहा।
हम बाहर आए।

सम्बित ने कहा- चल मेरी रानी, अब दिखाता हूं तुझे मेरे लन्ड का कमाल! बहुत भूख लगी है ना तुझे?
मैंने जवाब दिया- चल ना मेरे राजा, आज बुझा दे मेरी मुनिया की आग। पूनम को तो तबियत से ठोकता है ना? मुझे भी ठोक डाल।

हम गाड़ी लेकर वहां से निकले।
अब हम छुदाई के लिए जगह ढूंढ रहे थे।

सिनेमा हॉल के पास ही में एक पार्क था जहां रात को कोई आता जाता नहीं।
मैंने सम्बित को वहां चलने को कहा।

हम पार्क के पीछे वाले रास्ते से जाने लगे।
उस साइड का गेट टूटा हुआ था।

सम्बित ने गाड़ी साइड में पार्क की और हम अंदर गए।
अंदर जाते ही एक बड़ा सा पेड़ था; उसके पीछे हम पहुंचे।

साइड में जाकर मैं मूतने के लिए बैठ गई।
सम्बित मुझे देख रहा था।

मैंने घागरा ऊपर किया और चड्डी नीचे सरका कर मूतने लगी।

मुझे मूतते देखकर सम्बित मेरे पास आया।
मैं उठ गई।

अब सम्बित ने मुझे पकड़ा और मेरा घागरा उतार दिया।
मैं अब टॉप और चड्डी में थी।

हम अब पेड़ के कोने में आ गए।
मैंने देर ना करते हुए उसकी बेल्ट खोलकर पैंट उतार दी और अंडरवीयर खींचकर निकाला।

उसका फनफनाता हुआ लन्ड मेरे सामने था।

मैंने झट से उसे मुंह में लिया और अपनी लार लगाकर उसे गीला कर दिया।

हम दोनों वासना की अगन में झुलस रहे थे। मैं उठ गई और सीधा जाकर पेड़ को पकड़ के झुक कर घोड़ी बन गई।

सम्बित पीछे से आ गया।
मेरी गांड पर चमाट मार के उसने मेरी चड्डी निकाल दी।

उसने कंडोम अपने लन्ड पर लगा दिया और मेरी चूत के मुंह पर रख कर अपना लन्ड अन्दर घुसा दिया।
मैं दर्द से कराह उठी।

अब उसने मेरी कमर को कस कर पकड़ लिया और मुझे जोर जोर से चोदने लगा; मेरे टॉप में हाथ डाल के मेरे चूचे दबाने लगा।

मुझे पार्क सेक्स में बहुत मज़ा आ रहा था।
पहली बार मैं ऐसे खुले में चुदवा रही थीं।

बेहद उत्तेजक नजारा था।
गर्मी के दिनों में रात को एक पेड़ के नीचे मैं मस्ती से अपनी चूत की आग शांत कर रही थी।

सम्बित बहुत ताकद से मुझे ठोक रहा था- ले साली हराम की औलाद … ये ले … बहुत गर्मी हैं ना तुम मां बेटी में? सारा मोहल्ला जानता है, कितनी बड़ी रंडियां हो तुम दोनों!
मैंने कहा- हां हैं हम रंडियां। मगर हम पैसों के लिए नहीं ये सब करती। हमारी आग कोई एक लन्ड बुझा ही नहीं सकता। हमें नए नए लन्ड लेना पसंद है।

“हां हां पता है। बता कैसा लग रहा है। मज़ा आ रहा है ना?” उसने कहा।
मैंने जवाब दिया- हां, बहुत शानदार चोदता है तू मेरे राजा … और जोर से … और अंदर जाकर ठोक साले!

“मेरा प्रोमिस याद रख साली कुत्ती … मां चोदनी है मुझे तेरी!” सम्बित बोला।
मैंने कहा- अरे हां बाबा, जल्द ही मेरी मॉम तेरे नीचे होगी, बस!

बहुत देर से सम्बित मेरी बजा रहा था।
हम भूल गए कि हम एक पार्क में पेड़ के नीचे ये कामक्रीड़ा कर रहे हैं।

हम अपनी कामलीला में मशगूल थे और जो नहीं होना चाहिए था, वो हो गया।

एक दरोगा हमारे सामने आ टपका।
दरोगा को देखते ही सम्बित और मैं अलग हो गए।

सम्बित की तो जैसे फट गई थीं।
हम दोनों अधनंगे थे।

इतने में दरोगा बोला- सालो, हरामजादो इतनी रात को ये गुल खिला रहे हो यहां पे?
हम डर गए।
लेकिन भाग भी नहीं सके।
ऐसी हालत में कहां भागते!

वो हमें गालियां देने लगा और थाने ले जाने की धमकी भी दे रहा था।
हम दोनों हक्के बक्के रह गए थे।

सम्बित तो सिर्फ बातों का शेर निकला।
दरोगा के आगे वो मूतने की हालत में आ गया।

लेकीन अब मेरी दिमाग की बत्ती जली।
मैंने गौर से देखा तो वो दरोगा पियक्कड़ था, उसने बहुत सारी शराब पी रखी थी।

मैं नीचे से बिल्कुल नंगी हुई पड़ी थी।
वो बार बार मेरी नंगी जांघों को ताड़ने लगा।

फिर मुझे एक रास्ता सूझा।
वैसे थी मैं एक रण्डी की बच्ची!

मैंने सोचा अब बचना है तो इसे भी अपनी चूत का लालच देना पड़ेगा।
मैं जानती थी वो नशेड़ी दरोगा इतनी हॉट और कच्ची कली का ऑफर ना नहीं करेगा।

मैंने बिना डरे उसके पास गई और एकदम मादक अंदाज में कहा- अरे दरोगा जी, इतना क्यों भड़क रहे हो? जवान लड़का लड़की इतनी रात को मिले हैं तो कर ली थोड़ी शरारत!
दरोगा ने कहा- तो सड़क पर चुदाई करोगे? ऐसा नहीं चलेगा। मेरे साथ थाने आना पड़ेगा।
मैंने जवाब दिया- अरे साहिब, क्यों इतना भाव खा रहे हो? आप भी करो ना शरारत … मैं थोड़ी मना करूंगी। आइए चख लो इस फल को!

दरोगा- आय हाय … सामने से न्योता … धंधेवाली है क्या?
मैंने कहा- नहीं साहब, मजे के लिए करती हूं। आपको भी मजा दूंगी।

सम्बित दूर से सब देख रहा था।
वह चुपचाप अपनी पैंट पहनने लगा।

अब दरोगा मेरे पास आया, मेरे दूध जोर से दबाता हुआ मेरी गांड पर हाथ मारने लगा।
उसने मुझे जोरदार किस किया।

उसके मुंह से दारु की दुर्गंध आ रही थी जो मुझे रोमांचित करने लगी।

जल्द ही उसने अपनी बेल्ट खोलकर पैंट नीचे सरका दिया और अंडरवियर नीचे करके अपना लन्ड बाहर निकाला।
उसका गन्दा और काला लन्ड बाहर लटक रहा था।
उसने झांटे भी साफ नहीं की थी।
बहुत बड़ा भी था।

मुझे क्या, सम्बित से मैं संतुष्ट नहीं हुई थीं।
हमारा खेल आधा हो रह गया था।

मैंने बिना देर किए नीचे बैठ कर दरोगा के लन्ड को हाथ में लेकर सहलाया और सीधा मुंह में लेकर उसे चूसने लगी।

जल्द ही दरोगा का लन्ड खड़ा होकर पूरा तन गया।
मैं खड़ी हुई और झुककर घोड़ी बन गई।

दरोगा ने लन्ड मेरी गांड के छेद पर टिका दिया।
मैं उसे जोर से बोली- अरे वहां नहीं, मेरा पानी नहीं निकला अभी! मेरी चूत में डालो।

वो बोला- कंडोम नहीं है।
“सम्बित कंडोम दे!” मैंने सम्बित को चिल्लाते हुए कहा।

सम्बित हक्का बक्का सा रह गया था।
उसने एक कंडोम दरोगा को दे दिया।

उसे दरोगा ने लन्ड पर चढ़ाया और पीछे से मेरे ऊपर चढ़ गया।

दरोगा अपने मोटे लन्ड से मेरी चूत में बहुत गहरे में जाकर चोदने लगा।
थोड़ी देर में ही मेरी चूत का पानी निकल गया।
मेरा बदन अकड़ गया।
मैं एकदम ठंडी पड़ी।

लेकिन उस हरामी दरोगा की कुटाई अभी भी जारी थी।

दस मिनट लगातार ठोकने के बाद उसने लन्ड को बाहर निकाला और मुझे गाली देते बोला- साली छीनाल, चल मुंह में ले इसे!
मैं घूम कर बैठ गई और लन्ड को मुंह से चाटने लगी।

अब उसने लन्ड को मेरे मुंह में डाल दिया, जोर जोर से लन्ड अन्दर बाहर करने लगा।
उसका लन्ड मेरे हलक तक जाने लगा।

मेरी आंखों में से आंसू निकले।
बहुत ही जल्द उसने अपने लन्ड का पानी मेरे गले में छोड़ना शुरू किया।
मैंने सारा पानी गटक लिया।

अब वो ढीला हो गया।
उसने अपने कपड़े पहने और जाने लगा।

सम्बित मेरे पास आया और कहने लगा- मान गया यार, तू बहुत बड़ी रण्डी है। आज तेरी चूत की वजह से बच गए वरना जेल जाना पड़ता।
मैंने कहा- अरे सम्बित भाई, चूत के आगे किसी की नहीं चलती, चाहे वो कोई भी हो।

अब उसने कहा- वो सब तो ठीक है, मेरा अभी हुआ नहीं। इसका कुछ इलाज कर!

मैं झट से नीचे बैठ गई उसके लन्ड पर चढ़ाया कंडोम निकाल दिया और उसे मुंह में भर लिया।
जल्दबाजी में सम्बित जल्द ही छुट गया।
मैंने उसका भी सारा वीर्य गटक लिया।

अब हम दोनों ने कपड़े पहने और वहां से निकले।

रास्ते में सम्बित ने मुझसे कहा- अंजु, मेरा मन नहीं भरा यार!
मैंने जवाब दिया- तो क्या हुआ मेरे राजा … हम आराम से करेंगे कभी भी। और मेरी मॉम को भी तेरे नीचे लिटा दूंगी, तू फिकर मत कर!

बातें करते करते हम घर पहुंचे।
मैंने सम्बित को बाय किया और अपने घर में गई।

तो मेरे प्रिय पाठको, ये थी मेरी उछलती जवानी की एक और कहानी।
आपको हॉट गर्ल पार्क सेक्स कहानी कैसी लगी मुझे जरूर बताएं।

मेरी सेक्स एक्सप्रेस का सफर अभी और आगे बढ़ेगा … एक से बढ़कर एक कहानियां मैं आपसे शेयर करूंगी।
तब तक विदा।
[email protected]

मेरी पिछली कहानी थी: बहन के ससुराल में रंगरलियां

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