मैंने चचेरी बहन की सीलपैक बुर चोदी (Bhai Bahan Ka Sexy Khel)

भाई बहन का सेक्सी खेल मैंने अपनी कज़िन सिस के साथ खेला. वो गर्म माल थी. उसने मुझे एक्टिव सिखाने को कहा तो मैं उसे सुनसान सड़क पर ले गया.

दोस्तो, मेरा नाम हनी है. ये भाई बहन का सेक्सी खेल मेरी और मेरे चाचा की लड़की नाम चित्रा के बीच का है.

मैं गाजियाबाद में रहता हूँ और अपने माता पिता की इकलौती संतान हूँ. मेरी उम्र 21 साल की है और मैं दिखने में अच्छा हूँ. मेरी लंबाई 5 फुट 7 इंच है. मेरा लड साढ़े छह इंच लंबा और 4 इंच मोटा है.

मेरे छोटे चाचा के एक लड़की और एक लड़का है. चित्रा दिखने में बहुत अच्छी है और मुझसे एक साल छोटी है. उसका रंग गोरा और लंबाई 5 फुट 3 इंच है. उसके चुच्चे 32 इंच के हैं और गांड 34 की है.

मैं बचपन से ही हरामी था और मेरी नज़र हमेशा ही मेरी छोटी बहन पर थी, पर मुझे कभी कुछ करने का मौका नहीं मिला था.
हालांकि मैंने कई बार प्रयास किया था कि चित्रा को अपने जाल में फांस कर चोद दूं, मगर वो भी एक नम्बर की शातिर लौंडिया थी.
उसकी निगाहों में भी मर्दखोर नजरें झलकती थीं पर शायद वो मुझे भाई होने के कारण कुछ सकुचाती थी.

फिर हुआ कुछ यूं कि अभी लॉकडाउन से पहले चित्रा मेरे पास स्कूटी सीखने के लिए आई, तो मैंने हां कर दी.
मैंने उससे पूछा- तू साइकिल तो चला लेती है न?

वो बोली- हां साइकिल तो चला लेती हूँ. पर अब साइकिल का जमाना थोड़े ही है.
मैंने उसे दूध देखते हुए कहा- हां अब तो स्पीड वाले आइटम चलाने का समय है.

वो बोली- मतलब!
मैंने कहा- कुछ नहीं मेरा मतलब अब साइकिल कौन चलाता है. सबको तेजी से आगे चलने का ज़माना है.

वो मुँह बनाती हुई बोली- पता नहीं क्या कह रहे हो … मुझे तो बस स्कूटी चलाना सीखना है. आप मुझे सिखा दो.
मैंने कहा- हां सिखा दूंगा.

उसने हंस कर बाय कहा और गांड हिलाते हुए जाने लगी.
उसकी मदमस्त गांड और उठे हुए चूचे मेरे लंड को परेशान करने लगे थे.
बस अब मैं उसे चोदने का प्लान बनाने लगा.

अगले दिन वो और मैं एक सुनसान सड़क पर पहुंच गए. मैंने उसे आगे बिठाया और खुद उसके पीछे चिपक कर बैठ गया.

मेरा लंड धीरे धीरे कड़क होने लगा. शायद उसने भी अपनी गांड पर लंड महसूस किया, पर वो कुछ बोली नहीं.

मैं अपने दोनों हाथ उसके हाथ पर रखकर उसे सिखा रहा था, इसलिए मेरा जिस्म उसके शरीर से एकदम से चिपका हुआ था.

पहला दिन ऐसे ही चला गया.

दूसरे दिन में फिर से चित्रा से चिपक कर बैठा और फिर से अपना लंड उसकी गांड से लगा दिया.

आज भी उसने कुछ नहीं कहा और अपनी गांड पर मेरा लंड महसूस करती रही.

मैंने अपने हाथ स्कूटी के हैंडल से हटा दिए.
वो जरा डगमगाई तो मैंने अपने दोनों हाथों उसके पेट पर रख दिए और धीरे-धीरे सहलाने लगा.

उसे भी मज़ा आने लगा और उसने मुझे कुछ नहीं कहा.

अब मैं धीरे-धीरे अपने दोनों हाथ ऊपर ले जाता गया और उसे चूचों पर ले गया. मैं धीरे-धीरे उन्हें दबाने लगा.

उसने अभी भी कुछ नहीं कहा, इससे मेरी हिम्मत बढ़ने लगी और मैं और जोर से उसके दूध दबाने लगा.

उसने धीमी आवाज में मुझसे कहा- भाई आप यह क्या कर रहे हो … यह सब गलत है. हम दोनों भाई बहन हैं.
मैंने कहा- भाई बहन का रिश्ता हमेशा बना रहेगा. मगर नीचे वाले थोड़ी न इस रिश्ते को मानते हैं.

वो बोली- कौन नीचे वाले.
मैंने कहा- अब इतनी भी नासमझ न बनो.

वो हंस दी और बोली- मेरा मन तो करता है मगर आप मेरे भाई हो न इस वजह से मेरी हिम्मत नहीं होती.
मैंने कहा- तुम बस मजा लो … हिम्मत तो मेरे पास बहुत है.

ये कह कर मैंने उसका निप्पल मींज दिया.
वो आह करके सिस्कार उठी. वो बोली- अभी मत करो, मैं गिर जाऊंगी.

मैंने कुछ नहीं कहा और बस चुपचाप धीरे धीरे उसकी चूचियां दबाता रहा.
वो भी मजे लेती रही.

फिर उसने स्कूटी रोड के किनारे पर रोक दी.

मैंने भी उससे स्कूटी ली और सड़क के एक साइड में पेड़ के पीछे लगा दी.

वो बोली- इरादा क्या है!
मैंने उसे अपनी बांहों में खींचा और उसके होंठ चूसने लगा.
वो कसमसाती रही लेकिन उसने मुझे मना नहीं किया.

फिर कुछ मिनट बाद उसने कहा- अब घर चलो भैया. इधर सब खुला है.

मैंने उससे ओके कहा और मैं स्कूटी चलाने लगा.
वो पीछे बैठ गई.
फिर हम दोनों वापसी आ गए.

रात में उसका मुझ पर मैसेज आया- भाई, आज आप ये क्या रहे थे?
तो मैंने कहा- मुझे तुम अच्छी लगती हो, इसलिए मैं यह सब कर रहा था.

वो कुछ नहीं बोली.

मैंने उससे पूछा- क्या तुम्हें मजा नहीं आया?
वो बोली- मुझे आपके साथ डर लगता है. कहीं पकड़े गए तो बहुत बुरा होगा.

मैंने कहा- कौन बताएगा?
वो कुछ नहीं बोली.

मैंने उससे कहा- बस तुम साथ देना और ना किसी को बताना.
उसने कहा- ठीक है भाई … पर तुम्हें मुझे फिर से स्कूटी सिखानी होगी.
मैंने हां कहा और मन ही मन खुश हो गया.

अब मैं उसकी चुदाई की प्लानिंग करने लगा. मैं अब तक समझ चुका था कि यह भी मुझसे चुदना चाहती है और मेरा लंड अपनी गांड में और बुर में लेना चाहती है.

अगले दिन जब मैं उससे स्कूटी सिखाने ले गया तो मैं अपने साथ कुछ कंडोम के पैकेट भी ले गया.
मैं फिर से आज उसे पीछे बैठा और उसकी गर्दन पर चुम्बन करने लगा.

आज वो भी मस्ती के मूड में आई थी. उसने हंस कर कहा- बड़ी गुदगुदी लग रही है भैया.
मैंने पूछा- मजा भी तो आ रहा है न?
वो हंस दी.

फिर कुछ टाइम बाद मैं उसकी चूची दबाने लगा.
उसने मुझसे कुछ नहीं कहा, बस चुपचाप मजे लेती रही.

फिर कुछ टाइम बाद उसने मना किया, तो मैं मान गया और उसने स्कूटी घर की तरफ मोड़ने के लिए कहा.

मैंने पूछा- क्या हुआ?
उसने कहा- अभी मेरे घर पर कोई नहीं है. उधर ही चलते हैं.

मैं समझ गया कि चित्रा की बुर में लंड की खुजली जाग गई है.

उसकी बात मानकर मैंने उससे स्कूटी ले ली और उसे पीछे बैठने को कहा.
फिर स्कूटी उसके घर पर ले आया.

घर पहुंचते ही मैंने सबसे पहले दरवाजे की कुंडी लगाई और हम एक दूसरे को चूमने लगे.
हम एक दूसरे को पागलों की तरह चूमने लगे.

हमारी चुम्मा चाटी 10 से 15 मिनट तक चलती रही. मैं कपड़ों के ऊपर से उसके चूचे दबाने लगा और मैं अपना हाथ धीरे-धीरे उसकी बुर पर ले गया.

उसकी लैगी के ऊपर से ही उसकी बुर सहलाने लगा.
वो मदहोश होने लगी.

मैं कभी उसकी गर्दन को चूमता तो कभी होंठों को काटने लगा.
इसमें उसे भी बहुत मजा आ रहा था.

कुछ देर बाद मैंने उसका टॉप उतार दिया और उसे चूचों को ब्रा के ऊपर से ही दबाने लगा.
वह जोर-जोर से सीत्कार भरने लगी और कहने लगी- भाई पियो मेरा दूध.

उसके मुँह से इतना सुनते ही मैंने उसकी ब्रा भी उतार दी और उसके 32 इंच की एक चूची को अपने मुँह में लेकर चूसने लगा.

वो और जोर-जोर से बोलने लगी- आह भाई प्लीज धीरे करो … मैं कहीं भागी नहीं जा रही.

अब वह सिर्फ अपनी लैगी में खड़ी थी. मैंने वो भी उतार दी तो मैंने देखा उसने अन्दर पैंटी नहीं पहनी थी.

मैं समझ गया कि आज या पहले से ही ये चुदने का मूड बनाए हुई थी.
उसकी बुर बहुत ही सुंदर थी और उस पर थोड़ी-थोड़ी रेशमी झांटें थीं.

मैं उसकी बुर चाटने लगा.
इससे उसे भी बहुत मजा आने लगा. वह मेरे बाल पकड़कर मेरा मुँह अपनी बुर पर दबाने लगी और जोर जोर से सिसकारी लेने लगी.

फिर मैंने धीरे से अपनी एक उंगली उसकी बुर के दाने पर फेरी तो वह पागल होने लगी.
मैंने अपनी एक उंगली उसकी बुर के अन्दर डाली तो वो मजे से झूम उठी.

कुछ देर बाद मैं खड़ा हुआ और उसके होंठ चूमने लगा. साथ ही अपने एक हाथ से उसकी बुर सहलाने लगा.

फिर मैंने उससे अपना लौड़ा चूसने के लिए कहा, तो उसने मना कर दिया.
मैंने भी जबरदस्ती करना सही नहीं समझा.

मैं फिर से उसकी बुर चाटने लगा और अपनी दो उंगलियां बुर में डालने लगा.
तो वह थोड़ा चिल्लाने सी लगी.

पर उसके चिल्लाने में मुझे बहुत मजा आ रहा था. हालांकि वह भी उंगली से मजे ले रही थी.

अब उसकी बुर थूक से गीली हो चुकी थी. अब वह लंड बुर में पेल देने की कहने लगी थी.

वह बोली- भाई अब रुका नहीं जा रहा … मेरी बुर में अपना लंड डाल दो, यह मुझे बहुत परेशान करती है. इसमें बहुत गर्मी है साली में. यह मुझे सोने भी नहीं देती … मेरी बुर का आज तुम भोसड़ा बना ही दो. चोदो भाई चोदो … अब और मत तड़पाओ … चोद दो अपनी बहन को.

उसकी चुदाई की बात सुनकर मैं खड़ा हुआ और उसे बेड पर लिटा दिया.
मैंने उसकी दोनों टांगें फैला कर मैं अपना लंड उसकी बुर पर घिसने लगा.

उसकी बुर पानी में गीली हुई पड़ी थी. मैंने अपने लंड पर थूक लगाया और उसकी बुर पर सैट करके जोर लगा दिया.
लेकिन लंड फिसल गया.

दो-तीन बार कोशिश करने के बाद मेरा आधा लंड उसकी बुर में चला गया और उसकी सील टूट गई.

वह जोर से चिल्लाई और रोने लगी.
उसी समय मैंने उसके होंठों पर अपने होंठ रख दिए और उसे चूमने लगा.

जब तक वह शांत नहीं हो गई तब तक मैं भी ऐसे ही शांत पड़ा रहा. जब बहन थोड़ी शांत हुई तब मैंने एक और शॉट मारा और पूरा लंड उसकी बुर में उतार दिया.
वो फिर से थोड़ा तिलमिलाई, पर इस बार उसे थोड़ा जल्दी आराम मिल गया.

यह हम दोनों की ही पहली चुदाई थी, इसलिए हम दोनों में अनुभव की बहुत कमी थी.

फिर मैं धीरे-धीरे उसकी बुर में शॉट पर शॉट लगाने लगा और वह भी मादक सिसकारियों के साथ मजे लेने लगी.

कोई 5 मिनट तक हम इसी पोजीशन में चुदाई करते रहे और उसके बाद मैं उठा और साइड में लेट गया.
मैंने उसे अपने ऊपर आने को कहा.

वह मेरे ऊपर आकर मेरा लंड हाथ में लेकर सहलाने लगी और उसे अपनी बुर पर सैट करके उस पर बैठ गई.
उसे दर्द तो हुआ पर धीरे-धीरे वह मेरे लंड पर ऊपर नीचे होने लगी.

मुझे बहुत मजा आने लगा. उसे भी भाई बहन का सेक्सी खेल में बहुत मजा आ रहा था.

तभी मैं उसे पकड़ कर नीचे से जोर-जोर से शॉट मारने लगा.
वह मजे में चिल्लाने लगी. वो जोर-जोर से बोलने लगी- अहा भाई चोदो मुझे … आह फाड़ दो मेरी बुर को … हां भाई बहुत मजा आ रहा है … ऐसे ही करते रहो.

कोई 15 मिनट की चुदाई के बाद हम दोनों एक साथ ही झड़ गए और बराबर में लेट गए.

उसके कुछ दिन बाद लॉकडाउन लग गया और इस दौरान हम दोनों ने बहुत बार चुदाई का मजा लिया.

ये मेरी बहन की चुदाई की कहानी एकदम सच्ची है. आपको मेरी यह भाई बहन का सेक्सी खेल कैसा लगा? प्लीज़ कमेंट करके जरूर बताएं.
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