बुआ की कमसिन जवान बेटी की बुर खोली

वर्जिन सिस्टर फर्स्ट सेक्स कहानी में पढ़ें कि मैं बुआ की बेटी के कमरे में गया, उसका कंप्यूटर चलाया तो उसमें ब्लू फिल्म चल रही थी. वो एकदम बंद करने लगी.

डियर फ्रेंड्स, मैं आपका दोस्त सैम एक बार फिर से हाजिर हूँ.
मैं आपके सामने अपनी बुआ की चुदाई की कहानी
बुआ के घर में बुआ की चूत चुदाई
का अगला भाग लेकर पेश हुआ हूँ.

मैंने पिछले भाग में बताया था कि मैं और बुआ हॉल में बैठे थे.

अब आगे वर्जिन सिस्टर फर्स्ट सेक्स कहानी:

दरवाजे की घंटी बजी तो बुआ ने दरवाजा खोला.
सामने काका और तृषा थे.

तृषा सीबीएससी की स्टूडेंट थे. वो 12वीं कक्षा में थी और वो स्कूल की यूनिफॉर्म में थी.

उसने एक स्कर्ट ओर टॉप पहना हुआ था.
उसके टॉप के दो बटन खुले हुए थे और स्कर्ट घुटनों से तीन इंच ऊपर थी.

तृषा- मॉम ये कौन हैं?
बुआ- ये तुम्हारे मुंबई वाले मामा का लड़का सैम है.

मैं- हाय तृषा … हाउ आर यू? हम काफ़ी सालों के बाद मिल रहे हैं.
तृषा- फाइन … मैं आपके बारे में नहीं जानती थी. मगर मॉम ने बताया तो अच्छा लगा.
मैं- हां तृषा, मैं यहां पूनम दीदी को उसके घर छोड़ने आया था. उसके ससुर अस्पताल में भर्ती हैं.

तृषा- ओह सॉरी … क्या तुम यहां रुकने वाले हो?
बुआ- हां बेटा. ये हमारे साथ दो तीन रहेंगे.

मैं- नहीं बुआ … मुझे तो वापस जाना है मुझे सोमवार को ऑफिस ज्वाइन करना है.
बुआ- नहीं, मैं तुम्हारे मम्मी पापा को बोल देती हूँ कि तुम यहां कम से कम तीन दिन तो रुकोगे ही!

तृषा- गुड … मॉम आज शनिवार है और आज मेरी फ्रेंड नीतू का बर्थडे है. दीदी मेरे साथ नहीं आएंगी इसलिए मुझे अकेले ही पार्टी में जाना पड़ रहा था. पर अब मेरे साथ सैम जाएगा.
मैं- लेकिन तृषा मैं तुम्हारे बारे में अभी कुछ नहीं जानता हूँ यार!

तृषा ने हंसते हुए कहा- तुम मुझे जानते हो कि मैं कौन हूँ, ये काफी है … और अब ये तय है कि तुम मेरे साथ मेरी सहेली की बर्थडे पार्टी में चल रहे हो.
हम दोनों में इस बात को लेकर बहस होने लगी.

तभी बुआ ने कहा- अच्छा अब ये सब बाद में बहस कर लेना, पहले लंच कर लो चलो, सब लोग डाइनिंग टेबल पर आ जाओ. खाना खा लेते हैं.

मैं- वाउ बुआ … मैं तो भूल ही गया था. वैसे भी खाने की इतनी अच्छी महक आ रही है कि मेरी भूख दोगुनी हो गई है.

तृषा- मॉम, मुझे पहले कपड़े बदल कर आने दो, फिर लंच परोसना.
मैं- हां, हम दोनों तुम्हारे आने का इंतजार करेंगे.

बुआ- ओके बेटा जल्दी से वापस आओ.

तृषा अपने रूम में चली गयी और चेंज करके वापस आ गई.
जब तृषा डाइनिंग टेबल पर आई, तो मैं उसे देखता ही रह गया.

डाइनिंग टेबल पर तृषा मेरे सामने बैठी थी और उसकी टी-शर्ट का गला काफ़ी बड़ा था, जिसमें से उसकी चूचियों का साफ़ साफ़ नजारा देखने को मिल रहा था.
उसके मम्मों का साइज़ 32 इंच था. उसके मम्मों के दीदार होने से मेरा लंड खड़ा हो गया था.

बुआ मेरे बाजू में बैठी हुई थीं.
वो ये सब देख रही थीं.

बुआ ने धीरे से अपने हाथ से मेरे लंड को टच किया और मेरी तरफ देखा.

मैंने अपनी प्लेट की ओर देखा और खाने पर ध्यान केंद्रित करने लगा.
लंच करने के बाद हम तीनों ऊपर के फ्लोर पर चले गए और काका डाइनिंग टेबल साफ़ करने में लग गए थे.

तृषा- सैम तुम किस कमरे में रुकोगे?
बुआ- वो फर्स्ट फ्लोर वाले गेस्ट रूम में रुकेगा.

तृषा- ओके सैम. फिलहाल तुम मेरे साथ आओ. मैं तुम्हें अपनी कुछ तस्वीरें दिखाती हूँ.
मैं- ओके.

हम दोनों तृषा के रूम में आ गए.
हम जब तृषा के रूम की तरफ जा रहे थे तो बुआ ने मुझे आंख मारी और एक फ्लाइंग किस के साथ दबी आवाज में एंजाय भी कहा.

हम दोनों तृषा के रूम में गए तो मैंने देखा कि वहां एक टीवी और एक कंप्यूटर था.
मैं- ये तुम दोनों सिस्टर्स का है?
तृषा- नहीं, ये सिर्फ़ मेरा है.

तृषा ने कंप्यूटर ऑन किया और जैसे ही उसने पासवर्ड डाला और स्क्रीन ऑन हुआ.
उस पर एक Xxx मूवी चलने लगी. सामने एक लड़की ब्लोजॉब कर रही थी.

ये देख कर तृषा ने एकदम से कंप्यूटर बंद करना चाहा तो मैंने उससे कहा- रहने दो, बहुत दिनों बाद कुछ अच्छा देखने मिल रहा है.
तृषा- तुम्हारा भी तो पर्सनल रूम है. फिर बहुत दिनों में कैसे?
मैं- अरे यार पिछले 20 दिनों से दीदी आई हुई थीं तो हम दोनों एक ही कमरे में थे.

वो हंस दी और हम दोनों ब्लू-फिल्म देखने लगे.
कुछ समय हम दोनों वो मूवी बड़े ध्यान से देखने के कारण गर्म होने लगे थे.

अचानक से मेरा एक हाथ तृषा के कंधे पर आ गया था और मैंने उसकी टी-शर्ट के एक बाजू को कंधे से नीचे की ओर सरका दिया.

अब तृषा का एक बूब टी-शर्ट से बाहर था.
मैंने देखा तो तृषा ने अन्दर ब्रा नहीं पहनी थी.

अपनी दो उंगलियों की मदद से मैंने उसके निप्पल को टच किया. ये लाइट पिंक कलर का निप्पल था.
मैं उसे मसलने लगा.

तृषा भी धीरे धीरे गर्म हो रही थी. तृषा अपने एक हाथ से मेरे लंड को पैंट के ऊपर से सहला रही थी.

मैंने उस समय अंकल की ट्रैक पैंट पहनी हुई थी.
कुछ मिनट बाद मैंने तृषा के चेहरे को अपनी ओर किया और अपने होंठों को तृषा के होंठों पर रख कर उसके होंठों को चूसने लगा.

तृषा भी मुझे फुल सपोर्ट कर रही थी.
मैंने तृषा की टी-शर्ट को उसके कंधे से सरका कर उसके पेट तक कर दिया.

अब मैं अपने दोनों हाथों से तृषा के दोनों बूब्स को मसल रहा था.
तृषा को भी काफ़ी मज़ा आ रहा था.

कुछ समय तृषा के होंठों चूसने के बाद मैंने उसके मम्मों को चूसना शुरू कर दिया.
तृषा भी बहुत एंजाय कर रही थी और हल्के स्वर में सीत्कार कर रही थी.

कुछ समय बाद तृषा ने मेरी पैंट को मेरी कमर से नीचे कर दिया और मेरे लंड को अपने हाथ में लेकर मसलने लगी.
तृषा- सैम, तुम्हारा लंड तो बहुत मस्त है!

मैं- तुमको अच्छा लगा तो सोच क्या रही हो, शुरू हो जाओ.
तृषा- और तुम किस का वेट कर रहे हो?

हम दोनों खड़े हुए और एक दूसरे के सब कपड़े उतार दिए.

तृषा का फिगर एकदम अपनी मॉम के जैसा था. मैं और तृषा जल्द ही 69 की पोजीशन में आ गए.
मैंने जब उसकी चूत को खोला, तो आश्चर्य में पड़ गया. उसकी चूत एकदम छोटी … और अन्दर से रानी पिंक कलर की थी.

उसके क्लाइटॉरिस लाइट पिंक कलर का था. ऐसा लग रहा था कि किसी ने इसे छुआ तक नहीं है.
जैसे ही मैंने अपनी जीभ उसकी चूत में डाली, तृषा ने मेरा लंड मुँह से निकाला और जोर से ‘आह आह …’ करने लगी.

हम दोनों एक दूसरे के गुप्त अंगों को खूब अच्छी से चाट रहे थे.

कुछ मिनट बाद तृषा बोली- मैं झड़ने वाली हूँ.
मैं- मेरे मुँह में ही झड़ जाओ.

तृषा- तुम मेरी चूत का पानी पियोगे?
मैं- हां, ट्राइ करता हूँ.

तृषा- ये तुम्हारा फर्स्ट टाइम है?
मैं- हां.

तृषा- लगता तो नहीं है. जिस तरह से तुमने मुझे पांच मिनट में तृप्त कर दिया है, उससे तो लगता है कि तुम्हें बहुत प्रेक्टिस है?
मैं- अपनी गर्लफ्रेंड्स के साथ ये सब किया है.

तृषा- तुम्हारा लंड बहुत दमदार है.
मैं- तुमको पसंद आया?
तृषा- ऐसा दमदार और बड़ा लंड किसको अच्छा नहीं लगेगा?
मैं- कभी लिया है किसी का लंड?

तृषा- हां, मेरी क्लास में एक लड़का था पर उसकी तो लुल्ली थी, लंड था ही नहीं. उसने अपनी लुल्ली मेरी चूत में डालने की कोशिश की थी, पर उसके पहले ही उसका पानी निकल गया.

मैं- इसका मतलब आज तक किसी ने भी तुम्हें चोदा नहीं है?
तृषा- हां. मगर मैं कभी कभी गाजर और खीरा से काम चला लेती हूँ.
मैं- ओके.

मैंने उसकी चूत चाटना शुरू किया और वो मेरे लंड को चूसने लगी.
हम दोनों अपने काम में इतने व्यस्त थे कि हमें समय का पता ही नहीं चला.

कुछ समय पश्चात मेरी नज़र बेडरूम के दरवाजे पर पड़ी तो मुझे ऐसा लगा कि कोई हमें देख रहा था.

मैं- तृषा दरवाजा खुला है. कहीं बुआ आ गईं तो?
तृषा- डरने की बात नहीं है, मॉम ने अभी कुछ नहीं देखा.

फिर तृषा ने जल्दी से उठ कर दरवाजा बंद कर दिया.
अब मैंने तृषा को उसके बेड पर लिटा दिया और उसकी टांगों के बीच में बैठ गया.

मैंने तृषा की चूत को फिर से चाटना शुरू किया.
तृषा- सैम प्लीज़, अपना लंड मेरी चूत में डाल दो … अब ओर मत तड़पाओ.

मैं- तृषा तुम्हारी चूत बहुत सुंदर है. मेरा मन करता है कि इसे खा जाऊं.
तृषा- प्लीज़ मेरी चूत के अन्दर आग लगी हुई है. उसे अपने लंड के पानी से शांत कर दो.

तृषा के मुँह से ये सब सुन कर मेरे अन्दर की वासना एकदम भड़क गयी.
मैंने अपने लंड पर ढेर सारा थूक लगाया और लंड के सुपारे को तृषा की चूत के मुँह पर रख कर एक ज़ोरदार झटका दे मारा.

तृषा- उई मां मर गयी, बहुत दर्द हो रहा है. प्लीज़ इसे बाहर निकालो. मेरी चूत फट गयी है.
मैं- अभी तो बोल रही थी कि चूत में बहुत आग लगी है, इसे शांत करो और अभी बोलती हो कि बाहर निकालो. पहले तय करो कि करना क्या है?

वो कसमसाती रही.
कुछ समय तक हम दोनों यूं ही पड़े रहे.

फिर मैंने अपने लंड को आगे पीछे करना शुरू किया और अब तृषा भी उसका आनन्द लेने लगी थी.

धीरे धीरे मैंने अपनी स्पीड बढ़ा दी.
कोई दस मिनट बाद मेरा लंड एकदम कड़क हो गया और वो तृषा की चूत को पूरी तरह से घिसने लगा.

मेरी वर्जिन सिस्टर तृषा फर्स्ट सेक्स का पूरा आनन्द ले रही थी- और ज़ोर से चोदो मेरे राजा, आज पहली बार इस चूत को कोई लंड मिला है. वरना तू हमेशा लुल्ली ही मिलती रही है.
मैं- मेरी जान तुम सिर्फ़ मुझे आवाज़ देना, ये लंड पूरी ज़िंदगी तुम्हारी चूत की चुदाई करता रहेगा.

हम दोनों ज़ोर ज़ोर से बातें करने लगे.
फिर मेरे लंड ने तृषा की चूत में पिचकारी छोड़ दी.

मैं और तृषा दोनों पसीने में नहा रहे थे और नंगे ही उसके बेड पर लेट गए.

कुछ समय बाद मेरी आंख खुली तो देखा तृषा बेड पर नहीं थी.
मैंने बाथरूम में जाकर देखा तो तृषा बाथटब में बैठी थी.

मैं वापस जाने लगा तो उसने मुझे आवाज़ दी- सैम अन्दर आओ … एंजाय करो बढ़िया गर्म पानी है टब में … और मैं भी गर्म हूँ.
मैंने तृषा को आगे होने को कहा और मैं उसके पीछे बैठ गया.

टब में पानी काफ़ी गर्म था पर मेरी पूरी बॉडी दर्द कर रही थी तो मुझे मज़ा आ रहा था.
तृषा ने भी अपना सर मेरे सीने पर टिका दिया था और मैं अपने दोनों हाथों से तृषा के मम्मों को मसाज दे रहा था.

हम दोनों की कब आंख लग गयी, पता ही नहीं चला.
जब हमारी आंख खुली तो शाम के 5.30 बज चुके थे.

मैं जल्दी से उठा और तृषा को भी उठाया.
उसे गोद में ले जाकर उसके बेड पर सुला दिया और उसके ऊपर कम्बल डाल दिया.
तृषा फिर से सो गई.

मैंने जल्दी से तौलिया लपेटा और अपने रूम में चला आया.
जल्दी जल्दी में मैं अंकल की ट्रैक पैंट और टी-शर्ट तृषा के रूम में छोड़ आया.

रूम में आने के बाद मैं भी जल्दी से बेड में सोने की एक्टिंग करने लगा.
कुछ समय बाद बुआ मेरे रूम में आ गईं.

बुआ- सो रहे हो?
मैं- हां, काफ़ी थकान से लग रही है.
बुआ- हां थकान तो लगेगी ही. इतना काम जो करोगे.

इतना बोल कर बुआ हंसने लगीं और धीरे से अपना हाथ कम्बल में डाल कर मेरे लंड को पकड़ लिया.
बुआ समझ गईं कि मैंने कुछ भी नहीं पहना है.
बुआ तुरंत तृषा के रूम में गईं और मेरे कपड़े वहां से उठा लाईं.

मैं- बुआ सॉरी!
बुआ- किस बात के लिए?
मैं- मैंने तृषा के साथ जो किया, उसके लिए!

बुआ- तृषा बहुत दिनों से किसी मर्द की तलाश में थी और उसे आज तेरे रूप में मर्द मिल गया. मुझे पता है उसके तीन या चार ब्वॉयफ्रेंड रह चुके हैं, लेकिन वो सब अनाड़ी थे. मैंने तुम दोनों को 69 की पोजीशन में देखा था. तब मुझे पता लग गया था कि आज तू उसकी वर्जिनिटी लेकर रहेगा. तुझे पता है, निशा का ब्वॉयफ्रेंड भी उससे तृप्त नहीं कर पाता है और अक्सर हम तीनों मिलकर लेस्बियन सेक्स भी करती हैं. अब जल्दी से उठ और नीचे हॉल में आ जा. साथ बैठ कर नाश्ता करते हैं.

मैं- बुआ मुझे 15 मिनट दो, मैं उसे लेकर आता हूँ.

तब मैं तुरंत बाथ लेकर चेंज करके नीचे मेन हॉल में पहुंच गया, जहां बुआ और उनकी दो सहेलियां बैठ कर चाय नाश्ता कर रही थीं.
बुआ- आओ सैम. ये हैं मेरी ख़ास सहेलियां हैं. ये टीना, नीतू की मम्मी हैं … और ये शूमा, नेहा की मदर हैं. इन दोनों की बेटियां तृषा की ख़ास फ्रेंड हैं. आज रात टीना की बेटी की ही बर्थडे पार्टी है.

मैंने दोनों महिलाओं से हाथ मिलाया और उनके बीच बैठ गया.
टीना ने जब मुझसे हाथ मिलाया, तो उन्होंने मेरा हाथ जोर से दबाया था और आंख भी मारी थी.

टीना ने मुझे रात में पार्टी में आने का इन्विटेशन दिया.
बुआ- सैम वैसे भी तृषा के साथ आने वाला है.
मैं- हां, मैं पक्का आ रहा हूँ.

टीना- मुम्बई की पार्टियां तो बहुत मस्त होती हैं. पर हमारी पार्टी तो थोड़ी सीधी-सादी होगी. उम्मीद है कि तुम पार्टी एंजाय करोगे?
मैं- पार्टी कैसी भी हो, लोग अच्छे होने चाहिए. हम तो दिल से दिल मिलाने की कोशिश करते हैं.

कुछ समय बाद तृषा ने भी हमें ज्वाइन किया.
हम सब काफ़ी देर तक बातें कर रहे थे कि तृषा ने मुझे आंख मारी और बुआ से कहा- मैं मार्केट से सैम के लिए टी-शर्ट खरीद कर आती हूँ.

बुआ- सैम, तेरे पास लाइसेन्स है ना, तो तू अपने अंकल की बाइक ले जा. उधर बाजार में कार चलाते नहीं बनेगा.

तृषा- हां चलो, जल्दी चलो. लेट हो जाएंगे तो दुकानें बंद हो जाएंगी. ये मुम्बई नहीं है कि देर रात तक दुकाने खुली रहें.
मैं- ओके बाबा, बाइक की चाभी कहां है?

काका ने मुझे बाइक की चाभी दी और तृषा मेरे पीछे बैठ गयी.

तृषा के बूब्स मेरी पीठ से सटे हुए थे. उसके बूब्स का स्पर्श पाकर मेरा लंड धीरे धीरे खड़ा हो रहा था.

तृषा ने एक हाथ मेरे लंड पर रख दिया और उसे सहलाने लगी.
मुझसे बाइक कंट्रोल नहीं हो रही थी.

मैं- तृषा, पहले टी-शर्ट ले लें, फिर कपड़े उतार देंगे.
तृषा- चिंता मत करो मेरी जान. आज की पार्टी के बाद हम मिल कर सब कुछ उतारेंगे.

हम दोनों मार्केट पहुंच गए. हम दोनों एक दुकान में गए.
वो दुकान का मालिक तृषा को बहुत अच्छी से जानता था.

मालिक- क्या दिखाऊं मेम?
तृषा- अंकल मेरे लिए नहीं, मेरे भाई के लिए चाहिए.

तृषा के मुँह से भाई सुन कर मैं थोड़ा सा हिल गया.

फिर उस दुकान ओनर ने मेरे लिए ढेर सारी टी-शर्ट्स और जीन्स पैंट निकाल कर रख दिए.
हम दोनों ने दो टी-शर्ट और दो जींस पैंट पसंद किए और मैं ट्रायल रूम में जा कर चैक करने लगा.

तभी तृषा ने आवाज दी- मुझे भी दिखाना चेंज करने से पहले.

मैं तुरंत बाहर आया और उसे बारी बारी कपड़े चेंज करके बता दिए.
जब मैं बाहर आया तो उस दुकान वाले ने टोटल 900.00 रुपए मांगे.

मैं- दिमाग खराब हो गया है क्या? हम सिर्फ़ 550.00 रूपए देंगे

मालिक- नहीं, ये तो बहुत कम हैं.
मैं- चल तृषा, हम दूसरी दुकान में चलते हैं.

इतना बोलकर मैंने तृषा का हाथ पकड़ा और दुकान से बाहर जाने लगा.
दुकान के मालिक ने कहा- प्लीज़ 650 रूपए दे दो.

मैं- मैं 550 लास्ट दूँगा.
मालिक- ठीक है 600 दे दो!

तृषा- ओके डन.
उसने 600 रूपए दे दिए. हम बाइक पर बैठे और घर की तरफ चल पड़े.

मुझे घर का रास्ता पता नहीं था जो रास्ता तृषा बताती में उसी ओर चल पड़ता.
जब हम दुकान से निकले तो सूर्यास्त हो चुका था और शाम के 6.30 बज चुके थे.

हम जल्द से घर पहुंच गए.
जब हम घर पहुंचे तो निशा और बुआ दोनों हॉल की लॉबी में बैठ कर कॉफी पी रही थीं.

जैसे ही मैं ओर तृषा बुआ के पास गए, बुआ ने निशा से कहा- ये है समर्थ (सैम) तुम्हारे मामा का बेटा, जो मुंबई से आया है.
निशा- हाय.
मैं- हाय.

तृषा ने बुआ को दोनों टी-शर्ट और जींस बताए लेकिन उसने वो अंडरवियर नहीं बताई जो उसने आते समय रास्ते में मेरे लिए खरीदी थी.

मैं हमेशा से हाफ पैंट जैसी अंडरवियर पहनता हूँ पर तृषा को कट वाली अंडरवियर पसंद थी तो उसने मेरे लिए छह अलग अलग कलर की अंडरवियर खरीद ली थीं.

निशा- ये कपड़े किस लिए?
तृषा- आज रात नीतू की पार्टी में सैम मेरे साथ जा रहा है, इस लिए!

निशा- ओह, तो इसलिए तुम इतनी खुश हो?
तृषा- हां.

निशा- पर इस पार्टी में तो मैं तुम्हारे साथ जाने वाली थी और पिछले दो हफ्ते से तृषा तू मेरा हर काम कर रही थी!
बुआ- निशा, मत परेशान कर इसे!

ये बोल कर बुआ ने कहा- चलो तुम लोग भी कॉफी पी लो और फिर अपने अपने रूम में थोड़ा आराम कर लो. रात में तुम लोगों को जागना है.
निशा और तृषा दोनों दूसरी फ्लोर पर अपने रूम में चले गए और मैं अपने रूम में आकर बेड पर लेट गया.

कुछ समय बाद बुआ मेरे रूम में आईं.
बुआ ने उस समय एक बहुत ही सेक्सी नाइटी पहनी हुई थी जिसमें से बुआ का पूरा शरीर साफ़ दिख रहा था.

वे मेरे सिर के बालों में हाथ घुमाने लगीं.
मैंने अपना सिर बुआ की जांघों पर रख दिया और उनके सिर को नीचे झुका कर उनके होंठों को चूमने लगा.

बुआ भी मुझे सहयोग कर रही थीं.

फिर हम दोनों ने किसी के पैरों की आहट सुनी तो बुआ एकदम से उठ कर सामने पड़ी चेयर पर बैठ गईं और मुझसे बातें करने लगीं.
कुछ समय बाद काका ने मेरे रूम का दरवाजा खोला और कहा- बेटा, तुम्हारी दीदी का फोन है.
मैं- ओह, मैं तो दीदी को फोन करना ही भूल गया.

‘हैलो दीदी!’ मैं बात करते हुए बाहर आ गया.
दीदी- क्या बात है भाई, तू तो मुझे भूल ही गया. इधर बाकी सब लोग भी तेरे बारे में पूछ रहे हैं.

मैं- दीदी बुआ ने मुझे यहां रोक लिया है. आज रात उनके घर एक पार्टी है और उन्होंने मुझे रुकने को कहा है.
दीदी- वो तो मुझे पता है क्योंकि शाम में जब तू शॉपिंग को गया था तो बुआ ने फोन करके तेरा टिकट अगले रविवार का करवा दिया था.

मैं- मुझे तो इस बारे में कुछ पता नहीं है!
दीदी- बुआ ने मां को फोन भी किया था और कहा था कि तेरे ऑफिस में बता दें कि तू अगले सोमवार को ऑफिस ज्वाइन करेगा … और सुना एंजाय कर रहा है न वहां!

मैं- सच में दीदी, यहां बहुत मज़ा आ रहा है. जब हम मिलेंगे तो बात करेंगे.
कुछ देर यूं ही बात करने के बाद मैंने फोन रख दिया और रूम में आ गया.

मैंने देखा तो बुआ मेरा इन्य्जार कर रही थीं. मैं जैसे ही कमरे में दाखिल हुआ, बुआ ने मुझे मेरा नया रिज़र्वेशन टिकट थमा दिया, फिर बेडरूम का दरवाजा अन्दर से बंद कर दिया.

जब बुआ बेडरूम का डोर लॉक करके मेरी ओर घूमीं तो मैंने बुआ के नाइटी की पट्टी को खोल दिया और बुआ की नाइटी अगले ही पल उनके पैरों में थी.
बुआ ने अन्दर लाइट पिंक कलर की ब्रा और पैंटी पहनी हुई थी.

मैंने बुआ को खींच कर बेड पर लिटा दिया और उनको ऊपर से नीचे तक चूमने लगा.

अचानक निशा ने मेरे कमरे का दरवाजा नॉक किया- सैम, मॉम तुम्हारे रूम में हैं क्या?
मैं- नहीं, वो तो अपने रूम में थीं.
निशा- ओके, मैं चैक करती हूँ.

तुरंत बुआ ने अपना नाइटी पहनी और मैं अपने रूम से बाहर निकल आया.

मैंने देखा तो निशा नीचे हॉल में थी. मैंने इशारे से बुआ से कहा कि वो अपने रूम में चली जाएं.
बुआ तुरंत अपने रूम में चली गईं.

दोस्तो, वर्जिन सिस्टर फर्स्ट सेक्स कहानी में अभी नई नई चूतों से मेरे लंड का मिलन होने वाला है.
एक एक करके सबकी चुदाई के किस्से सुनाऊंगा. बस आप मुझे मेल करते रहें.
[email protected]

वर्जिन सिस्टर फर्स्ट सेक्स से आगे की कहानी:

About Abhilasha Bakshi

Check Also

अल्हड़ पंजाबन लड़की संग पहला सम्भोग-1 (Alhad Panjaban Ladki Sang Pahla Sambhog- Part 1)

This story is part of a series: keyboard_arrow_right अल्हड़ पंजाबन लड़की संग पहला सम्भोग-2 View …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *