मौसी की जेठानी की प्यास बुझाई- 6 (Massage Sex Kahani)

मसाज़ सेक्स कहानी में पढ़ें कि मौसी की जेठानी पहले राउंड की चुदाई के बाद बहुत थक गई तो मैंने उसकी नंगी मालिश की फिर उसके साथ ओरल सेक्स का मजा लिया।

कहानी के पिछले भाग
मौसी की जेठानी की लम्बी चुदाई
में अब तक आपने पढ़ा कि सुबह रूपाली ने मुझे नीतू कि चुदाई करते हुए देख लिया था जिससे रूपाली बहुत नाराज़ हो गई थी।

तब मैंने रूपाली को ऐसा करने का कारण बताया तो रूपाली सब समझ गई बाद में मैंने रूपाली से नीतू को मेरे साथ आज रात सुहागरात मनाने को बोला तो जिसे नीतू ने खुशी से मान लिया।
रूपाली ने नीतू अपने हाथों से आज रात के लिए तैयार किया था। एक राउंड की चुदाई के बाद नीतू बहुत थक गई थी।

अब आगे मसाज़ सेक्स कहानी:

थोड़ी देर बाद मैं उठा मुझे भूख लग आयी थी तो मैंने मसाज ऑयल की बोतल उठाई और रसोई में चला गया।
वहाँ पर एक कटोरे में मेवा वाला दूध रखा हुआ था जिसे जरूर रूपाली ने हमारे लिए तैयार किया था।

मैंने दूध को एक बार फिर से गर्म किया और एक तरफ कटोरे में पूरा मसाज आयल को हल्का गर्म कर लिया।
फिर मैंने दो गिलास दूध और मसाज आयल को एक ट्रे में सजाया और नीतू के पास चला गया।

मैं कमरे में दाखिल हुआ तो नीतू अभी भी वैसी ही नंगी बेड पर पेट के बल पड़ी हुई थी।

मैंने ट्रे को एक तरफ रखा और उसके एक चूतड़ को थपथपा कर नीतू को जगाया।
मुझे देखते ही नीतू मुस्कुराने लगी।

मैंने उसके हाथ में दूध से भरा हुआ गिलास थमा दिया।

थोड़ी देर बाद हमने अपने अपने गिलास का दूध खत्म करके गिलास मेज पास रख दिए।

दूध पी कर शरीर में फिर से नई उर्जा की लहर दौड़ने लगी थी।

नीतू के ऊपर वाले होंठ के ऊपर दूध लगा हुआ था जिसे मैंने लपककर चाट लिया।
सच में गिलास का दूध उसके होंठों पर लगे दूध की मिठास के आगे कहीं भी नहीं ठहर सकता था।
कुछ देर तक मैं यूँ ही उसके होंठों को चूमता रहा।

फिर मैंने उसे बेड पर पेट के बल लिटा दिया और पंखे की स्पीड थोड़ी कम कर दी।

मैंने मसाज आयल का कटोरा उठाया और उसके पास बैठ गया। मैंने उसकी कमर में पड़ी सोने की चैन (कमरबंद) के लॉक को खोला और उसकी चैन कमर से निकाल कर साइड में रख दी।

उसकी पीठ पर यहाँ वहां चूमने के बाद मैंने अपनी उँगलियों को तेल में डुबाया फिर उसकी पीठ पर हल्के हाथों से तेल लगाने लगा।

पीठ पर अच्छे से तेल लगाने के बाद मैं उसकी गांड के दोनों तरफ पैर करके घुटनों के बल बैठ गया और उसकी पीठ पर हल्के हाथों से मसाज करने लगा।
मसाज करते हुए मैं उसके कन्धों को जोर से दबाता कभी उसकी रीठ की हड्डी को अपने अंगूठों से दबाता तो कभी उसकी मसाज करते हुए उसके चुचे छूकर लौट आता।

मेरे लगातार रगड़ने से उसकी पीठ गुलाबी हो गई थी।
जब भी मैं उसके चुचे छू लेता तो नीतू वासना से कलप जाती।

थोड़ी देर बाद मैं नीचे की तरफ बढ़ा और उसके पैरों के तलवे के पास बैठ गया और उन्हें बारी बारी चूमने लगा।

मैंने दोनों हाथों में थोड़ा सा तेल लेकर उसके दोनों तलवो में लगा दिया। फिर अपने हाथों के अंगूठे से उसकी एड़ी और तलवे के सम्वेदनशील भाग को दबाने लगा।

कुछ समय बाद मैंने उसकी दोनों पायल खोलकर एक तरफ रख दी और उस हिस्से को चूमने लगा।

फिर मैंने थोड़ा सा तेल लेकर उसकी पिंडलियों पर लगाया और उन्हें जोर से दबाते हुए मसलने लगा।
उसकी चिकनी टांगों पर मेरा हाथ ऐसे सरक रहा था जैसे मक्खन में चाकू सरकता है।

अब मैंने अपने हाथों पर थोड़ा सा ज्यादा तेल लिया और उसके चूतड़ों पर चुपड़ दिया।
तेल लगने के बाद उसके चूतड़ ऐसे चमक रहे थे जैसे उन पर पन्नी चढ़ा दी हो।

उसके दोनों चूतड़ सच में बहुत ही नर्म थे; जिनको मैं सहलाते हुए कभी उन पर चमाट मार देता तो नीतू चिंहुक जाती।
मैं अपनी बड़ी वाली उंगली तेल डुबो कर उसकी गांड के छेद के पास सहलाने लगा।

कुछ देर में उसके गांड के छेद में हलचल होने लगी जब नीतू सांस लेती तो उसकी गांड छेद की खाल अंदर को खींचने लगती और साँस बाहर छोड़ने पर खाल बाहर आ जाती; जैसे उसकी गांड का छेद भी नीतू के साथ सांस ले रहा दो।

मैंने आगे झुक कर उसके छेद को चूम लिया फिर मैंने अपना अंगूठा उसकी गांड में डालना शुरू किया।
मेरे अंगूठे का पहला पोर बड़ी मेहनत के बाद उसकी गांड के अंदर दाखिल हुआ। मेरा जितना अंगूठा उसकी गांड में घुस सकता था उतने से ही मैं अपने अंगूठे को अंदर बाहर करते हुए उसकी गांड को ढीला करने लगा।

जब मेरा अंगूठा उसकी गांड में अटकने लगता तो मैं फिर से अंगूठे को तेल से गीला करके उसकी गांड ढीली करने लग जाता।

बीच बीच में उसकी चूत पर अपनी उंगली से तेल का छिटा मार देता तो नीतू के मुंह से सिसकारी निकल जाती।
अब उसकी गांड ने मेरे अंगूठे के आने जाने की पर्याप्त जगह बना ली थी।

मैंने नीतू को कमर से पकड़ के पलट दिया।
नीतू अभी भी वैसे ही आँख बंद करके पड़ी हुई थी।

मैंने उसके माथे से सोने का टिका निकाला और माथे को चूम लिया।
उसकी उठी हुई नाक को देखकर मैंने उसकी नाक को ऊपर से ही चूम लिया इस पर नीतू बिना आँख खोले मुस्कुरा दी।
मैंने एक बार फिर से उसके होंठों को जल्दी से चूम लिया।

फिर बायें कान में पड़े झुमके को निकाल लिया और उसकी कान की लौ को मुंह भर कर खेलने लगा।
कभी उसकी लौ को मुंह भर लेता और चूसने लगता तो कभी उसके कान के अंदर वाले हिस्से को जीभ से चाटता।

जब कभी मेरी जीभ उसके कान के छेद को छू जाती तो नीतू जोर कुलबुला उठती।

इसी तरह उसके दूसरे कान से भी खेलने के बाद मैं उसकी गर्दन की तरफ चल दिया।

मैंने गले में पड़े सोने के हार की डोरी ढीली की और उसकी गर्दन को उठा कर हार उसके गले से निकाल दिया।
इस समय भी उसका गला उतना ही सुंदर लग रहा था जितना पहले लग रहा था।

मैंने नीतू की गर्दन पर अपने होंठ रख दिए।
उसकी गर्दन पर पसीने की कुछ बूँदें उभर आयी थी जिन्हें मैं जीभ से चाटने लगा। जिसका स्वाद सामान्य सा था कुछ अलग था तो उसके बदन की खुशबू जिसका मैं कायल हुआ जा रहा था।

जब तक मैं उसकी सुराही जैसी लंबी गर्दन को चाटता रहा तब तक नीतू की गर्म साँसें मेरे कानों में पड़ कर मेरा जोर बढ़ा रही थी।

मैंने दोनों हाथों से उसकी चूचियों को अलग किया और उसके गहरे क्लीवेज को चाटने लगा। कभी ऊपर से नीचे तो कभी नीचे से …
ऊपर उधर नीतू मेरे बालों को प्यार से सहला रही थी।

मैंने उसकी चूचियों को बारी बारी चूमा अपने हाथों में तेल लेकर उसकी चूचियों पर चुपड़ दिया और उन्हें मींजने लगा।
कभी दोनों चूचियों को आपस में टकराता कभी अपनी मुट्ठी में भर कर जोर से दबाता; जिससे उन पर मेरे उँगलियों के निशान पड़ जाते.

तो कभी उसके निप्पलों को जोर से मरोड़ देता इस उम्मीद में कि शायद इन से अभी दूध की धार निकल पड़ेगी.
लेकिन ऐसा सम्भव नहीं था।

काफी देर तक उसकी चूचियों से खेलने से उसकी रुई की तरह नर्म चूचियां अब कुछ सख्त होने लगी थी।
मैंने उसके सर के नीचे एक तकिया रख दिया और उससे दोनों हाथों से चूचियों को एक साथ जोड़ कर पकड़ने को कहा।

फिर मैं उसकी कमर की दोनों तरफ टांगें करके बैठ गया।
मैं अपना लंड उसकी चूचियों की दरार में धीरे से अंदर डालने लगा।
मेरे थोड़ा सा जोर लगाने पर मेरा लंड उसकी चूचियों के बीच ऐसे घुस गया जैसे मक्खन में चाकू घुसा हो।

मैं धीरे धीरे उसकी चूचियां चोद रहा था और ऐसे मजे ले रहा था जैसे मेरा लंड उसकी नर्म गांड की सैर कर रहा हो।
तेल से सनी चूचियों में मेरा लंड सरपट भाग रहा था।
जब भी मेरा लंड उसकी चूचियों में पूरा घुस जाता तो पट्ट की आवाज आती।

इसमें अब नीतू को मजा आने लगा था तो नीतू ने मुझे और जोर से चोदने को बोला।
मैं आज्ञाकरी दास की तरह और जोर से उसकी चूची में लंड पेलने लगा।

कुछ देर में मेरे लंड से प्रीकम निकने लगा तो नीतू ने अपनी गर्दन को थोड़ा और झुका लिया।
जब भी मेरा लंड उसकी चूचियों में घुसते हुए आगे जाता तो लंड की खाल पीछे हो जाती और प्रीकम से सना हुआ सुपारा चमकने लगता जिसे नीतू अपनी जीभ से चाट लेती।
कुछ देर तक नीतू ने सुपारे को चाट कर सारा प्रीकम साफ़ कर दिया था।

मैं उसके ऊपर से उतरा और गोरे, चिकने और सपाट पेट को देखता रहा।
फिर उसकी गहरी नाभि अपनी जीभ डालकर उसे कुरेदने लगा।

मैं जितना उसकी उसकी नाभि को जीभ से सहलाता नीतू उतना ही खिलखिला कर हँसती जिससे उतना पेट अन्दर बाहर होने लगता।
कभी उसके पेट को चाटते हुए उसकी नाभि को अपनी लार से भर देता और वापस से अपनी लार चुसकने लगता।

फिर मैंने अपने हाथों में थोड़ा सा तेल लिया और उसके पेट की मसाज करने लगा।
मैंने थोड़ा सा तेल उसकी गहरी नाभि में भर दिया इस समय उसकी नाभि सच में तेल के कुएँ ऐसे लग रही थी।

जब भी नीतू हँसती तो थोड़ा तेल उसकी नाभि से छलक कर चूत की ओर चला जाता।

मैं थोड़ा सा तेल लेकर उसकी जांघों को रगड़ने लगा।
मेरे लगातार रगड़ने से उसकी पुष्ट जांघे कहीं कहीं से लाल हो गई थी।

नीतू को एक बार फिर से वासना ने घेरना शुरू कर दिया जिसका सुबूत कमरे में उसकी मंद सिसकियाँ दे रही रही थी।

जब भी उसकी जाँघों को सहलाते हुए मैं उसकी चूत को हल्के से छू कर लोट आता तो अचानक से उसकी सिसकी तेज हो जाती।

थोड़ी देर तक मैं यूँ ही उसकी चूत से खेलता रहा जिससे नीतू बहुत ज्यादा गर्म हो गई थी इसलिये मैंने अब अंतिम चरण में पहुँचने की सोची।
मैंने तेल के कटोरे को उठाया और एक पतली सी धार से उसकी चूत को गीला कर दिया।

उसके दाने को मैंने उँगलियों से सहलाना शुरू किया।
फिर मैंने उसकी एक जांघ को उठा कर अपने कंधे पर रख लिया।

उसकी चूत के होंठ आपस में चिपके हुए थे जिन्हें मैंने अपनी दो उँगलियों से खोल कर अलग किया। उसकी चूत के अंदर की लाली मुझे पागल बना रही थी।

मैं अपने दोनों अंगूठों से उसकी चूत के होंठों को सहलाने लगा। फिर मैं अपनी एक उंगली उसकी चूत की लकीर में फिराने लगा।

मैंने उसकी चूत को थोड़ा और खोला, मैंने अपनी उंगली अंदर डाल दी और जीस्पॉट को कुरेदने लगा.

मेरी उंगली का स्पर्श पा कर नीतू की आँखें बंद हो गई थी। उसने चादर को अपनी मुट्ठी में भर कर अस्त व्यस्त कर दिया था।

मैं बार बार उसकी चूत में उंगली करता रहा। कभी सहलाता तो कभी उसके दाने को अपने दांतों से हल्का का दबा देता।
थोड़ी देर में अब उसकी चूत से सफ़ेद प्रीकम आने लगा था।

नीतू ने मुझसे चोदने की मिन्नत की तो मैं भी उसकी चूत के पास बैठ गया और निशना लगाते हुए एक बार में लंड उसकी चूत में उतार दिया।
अचानक इस हमले से नीतू का मुंह खुला रह गया और आँखें फ़ैल गई।

मैं कई बार अपना लंड उसकी चूत से निकलता और एक बार में पूरा लंड उसकी चूत के अंदर उतार देता।

मैं बेड से उतरा और नीतू की टांगें बेड से नीचे कर दी।
फिर मैंने उसकी दोनों टांगे को अलग कर करके हवा में उठाया और टखने के पास से पकड़ लिया।

इस बार मैंने अपना लंड धीरे से उसकी चूत में डाला और प्यार से चोदने लगा।

मेरे हर धक्के पर उसकी चूत से तेल और प्रीकम का मिश्रण बाहर आ रहा था जो उसकी गांड के छेद से होते हुए जमीन पर टपक जा रहा था।

मेरा लंड भी अब तेल से गीला हो गया था इसलिये उसकी चूत में आराम से जा रहा था।

थोड़ी ही देर में चुदाई एक्सप्रेस ने रफ़्तार पकड़ ली और मैं पूरी ताकत से नीतू को चोदने में लगा हुआ था।
उसकी जांघों का तेल मेरी जांघ में लग गया था तो जब भी मेरी जांघ उसके चूतड़ से टकराती तो पट्ट की आवाज आती।

इस समय मैं उसे फुल स्पीड में चोद रहा था जिससे पूरे कमरे में पट्ट पट्ट की तेज आवाज हो रही थी।

उधर नीतू हर धक्के पर ‘हाय मर गई मम्मी …’ कर रही थी।
नीतू ने लगभग काम्पते हुए शब्दों में कहा- राहुल प्लीज़ थोड़ा धीरे चोदो! मैं अपनी सिसकारियों पर काबू नहीं कर पा रही हूँ. या फिर तुम मेरे मुंह को बंद करके मुझे चोदो! नहीं तो रूपाली मेरी आवाजे सुन लेगी.

मैंने कहा- नहीं मेरी जान, ऐसे ही दिल खोल कर चुदवाओ. रूपाली सुनती है तो क्या फर्क पड़ता है. वैसे भी ये सारा कुछ रूपाली ने ही तो किया है. तो आज न तुम मुझे रोकने को न कहो और न ही तुम रुको. बस ऐसे ही चुदवाती रहो.

मैं और जोर से नीतू की चूत मारने लगा जिससे नीतू सिसकारियाँ और तेज़ हो गई थी.
नीतू ने शर्म से खुद ही अपने मुंह को दोनों हाथों से बंद कर लिया लेकिन अभी उसके मुंह से आह्ह … मम्मी … आअह्ह … उस्स्स्ज़ … उम्म्म्म जैसी सिसकारियां सुन पा रहा था।

लगातार तेजी से चूत चोदने से चूत के पास सफ़ेद झाग आ गया था।

थोड़ी देर में नीतू का बदन कांपने लगा. नीतू अपनी कमर को उचका कर चूत मेरी तरफ धकेलने लगी।

उसकी चूत मुझे अब कुछ तंग लगने लगी थी, ऐसा लग रहा था कि उसकी चूत के होठ मेरे लंड को अंदर खींच रहे हो।
ये सारे शुभ संकेत थे कि नीतू की अब झड़ने वाली है।

मैं भी उसी गति से चोदता रहा फिर नीतू ने अपने मुंह से एक हाथ हटाया और एक हाथ से अपने चूत के दाने को सहलाने लगी।

थोड़ी देर बाद मुझे मेरे लंड पर तेज दबाव महसूस हुआ लगा कि नीतू बस अब झड़ जाएगी.
तो मैंने अपना लंड उसकी चूत से बाहर निकाला और मैं भी उसकी चूत सहलाने लगा।

फिर नीतू ने जोर से एक चीख मारी जिससे पूरा कमरा गूँज उठा।
नीतू की चीख के साथ उसकी चूत से रस का फव्वारा फूट पड़ा जो उसकी टांगों से होता हुआ फर्श पर गिरने लगा।

एक के बाद एक उसके शरीर ने झटके खाते हुए रस की कई पिचकारी उसकी चूत से निकाल दी।

नीतू वैसे ही अपनी टांगें लटकाए बेड पर पड़ी रही।
इस समय नीतू बेसुध हो गई थी तो मैंने उसको सहारा देकर बेड पर पेट के बल लिटा दिया और खुद उसके पास लेट गया।

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मसाज़ सेक्स कहानी का अगला भाग: मौसी की जेठानी की प्यास बुझाई- 7

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