चचेरे भाई संग चुदाई का सफ़र- 2 (Hot Desi Girls Chudai Kahani )

हॉट देसी गर्ल्स चुदाई कहानी में पढ़ें कि मेरी एक सहेली मेरे भाई से सेक्स का मजा लेना चाहती थी. तो एक दिन मेरा चचेरा भाई आया तो मैंने सहेली को बुलवा लिया.

दोस्तो,
आपने कहानी के पिछले भाग
गांडू के छोटे लंड से चूत मरवा ली
में पढ़ा कि रिया ने हमारी सहेली नेहा के गांडू भाई को बुलाकर मेरी चुदाई करवाई.
उससे चुदवाने के बाद हम तीनों नंगे सोफे पर बैठ गए और इधर उधर की बातें करने लगे.

अब आगे हॉट देसी गर्ल्स चुदाई कहानी:

मेरी चूत से अभी भी थोड़ा थोड़ा पानी निकल रहा था.
मैं रिया की गोद में अपना सिर रख कर लेट गयी और मैंने अपनी टांगों को मोड़ कर आपस में बंद कर लिया.

रिया मेरे बालों में अपनी उंगलियां फिराने लगी.

उसने पूछा- मोना, कैसा लगा इससे चुदवाकर?
मैंने जवाब दिया कि मज़ा तो आया पर अनिल जैसा मजा नहीं आया.

उसने धीरे धीरे मेरे निप्पलों को अपनी उंगलियों से कुरेदते हुए कहा- हां, बड़े लंड का अपना ही मज़ा होता है. जब बड़ा लंड अन्दर जाता है, तभी असली मज़ा आता है. तब भी हर लंड अलग मज़ा देता है. जब तुम भी अलग अलग लंड से चुदवाओगी, तो तुम्हें पता चलेगा.
मैंने कहा- ना बाबा ना … मुझे तो बस अनिल ही काफी है.

उसने मेरे मुँह पर प्यार से थप्पड़ मारते हुए कहा- साली, कल तक भी यही कह रही थी और आज इससे चुदवा कर भी यही कह रही है?
ये कहते हुए वो मेरे दोनों निप्पल पर थूक लगा कर मसलने लगी जिससे निप्पल एकदम खड़े हो गए.

मेरे दोनों खड़े निप्पल को रिया ने उंगलियों से पकड़ा और मेरी आंखों में देखती हुई बोली- मोना, तुम्हारे अन्दर सेक्स की बहुत आग है. देखो थोड़ा सा टच करने से ही तुम्हारे निप्पल खड़े हो गए, तुम्हें तो हर रोज़ लंड चाहिए.

मैंने लेटे लेटे आह भर कर कहा- हां यार, अनिल से चुदवाने के बाद दिल करता है कि उसका लंड हमेशा मेरे पास हो.
रिया ने मेरी कमर और चूतड़ों पर हाथ घुमाते हुए कहा- ये बात है तो मुझे भी अनिल के लंड से एक बार चुदवा दे न!

मैं उठकर खड़ी हो गयी और रिया को उठाकर उससे लिपटकर चूमने लगी.
उसके होंठ मेरे होंठों में थे और हमारे हाथ एक दूसरे के बदन से खेल रहे थे.

मैंने रिया के कान में कहा- रिया, रवि से एक बार और करवा यार!

रिया ने खड़े खड़े मेरी दोबारा बहती हुई चूत में उंगली डालते हुए कहा- उसको छोड़ … उसका अब इतनी जल्दी खड़ा नहीं होगा. मैं ही तुझे मज़ा देती हूं.

ये बोलते हुए उसने मुझे नीचे ज़मीन पर लिटा लिया और मेरे मुँह पर अपनी चूत रखकर मेरी चूत चाटने लगी.
रवि भी हम दोनों को देख रहा था.

हम दोनों न जाने कितनी देर तक एक दूसरे की चूत को चाटती रहीं और चूत के दाने को मसलती रहीं.
कुछ देर ये सब करने के बाद हम दोनों की चूत ने पानी छोड़ दिया.

पापा कसम, मुझे बहुत आराम मिला था, मेरा बदन बहुत हल्का हो गया था.

उधर शाम के पांच बज चुके थे.
कुछ देर बाद हम तीनों तैयार होकर रिया की कार से बाहर घूमने निकल गए.

रास्ते में हमने रवि को उसके घर छोड़कर नेहा और शबनम को ले लिया.
दस बजे तक घूमने के बाद मैं और रिया उनको उनके घर छोड़कर रिया के घर आ गईं.

कुछ दिन बाद हम लोगों की सर्दियों की पंद्रह दिन की छुट्टियां शुरू हो गईं.

जैसे कि अनिल और मैंने प्लान बनाया था कि अनिल छुट्टियों में चंडीगढ़ हमारे पास आएगा क्योंकि हमारे घर में मम्मी पापा ज्यादातर दिन में काम पर होते थे.
बहुत बार उनको दो तीन दिन के लिए भी बाहर जाना पड़ता था, तो हम बहुत मज़ा कर सकते थे.

अनिल ने अपने मम्मी पापा से बात करके यहां आने का फाइनल कर लिया.

पहली छुट्टी वाले दिन ही अनिल शाम को हमारे घर पहुंच गया.
घर में मम्मी और मैं ही थे.

अनिल ने आते ही मम्मी को हग किया क्योंकि अनिल मम्मी को हमेशा हग करके मिलता था.
उनसे मिलने के बाद वो मुझसे बोला- कैसी हो मोना?

मैंने कहा- भइया, मम्मी से हग और मुझे सिर्फ कैसी हो?
वो बोला- तुम सड़ियल से कौन हग करेगा?

मैंने गुस्से से उसकी पीठ पर एक मुक्का मारा, तो उसने मुझे कसके अपनी बांहों में लेकर हग किया.
मम्मी हम दोनों को देखकर हंस रही थीं.

वो बोलीं- अनिल, तुम लोग इतना झगड़ा करते हो, फिर भी कितना प्यार है तुम दोनों में!
ये कहकर वो फिर से बोलीं- तुम यहीं हमारे पास रह जाओ. मोना को भी भाई मिल जाएगा.

अनिल ने जबाब दिया- हां जी चाची, भाई बहन तो होने चाहिये, बाकी अभी तो मैं यहीं इस बंदरिया के पास हूं.
यह कह कर उसने मेरी नाक को खींच दिया.

यूं ही रात हो गयी.
रात को हम लोग फिर से फ़िल्म देखने के बहाने एक कमरे में सोए, जहां हम दोनों ने दो बार जमकर चुदाई की.

रिया को पता था कि अनिल आने वाला है.
अगले दिन रिया ने मुझसे पूछा कि रात कैसी रही?
तो मैंने उसको सब बताया.

रिया ने मुझसे कहा- यार मोना, एक बार अनिल से चुदाई करवा दे.
तो मैंने उससे कहा- ठीक है, पर कैसे?
उसने बोला- जब कोई तुम्हारे घर पर ना हो, तो मुझे बता देना या हमारे घर कोई ना हुआ तो तुम लोग हमारे घर आ जाना.

दो दिन बाद मेरे मम्मी पापा को किसी काम के लिए मुंबई जाना था.
तो मैंने रिया को बताया.

रिया ने अपनी मम्मी से ये कहकर परमिशन ले ली कि मोना घर पर अकेली है, मैं दो दिन उसके घर रुकूँगी.

अगले दिन शाम को मम्मी पापा के जाने के बाद मैं रिया को उसके घर से ले आयी.

रिया के आने के बाद पता नहीं अनिल क्यों, कुछ ज्यादा ही खुश लग रहा था.
जहां पहले वो उसके आने से असहज हो जाता था पर आज उसके उलट वो खुश था.

अनिल ने मुझे एक बार भी ये नहीं कहा कि रिया को क्यों बुला रही हो.
मुझे ये बात थोड़ी अजीब तो लगी पर मैंने ज्यादा ध्यान नहीं दिया.

रात को आठ बजे हमारी खाना बनाने वाली आंटी खाना बनाने आईं.
मैंने उनको खाना बनाकर रखने का बोल दिया.

उनके जाने के बाद हम तीनों हॉल में आकर बैठ गए और बातें करने लगे.

कुछ देर बाद अनिल उठा और पापा के बार में से अपने लिए व्हिस्की का पैग बनाकर ले आया.
उसने मुझसे भी ड्रिंक का पूछा पर मैंने कभी नहीं किया था तो मना कर दिया.

रिया ने कहा कि वो बियर पी लेगी.
अनिल उसके लिए बियर की बोतल गिलास और कुछ नमकीन ले आया.

वो दोनों बैठ कर पीने लगे और अपने दोस्तों की, स्कूल की और घूमने की बातें करने लगे.

मुझे थोड़ा अलग सा महसूस हुआ तो मैंने अनिल से कहा- यार, मुझे भी पीनी है.
अनिल ने मुझे बियर देनी चाही तो मैंने कहा- नहीं, जो तुम पी रहे हो … वो दो.

अनिल ने गिलास में थोड़ी सी व्हिस्की और कोल्डड्रिंक डाल कर मुझे दे दी.
मैंने एक घूंट पी.

कोल्डड्रिंक से उसका स्वाद कड़वा तो नहीं था, पर कुछ अजीब सा लगा.
फिर मैंने नाक बंद करके एक घूंट में पूरा गिलास पी लिया.

तब तक रिया बियर की आधी बोतल पी चुकी थी.

वो ये बोलकर कि मोना मुझे थोड़ी देर लेटना है, उठ कर मेरे कमरे में चली गयी.
उसके जाते ही अनिल ने मुझे पकड़ कर अपनी गोद में बिठा लिया.

उसने शॉर्ट्स पहना हुआ था, मैंने पजामा और टॉप.
उसकी गोद में बैठते ही उसका लंड मेरी गांड में चुभने लगा.
मेरे चूतड़ों में उसके लंड का अहसास मुझे बहुत अच्छा लग रहा था.

तभी अनिल ने व्हिस्की के गिलास में अपनी उंगलियां डालकर मेरे होंठों पर व्हिस्की लगायी और मेरे होंठों को अपने होंठों में लेकर चूसने लगा.

मेरे होंठों को चूसते चूसते उसने अपने दोनों हाथ मेरे टॉप में डाल दिए और मेरे बूब्स से खेलने लगा.
जैसे ही उसने मेरा टॉप उतारना चाहा, मैंने उसको रोका और कहा- जान, घर में रिया है, वो ना आ जाए?

अनिल यह सुनकर बोला- आती है तो आने दो … वो भी देख लेगी चुदाई क्या होती है!
मैंने उसको मनाने की कोशिश की, पर वो माना ही नहीं.

मुझे भी चुदास चढ़ रही थी तो मैंने भी मूड बनाते हुए उससे कहा- रुको, मैं देखकर आती हूँ कि रिया क्या कर रही है?
मैंने कमरे में जाकर देखा तो रिया आंखें बंद करके लेटी हुई थी.

मुझे लगा वो सो रही है तो मैं वापिस आकर अनिल की गोद में बैठ गयी.
मैंने उसको बताया कि वो सो गयी है.

अनिल ने मेरा टॉप उतार कर मेरे दोनों बूब्स बाहर निकाल लिए और उनको दोनों हाथों से मसलते हुए मेरी पीठ और गर्दन पर चूमने लगा.
फिर उसने मुझे उठा कर मेरा पजामा पकड़ कर उतार दिया और अपना शॉर्ट्स उतार कर सोफे पर बैठ गया.

अनिल ने मुझे कमर से पकड़ कर अपनी गोद में इस तरह बिठाया कि मेरे दोनों पैर उसकी कमर में थे और मेरी चूत के होंठों में अनिल का पूरा खड़ा लंड फंसा था.
हम दोनों का चेहरा आमने सामने था.

अनिल ने हाथ से मेरी गर्दन पकड़ कर मेरे होंठों को अपने होंठों में कैद कर लिया और कसकर चूसने लगा.
उसका दूसरा हाथ मेरी चूत के दाने को रगड़ रहा था.

मैं तड़फ रही थी, पर कुछ भी बोल नहीं पा रही थी.
मेरे मुँह से सिर्फ घुं घुं की आवाज़ें आ रही थीं.

तभी अनिल को पता नहीं क्या सूझा, उसने मुझे एक झटके से उठा कर सामने टेबल पर रखा व्हिस्की का गिलास उठा लिया.

थोड़ी सी पीकर उसमें अपना लंड डाल दिया और मुझे इशारे से लंड चूसने का बोला.
मैंने उसके सख्त लंड को हाथ से पकड़ कर मुँह में भर लिया और चूसने लगी.

अनिल बार बार लंड को गिलास में डालकर व्हिस्की से गीला करता और मुझसे चुसवाता.
मुझे बहुत मज़ा आ रहा था. मेरे हाथों में उसका पूरा सख्त लंड था, जिसपे नसें उभरी हुई थीं.
लंड की कठोरता को अपने हाथों में महसूस करते हुए मेरी चूत बह रही थी.

तभी अनिल मुझे घोड़ी बनाकर मेरे पीछे आ गया और लंड का मोटा टोपा मेरी चूत पर घिसने लगा.
घिसते घिसते उसने एक झटका मारा और पूरा लंड मेरी बच्चेदानी की जड़ तक पेल दिया.

इस अचानक हमले से मेरी चीख निकल गयी.

अब अनिल अपने लंड को अन्दर बाहर करने ही वाला था कि मुझे ऐसा लगा जैसे किसी ने लंड हाथ से पकड़ कर बाहर निकाल दिया हो.

जब तक मैं कुछ समझ पाती कि रिया की आवाज़ आयी- बेचारी की इतनी छोटी सी चूत … इस मूसल से फ़ाड़ोगे क्या?
मैंने मुड़कर देखा तो अनिल का लंड रिया के हाथ में था.

अनिल ने एक हाथ से रिया की गर्दन पकड़ते हुए उसकी शॉर्ट्स के ऊपर से चूत को अपनी हथेली में लेते हुए कहा- साली रंडी, तेरी चूत तो छोटी नहीं है ना … आ जा तेरी चूत में डाल दूं.
रिया ने सिसकारते हुए कहा- आह डाल दो ना … मैं तो कब से इसको लेने के लिए तड़फ रही हूं.

उसने नीचे बैठकर अनिल का लंड अपने मुँह में भर लिया.

मैं चुपचाप बैठ कर ये सब देख रही थी.

रिया ने मुझे इशारे से पास बुलाया.
तो मैं भी अनिल का लंड चूसने लगी.

रिया के मुँह में अनिल का लंड था और मैं उसकी बॉल्स को मुँह में लेकर चूस रही थी.

कुछ देर बाद रिया लंड छोड़कर नंगी हो गयी और बियर को गिलास में डालकर ले आयी.
फिर वो अनिल के लंड को बियर में बार बार डुबो कर चूसने लगी और साथ में बियर पीने लगी.

फिर रिया ने बियर की बोतल उठायी और अपने बूब्स पर गिराकर अनिल के लंड को दोनों बूब्स में डालकर आगे पीछे करने लगी.
अनिल से जब रहा नहीं गया तो उसने रिया को वहीं ज़मीन के मैट पर लिटा लिया और उसकी गांड के नीचे दो कुशन रख कर उसकी टांगें अपने कंधों पर रख लीं.

पोजीशन सैट होते ही उसने लंड को रिया की चूत के छेद पर सैट करके उसके कंधे पकड़ लिए.
मैं पास में बैठी देख रही थी.

जैसे ही अनिल ने लंड को अन्दर डालना चाहा, रिया ने अपनी कमर हिला दी.
इससे लंड फिसल गया और रिया ज़ोर से हंसने लगी.

रिया की इस हरकत से अनिल को शायद गुस्सा आ गया था.
उसने रिया के एक बूब पर ज़ोर से थप्पड़ मारा तो रिया दर्द से सिसकार उठी और उसका उरोज एकदम लाल हो गया.

पर रिया ने दर्द को काबू करती हुई अनिल के बालों में दोनों हाथ डालकर उसके चेहरे को चूमती हुई बोली- जान, मैं चाहती हूं कि तुम्हारी बहन तुम्हारे लंड को अपने हाथ से मेरी चूत में डाले.

मैंने ये सुनते ही अनिल का लंड पकड़ लिया और उसको मुँह में लेकर थूक से गीला कर दिया.
फिर झट से रिया की चूत के छेद पर रख कर अनिल से कहा- अब डालो.

अनिल ने एक झटका मारा और आधा लंड रिया की चूत में डाल दिया.
फिर एक दो बार लंड को हिला कर सैट किया और एक और झटके से बाकी बचा लंड भी उसकी चूत में उतार दिया.

लंड पूरा अन्दर जाते ही रिया ने सिसकी लेते हुए कहा- ओह मम्मी … मर गयी … कितना बड़ा लंड है तुम्हारा!
अनिल धीरे धीरे लंड अन्दर बाहर करने लगा.

रिया भी मस्त हो गई और नीचे से कमर उठा उठा चुदवाने लगी.
मैं पास बैठी रिया की चूत में लंड अन्दर बाहर होता देख रही थी.

अनिल का काला लंड रिया की गुलाबी चूत के अन्दर बाहर होता बहुत सुंदर लग रहा था.

जब अनिल लंड बाहर को निकालता तो रिया की चूत की अन्दर वाली गुलाबी चमड़ी लंड के साथ बाहर को आ जाती … और जब अन्दर डालता, तो चूत अन्दर को धंस रही थी.
मुझे ऐसे लग रहा था, जैसे लंड मेरी चूत के अन्दर बाहर हो रहा हो.

तभी अनिल ने लंड बाहर खींच कर मेरे मुँह में डाल दिया जिसे मैं मस्ती से चूसने लगी.
फिर अनिल खुद नीचे लेट गया और लंड को हाथ से पकड़ कर रिया को ऊपर बैठने का इशारा किया.

रिया ने अपनी बहती चूत को लंड पर रख दिया और थोड़ा सा दबाब देकर लंड का सुपारा अन्दर ले लिया.
फिर अनिल ने उसकी कमर कसकर पकड़ ली और नीचे से झटका मार कर लंड उसकी चूत की झड़ तक पेल दिया.

रिया का बदन एक बार तो अकड़ गया.
पर थोड़ी देर में वो अनिल के झटकों का जबाब देने लगी और चिल्ला चिल्ला कर बोलने लगी ‘आह चोदो … मुझे बहुत मज़ा आ रहा है.’

काफी देर की चुदाई के बाद रिया ने अपनी टांगें ऐसे सिकोड़ लीं, जैसे वो लंड को चूत में समा लेना चाह रही हो.

बस अब रिया झटके मार मार झड़ने लगी.
वो अनिल के बदन पर लुढ़क गई.

अनिल समझ गया था कि रिया की चूत पानी छोड़ चुकी है.
इसलिए उसने रिया के दोनों चूतड़ों को कसकर पकड़े और नीचे से ताबड़तोड़ झटके मारने लगा.

दो तीन मिनट की चुदाई के बाद अनिल ने रिया को कसके पकड़ा और उसकी चूत में अपनी गर्मी उड़ेल दी.

दोनों कितनी देर ऐसे ही लेटे रहे.

मैं उन दोनों के पास बैठी उनको देख रही थी.

रिया की चूत में अनिल का लंड बहुत सुंदर लग रहा था. उस पर सफेद सफेद मलाई जैसा पानी लगा हुआ था.

मैंने उठकर लंड को पकड़ा और बाहर निकाल कर अपने मुँह में भर कर चूसने लगी.

दोनों के कामरस से भीगे लंड का पहली बार टेस्ट मुझे बहुत अच्छा लगा और मैं भी अपनी चूत में उंगली करते हुए झड़ गयी.

दोस्तो, हॉट देसी गर्ल्स चुदाई कहानी के इस भाग में इतना ही!
आगे की कहानी मैं आपको अगले हिस्से में बताऊंगी. आप मुझे मेल करके जरूर बताएं कि आपको सेक्स कहानी कैसी लगी.
[email protected]

हॉट देसी गर्ल्स चुदाई कहानी का अगला भाग: चचेरे भाई संग चुदाई का सफ़र- 3

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