मौसी और उनकी जेठानी की चुदाई- 2 (Mausi Ki Nangi Gand)

मौसी की नंगी गांड मारी मैंने! मौसी ने मेरा लंड चूस कर खड़ा किया और कहने लगी कि मेरी गांड मारो. मैंने भी उनको खुश करने के लिए उनकी बात मान ली.

दोस्तो, मैं राहुल आपको अपनी मौसी रूपाली की चुदाई की कहानी सुना रहा था.
कहानी के पिछले भाग
नंगी मौसी मेरे कमरे में आ गयी
में अब तक आपने पढ़ा था कि रूपाली मेरे साथ चुदाई के दौरान झड़ने लगी थी.

अब आगे मौसी की नंगी गांड मारी मैंने:

पूर्ण रूप से झड़ने के बाद मैं रूपाली के बगल में लेट गया और उसकी पीठ को अपने सीने से चिपका लिया.
मैं- कैसा लगा मेरी जान?

रूपाली- सच में … जब भी आप से चुदवाती हूँ तो पता नहीं कैसे शरीर हल्का हो जाता है. ऐसा लगता है जैसे कि मन को पूर्ण तृप्ति मिल गई हो, लेकिन अभी मेर मन नहीं भरा है. अभी मुझे और चुदवाना है.
मैं- अच्छा … अगर मौसा जी आ गए तो?

रूपाली- वो साला नहीं उठने वाला, इतनी शराब जो पी रखी है. उसे तो ये भी नहीं पता कि वो वहां नामर्दों की तरह सो रहा है और उसकी बीवी अपने यहां नए पति के नीचे अपनी टांगें खोलकर चुदवाने में लगी हुई है. उसके बगल में जो लेटी है, वो उसकी बीवी नहीं … उसकी भाभी है. अगर वो आता है, तो आ जाए. अब मैं उसके सामने भी आपसे चुद जाऊंगी. लेकिन संतुष्टि होने से पहले मैं यहां से नहीं जाऊंगी!

मैं- एक बात कहूँ जान!
रूपाली- हां कहिये!

मैं- तुम आजकल बहुत बिंदास हो गई हो. पहले से ज्यादा गंदे शब्दों का प्रयोग करने लगी हो!
रूपाली- आपको भी तो यही पसंद हैं न!

मैं- तुमने ये कब देखा?
रूपाली- जब आपका ये मूसल दीदी की चूत में घुसा हुआ था और मुझे उनकी कामुक सिसकारियां सुनाई दे रही थीं.
इतना कहते ही रूपाली ने मेरा लंड जोर से दबा दिया, तो मेरे मुँह दर्द भरी आह निकल गई.

हम दोनों हंसने लगे.
रूपाली- अब मुझे न … पीछे से चुदना है.

मै- तुम्हारा न … ये खिलौना अभी तैयार नहीं है, पहले इससे प्यार करो. इसे खड़ा करो … तभी तो तुम्हें मजा आएगा.
रूपाली- बस इतनी सी बात … अभी इसे इतना प्यार करूंगी कि ये आपका सांप खुद मेरे बिल में घुसने के लिए पागल हो जाएगा.

रूपाली ने इतना कहा और उसने मेरी दोनों टांगें खोल दीं.
वो मेरी टांगों के बीच में बैठ गई. फिर उसने मेरे लंड को मुट्ठी में पकड़ा और हल्के हाथ से सहलाने लगी.

फिर उसने मेरे लंड के ऊपर ढेर सारा थूक गिराया और अपनी मुट्ठी को हिलाती हुई मेरे लंड को चिकना करने लगी.

सच में आज रूपाली के हाथ जादू कर रहे थे.
जब लंड थोड़ा सा खड़ा हुआ तो उसने मेरे लंड की खाल को पीछे किया और सुपाड़े के निचले भाग पर अपनी जीभ चलाने लगी.

फिर उसने सुपारे को मुँह में भरा और केवल सुपारे को चूमने लगी.
वो कभी सुपारे पर गोल गोल जीभ घुमाती तो कभी लंड के छेद में अपनी जीभ घुसा देती.

रूपाली की लंड चूसने की अद्भुत कला का असर मेरे लंड पर पड़ रहा था.
मैं न चाहते हुए भी अपनी कमर को नीचे से उचका कर उसका मुँह चोदने लगा था.

जब भी मैं थोड़ा जोर से धक्का लगा देता, तो उसके मुँह में लंड अन्दर तक घुस जाता और रूपाली के मुँह से ‘आह्ह …’ निकल जाती.
लंड चूसने में रूपाली के बाल उसके मुँह पर आ रहे थे इसलिए मैंने उसके बालों की पोनी-टेल बना कर पकड़ लिया ताकि उसे लंड चूसने में कोई दिक्कत न हो.

मैंने रूपाली से कुतिया बनने को बोला.
तो रूपाली तुरंत बिस्तर पर कुतिया के जैसी झुक गई.

पहले मैंने उसके दोनों चूतड़ों को अलग किया और उसकी गांड के छेद को अपनी नाक से सूंघने लगा, जैसा कुत्ते अक्सर कुतिया के साथ करते हैं.

फिर मैंने उसकी गुलाबी गांड के छेद पर जीभ रख दी और उसे चाटने लगा.
मैं उसकी गांड चाटते हुए चूत तक जाता और वापस लौट जाता.

मेरे ऐसा करने रूपाली बावली हुई जा रही थी.

उसके दोनों चूतड़ों पर मैंने अपने दांतों से काट-काट कर कई सारे निशान बना दिए थे.

मैंने पीछे से उसकी चूत चाटना चालू किया.
उसकी चूत में अभी उसका कुछ रस भरा हुआ था जो मेरे चूत चाटने से रिसते हुए बाहर आने लगा था.

मैं जितना अन्दर जीभ डालता, उतना ही उसकी चूत में जमा हुआ रस अपनी जीभ में लेकर लौट आता.
फिर मैंने अपने हाथों में लंड पकड़ा और एक बार में निशाना लगाते हुए उसकी गांड में उतार दिया.

अचानक से लंड घुसाने रूपाली कुछ आगे को खिसक गई और उसके मुँह आह निकल गई.
कुछ देर रूकने के बाद मैंने उसकी गांड में चांटे मारने शुरू कर दिए.

जब भी मैं उसकी गांड पर चांटे मारता, तो वो मुझसे और जोर से मारने को बोल कर मेरा जोश बढ़ाती.
उसके दोनों चूतड़ लाल हो गए थे और उन पर उंगलियों के निशान साफ़ दिखाई दे रहे थे.

फिर मैंने अपनी कमर को चलाते हुए उसकी गांड मारना चालू किया.

शुरू में आराम से धीमे-धीमे धक्के लगा रहा था लेकिन शायद रूपाली को कुछ ज्यादा ही जल्दी थी इसलिए उसने तेजी से चोदने को बोला.
तो मैंने भी उसका आदेश को शिरोधार्य किया और तेजी से रूपाली की गांड मारने लगा.

देखते ही देखते मेरे लंड ने रफ़्तार पकड़ ली और रूपाली की गांड से लय ताल मिलाने लगा.
मैं जितनी तेजी से अपना लंड उसकी गांड से निकालता, उससे दोगुनी तेजी से वापस उसकी गांड में ठोक देता.

शुरू में रूपाली को इस तरह से गांड मरवाने में बड़ा मजा आ रहा था लेकिन समय बीतने के साथ कब उसकी सिसकारियां चीखों में बदल गईं, इसका उसे खुद भी पता नहीं चला.

जब मैं अपना लंड बाहर निकलकर वापस उसकी गांड में घुसाता तो रूपाली के मुँह से ‘आह्ह … मां … मर गई … धीरे करो थोड़ा …’ जैसे शब्द निकल जाते.

मेरे धक्कों की रफ़्तार से रूपाली की स्तन हवा में झूलने लगे थे.

मैंने अपने दोनों हाथों को उसकी कमर से उठा कर उसकी चूचियों पर रख दिया और उन्हें मसलने लगा.
बहुत देर से चल रही इस चुदाई के कारण रूपाली के घुटने दर्द देने लगे थे जिसकी वजह से उसने मुझसे जगह बदलने को कहा और बिस्तर पर एक तरफ गिर गई.

मैं भी उसकी पीठ के पीछे आ गया और उसकी एक टांग को अपने हाथों से हवा में उठा लिया.
मैंने वापस से अपना लंड उसकी गांड में डाल दिया और उसे चोदने लगा.

मैं उसकी एक टांग को उठाकर उसकी गांड चोदने में लगा हुआ था तो दूसरे हाथ से उसकी चूत सहला रहा था.

रूपाली की चूत इस समय प्रीकम से लबालब नदी जैसी भरी हुई थी.
मैंने अपनी एक उंगली उसकी चूत में डाल दी और खेलने लगा.

इस समय रूपाली कामवासना से दोहरी हुई जा रही थी.
मेरा लंड पिस्टन के जैसे उसकी गांड में भाग रहा था और उसकी चूत से वासना की लपटें निकल रही थीं.

फिर रूपाली अचानक से अपनी पीठ को मेरे सीने से रगड़ने लगी और खुद भी अपनी चूत से खेलना चालू कर दिया.
रूपाली ने कहा- हां ऐसे ही करते रहो, अब मैं झड़ने वाली हूँ … आह और तेज़ चोदो अपनी रंडी को … आह्ह शह्ह.

“‘बस मेरी जान कुछ देर और मेरा साथ दो … देखो मेरा लंड कैसे तुम्हारी मखमली गांड सींचने को कैसे फूल रहा है. ऐसे चुदती रहो अपने पति से!”

इतना बोलकर मैंने रूपाली की एक चूची मुँह में भर ली और पीने लगा.
तभी रूपाली का बदन झटके खाने लगा और उसकी चूत से चूतरस बहने लगा.
उसकी चूत से इतना अधिक रस बह रहा था कि पहले मेरा हाथ गीला हुआ फिर देखते ही देखते बिस्तर … लेकिन न चूत से रस निकलना बंद हुआ … न ही उसके बदन का तापमान बढ़ना रुका.

उसके शरीर की गर्मी को और अधिक मैं बर्दाश्त न सका और उसकी नंगी गांड में झड़ने लगा.
जैसे ही मेरे लंड से रस की धार निकली, जिसकी कम्पन को मैं खुद भी सह न सका और रूपाली की एक चूची को जोर से दांतों से काट लिया.
इससे पूरे घर में रूपाली की भयंकर चीख गूँज गई.

लेकिन अगले ही पल मुझे मेरी गलती का अहसास हुआ तो मैंने उसकी चूची पर अपने दांतों की पकड़ ढीली कर दी.

पूरी तरह स्खलित होने के बाद जब रूपाली ने करवट ली तो मेरा लंड उसकी गांड से बाहर निकल आया और उसके पीछे मेरा वीर्य भी निकल पड़ा.
फिर रूपाली ने अपने दूध मेरे सीने में घुसा दिया और मुझसे चिपककर लेट गई.

मैं उसके बालों से खेलता रहा, पता नहीं रूपाली कब सो गई.
मैंने घड़ी में देखा तो रात के 2:30 बज रहे थे.

कुछ देर के बाद मैंने रूपाली को हिलाकर जगाया और उससे वापस कमरे में जाने को कहा.
उसने यह कहते हुए टाल दिया कि अभी उसका मन नहीं भरा है. अभी उसे एक बार और सेक्स करना है.

मैंने उसे समझाने की बहुत कोशिश की कि अभी रात का साढ़े तीन बजे का समय हो रहा है, अब बाद में करेंगे.
लेकिन उसने मेरी एक न सुनी और ऐसे जिद पर अड़ गई, जैसे उसने एक और बार चुदने की ठान ली हो.

मैं मना करने की कोशिश करता रहा लेकिन उसे भी मेरी कमजोरियों का बखूबी पता था इसलिए उसने बातों में समय गंवाने से अच्छा बिना किसी चूचपड़ के मेरा वीर्य से सना लंड मुँह में भर लिया और चूसने लगी.
शुरू में मैं उसे टालने में लगा रहा लेकिन मैं भी आखिर कब तक उसकी लंड चुसाई से खुद को काबू रख पाता.

धीरे-धीरे मेरे लंड में हरकत होनी शुरू हो गई. थोड़ी देर में लंड इतना तनकर खड़ा हो गया था, जो किसी भी औरत की प्यास बुझाने के लिए काफी था.
रूपाली ने अपने मुँह से थूक से सना हुआ लंड निकाला और मुझसे बिस्तर पर लेटे रहने को कहा.

फिर उसने अपनी दोनों टांगें मेरी कमर के इधर उधर डालीं और घुटने के बल बैठ गई.
रूपाली घुटनों के बल चलते हुए मेरे मुँह के ठीक ऊपर आ गई.

रूपाली मेरे मुँह के इतने पास आ चुकी थी कि मुझे उसकी चूत के अलावा और कुछ नहीं दिखाई दे रहा था.
फिर वो धीमे से नीचे झुकने लगी.

जब उसकी चूत और मेरे मुँह के बीच में एक इंच का फासला रह गया तो रूपाली ने मुझसे चूत चाटने को बोला.

मुझे उसकी चूत की तपिश अपने चेहरे पर साफ़ महसूस हो रही थी.
उसकी चूत चाटने में आज जो मजा आ रहा था, वैसा पहले कभी नहीं आया था क्योंकि आज सारा दिशानिर्देश रूपाली दे रही थी.

उसे अपनी चूत का जो हिस्सा चटवाना होता, वो उस हिस्से को जीभ के पास ले जाती और मैं चाटने लगता.

उसकी चूत चाटते हुए जब मैं उसकी चूत की फांकों को अपने दांतों से पकड़ कर खींचता, तो वो चिहुंक कर खड़ी हो जाती और चूत मेरी पकड़ से आजाद हो जाती.

कुछ बाद रूपाली इतनी गर्म हो गई थी कि उसकी चूत से प्रीकम निकलने लगा.
उसकी चूत का ये रस किसी जल उद्गम की तरह बूँद-बूँद टपककर मेरे मुँह में जाता और मेरी प्यास को तृप्त करने लगता.

फिर रूपाली दो कदम पीछे हटी और मेरे लंड के पास आ गई.
उसने मेरे लंड को एक-दो बार चाट कर अपनी लार से चिकना किया.

फिर उसने मेरे लंड को मुट्ठी में पकड़ कर अपनी चूत के समांतर किया और धीमे से लंड पर बैठने लगी.
सुपारा लंड की खाल पीछे धकेलते हुए उसकी चूत में अन्दर घुसने लगा.

जितना लंड अन्दर जाता, उतना ही उसकी चूत कसती जाती.

पूरा लंड अन्दर जाने के बाद रूपाली कुछ देर रूकी रही तो मैंने नीचे धक्के लगाने के लिए जैसे ही अपनी कमर उचकाई, उसने मुझे रोक दिया.

वो बोली- अब मैं आपको चोदूंगी.
रूपाली ने अपने दोनों हाथ मेरे सीने पर रखे और धीमे से मेरे लंड पर कूदने लगी.

शुरू में रूपाली धीमे-धीमे उछल रही थी लेकिन थोड़ी देर में ही उसने शताब्दी ट्रेन जैसे रफ़्तार पकड़ ली.

उसकी चूत में मेरा लंड बड़ी तेजी से अन्दर बाहर होने लगा था.
ऐसा लग रहा था कि सच में रूपाली के चूत में से एक लंड निकल आया हो और वो उसी लंड से मुझे चोद रही हो.

इतनी ज्यादा गति से करने के कारण जल्दी ही रूपाली को थकान ने घेर लिया और वो हांफती हुई रूक गई.

कुछ देर तक मैं वैसे ही उसके चेहरे को देखता रहा.

तभी अचानक से रूपाली बोली- भोसड़ी के … देख क्या रहा … चोद न अपनी छिनाल को!
उसके मुँह से ऐसे शब्द सुन के एक पल के लिए मैं दंग रह गया.

फिर रूपाली खुद ही बोल पड़ी- मुझे भी गाली-गलौच वाली चुदाई करवानी है, जैसी आप दीदी के साथ करते हो. आप बिना किसी शर्म के मुझे गालियां दो.

मैंने रूपाली की कमर को दोनों हाथों से पकड़ा और उसे जोर से अपने लंड के दबा दिया.
मैं- ले मेरी रखैल साली रांड … ले खिला अपनी चूत को अपने यार का लौड़ा मादरचोदी.

रूपाली- हरामजादे कुत्ते सिर्फ मुँह से मेरी बुर चोदेगा क्या … अरे जरा जोर लगा थोड़े करारे धक्के लगा ना भोसड़ी के … जो मेरी बुर में गहराई में जाकर मेरी चूत का घमंड तोड़ दें ताकि जब तुझसे चुद कर लंगड़ाती हुई कमरे से बाहर जाऊं और अपने नामर्द पति के बगल में लेटूं, तो मुझे तेरा दर्द सोने न दे. लेकिन लगता है तू भी मेरे पति की तरह नामर्द ही है.

मैं- साली दो टके की रांड … बहुत उबाल मार रही है भैन की लवड़ी.

दोस्तो, चुदाई के बीच में गालियां विटामिन का काम करती हैं. एक दूसरे को तन से जोड़ने के साथ साथ मन से जोड़ने का काम खुल कर अभद्र भाषा का प्रयोग ही करता है.

आपको रूपाली और मेरे बीच हो रही चुदाई की कहानी का अगला भाग मजा देने के लिए रेडी है.

बस आप मेरे साथ अन्तर्वासना से जुड़े रहें और मुझे मेल जरूर लिखें कि आपको मौसी की नंगी गांड की कहानी कैसी लग रही है.
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मौसी की नंगी गांड की कहानी का अगला भाग: मौसी और उनकी जेठानी की चुदाई- 3

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