दीदी के घर में दो चूत चोदी (Porn Family Fuck Story)

पोर्न फॅमिली फक स्टोरी में मैंने पहले अपनी दीदी की चुदाई की उन्हीं के घर में! फिर मौक़ा पाकर दीदी की जेठानी ने मुझे पकड़ कर मेरे लंड को अपनी चूत में लिया.

नमस्कार प्यारे दोस्तो, कैसे हो आप सब. मैं अपेक्षा करता हूँ कि आपको मेरी सच्ची सेक्स कहानी
तीन नंगी लड़कियों के साथ सेक्स का मजा
पसंद आई होगी.

अब आगे पोर्न फॅमिली फक स्टोरी:

बुआ, तृषा और निशा के साथ एक हफ्ते तक मौज मस्ती करने के बाद मैं दीदी की ससुराल वापस आ गया.

जिस दिन मैं सुबह के दस बजे पहुंचा, उसी दिन शाम के आठ बजे की मेरी ट्रेन थी.

मैं जब दीदी की ससुराल पहुंचा तो वहां कोई नहीं था, सब किसी पूजा में गए थे.
सिर्फ़ पूनम दीदी अकेली थीं.

दीदी- अभी याद आई अपनी दीदी की तुझे?
मैं- ऐसी बात नहीं है, मैं हर समय तुमको ही याद कर रहा था.

दीदी- बहुत एंजाय किया वहां तूने? किसके साथ ज़्यादा मजा किया? तृषा के साथ या निशा के साथ?
मैं- बुआ के साथ.

मेरा उत्तर सुन कर दीदी एकदम आश्चर्यचकित रह गईं- काय संगते, खरा खरा सांग मला? (क्या चल रहा है? साफ़ साफ़ बता.)
मैं- मी तुझसे कषाला खोता बोलनार? (मैं आपसे झूठ क्यों बोलूंगा?)
दीदी- खरा बुआ लाई चावत आहे का? (सच में बुआ से किया)

मैं- क्या करेगी, वो फूफा जी पूरा टाइम बिजनेस ओर पैसे के पीछे रहते हैं. मैं एक हफ्ते उनके घर था और आज तक उनके दर्शन नहीं हुए.
दीदी- और क्या क्या किया?

मैं- तृषा और निशा को भी बहुत चोदा और उनकी फ्रेंड्स को भी बहुत चोदा.
दीदी- तुझे मेरी याद नहीं आई?

मैं- दीदी तृषा की एक फ्रेंड थी नीतू … उसकी बर्थडे में मैं ओर तृषा गए थे. वहां उसकी एक कज़िन मिली तान्या. दीदी उसकी गांड देख कर मुझे आपकी गांड की याद आ गई और मेरा लंड एकदम खड़ा हो गया था. उसको चोदते समय मुझे ऐसा फील हो रहा था कि जैसे मैं आपको चोद रहा हूँ. लेकिन हां आपके जैसे बूब्स उनमें से किसी के नहीं थे. निशा के बूब्स भी अच्छे थे लेकिन आपके बूब्स जैसी बात नहीं थी.

दीदी से यही सब बातें करते करते मेरे लिए चाय और नाश्ता भी आ गया.

नौकर को दीदी ने बोला कि नाश्ता मेरे बेडरूम में लगा दो. हम दोनों भाई बहन वहीं साथ बैठ कर नाश्ता करेंगे और ढेर सारी बातें भी करेंगे.
नौकर- जी बीबीजी.

मैं समझ गया कि दीदी को मेरा लंड चाहिए.

दीदी- चल मेरे बेडरूम में बैठ कर बातें करते हैं और वहीं नाश्ता भी करते हैं.
मैं- ओके दीदी, घर के बाकी सब लोग कहां हैं?

दीदी- पिताजी के हॉस्पिटल से आने के बाद सासू मां ने एक महापूजा रखी है गांव के बड़े मंदिर में. सब उधर गए हैं.

मैं- आप नहीं गईं?
दीदी- तू जो आने वाला था और फिर मैंने पीरियड्स का बहाना दे दिया था.

दीदी ने घर के नौकर को आवाज़ लगाई और उससे कहा- तुम ड्राइवर के साथ जाकर मार्केट से कुछ सब्जी और फल ले आओ.
नौकर- जी, अच्छा बीबीजी.

मैं- ये कोई नया नौकर लगता है.
दीदी- नहीं, ये बहुत पुराना है. तू जब आया था, तब ये गांव गया था. सासू मां का बहुत ख़ास है.

दीदी ने जाकर मेन डोर लॉक किया और पूरे घर का एक चक्कर लगाया.
उस समय दीदी ने लाइट ब्लू कलर की साड़ी पहनी हुई थी और उसके नीच नेवी ब्लू कलर का लो-कट ब्लाउज पहना था, वो उनकी पीठ की तरफ से भी काफ़ी खुला था.

दीदी अपने बेडरूम में आईं और सीधे मेरी गोद में बैठ गईं.
हम दोनों एक दूसरे के होंठों को चूसने चूमने लगे.

कुछ समय बाद दीदी ने कहा- तू पहले नाश्ता कर ले, तुझे भूख लगी होगी.
मैं- नहीं, पहले छोटे भाई की भूख मिटा दूँ फिर अपनी भूख के बारे में सोचूँगा.

इतना बोल कर मैंने दीदी को खड़ा किया और उनकी साड़ी को उनके कंधे से सरका दिया.
दीदी का पल्लू सरकते ही उनके 34 इंच के दूध आधे से अधिक ब्लाउज से बाहर झांकते हुए मेरे सामने थे.

मैंने दीदी के एक दूध को ब्लाउज से बाहर निकाला और उसे चूसने लगा.
दीदी भी मीठी सीत्कार करने लगीं और अपना हाथ मेरे सिर में घुमाने लगीं- आंह चूस ले इसे … और चूस … तेरे जाने के बाद मैं तेरे इस स्पर्श को पल पल याद करूंगी.

उनकी बात को सुन कर मेरे अन्दर और जोश आ गया और मैंने अपने एक हाथ से दीदी के ब्लाउज की डोरी को खोल दिया.

अगले कुछ ही पलों में दीदी की ब्रा और ब्लाउज दोनों ज़मीन पर थे.
मैं दीदी के मम्मों को पूरी तन्मयता से चूस रहा था.

फिर मैंने दीदी की साड़ी को उनकी कमर से निकाल दिया और बिना टाइम खराब किए दीदी के पेटीकोट का नाड़ा भी खोल दिया.

दीदी ने अन्दर पैंटी नहीं पहनी थी और उनकी चूत एकदम साफ़ थी.
दीदी ने भी मेरी टी-शर्ट और पैंट दोनों उतार दिए. अंडरवियर में खड़े मेरे लंड को झट से निकाल कर चूसने लगीं.

मैंने दीदी को अपने लंड से दूर किया और उन्हें अपनी बांहों में उठा कर बेड पर लिटा दिया.
हम दोनों 69 की पोजीशन में एक दूसरे के गुप्त अंगों का रसपान करने लगे थे.

दीदी की चूत की फांकों को खोल कर मैं उनके अन्दर की सुगंध लेने लगा.
मैंने एक लंबी सांस ली और धीरे धीरे अपनी जीभ दीदी की चूत में डालने लगा.

दीदी अपनी चूत उछाल उछाल कर मेरे मुँह में घुसाने का प्रयास कर रही थीं.

कुछ समय तक मैं दीदी की चूत चाटता रहा था जिसका नतीजा कुछ पलों में सामने आ गया.
दीदी ने बहुत जोर से मेरा सिर अपनी चूत पर दबाना शुरू किया और मैं तुरंत समझ गया कि अब दीदी झड़ने वाली हैं.

मैंने चूत का रसपान करना लगातार जारी रखा और उनकी चूत का सारा रस बाहर निकलते ही पीता चला गया.
दीदी के छूट जाने के बाद मैंने अपने लंड का सुपारा उनकी चूत के मुँह पर रखा और एक ज़ोरदार धक्के के साथ चूत में अन्दर पेल दिया.

दीदी थोड़ी सी कसमसाईं पर सम्भल गईं और नीचे से अपनी गांड उठा उठा कर मेरा साथ देने लगीं.
मैं भी बड़े ध्यान से दीदी की चुदाई कर रहा था.

कुछ मिनट बाद मेरा लंड कड़क होना शुरू हो गया.

दीदी- सैम, अभी नहीं … थोड़े समय के लिए रुक जा. हम दोनों को एक साथ झड़ना है.
मैं- चिंता मत करो दीदी, अभी दो से तीन मिनट बाकी हैं.

मैंने अपनी चोदने की स्पीड को लगातार जारी रखा और दो मिनट बाद मैंने अपनी स्पीड डबल कर दी.
उसी समय दीदी की चूत भी अकड़ने लगी और कुछ ही पलों में हम दोनों एक साथ झड़ गए.

कुछ समय तक झड़ने के बाद मैं और दीदी उसी पोजीशन में पड़े रहे.
फिर मैंने अपना लंड दीदी की चूत से बाहर निकाला और उनके मुँह में दे दिया.

दीदी ने मेरा लंड चाट कर साफ़ कर दिया.
हम दोनों ने अपने अपने कपड़े पहने और दीदी किचन में चाय गर्म करने चली गईं.

उसी वक्त घर की डोरबेल बजी.

दीदी ने झट से दरवाजे को खोला तो सामने नौकर और ड्राइवर थे.
वो दोनों घर का सारा सामान लेकर आ गए थे.

नौकर- अरे बीबीजी, अभी तक आप लोगों का नाश्ता नहीं हुआ?
मैं- अरे तेरी बीबीजी की तो बातें सुन कर ही पेट भर गया है.

नौकर- बाबूजी, अब तो नाश्ता कर लो!
मैं- अरे तेरी बीबीजी खाने दे तब ना.

नौकर- ओह … मैं आपके लिए चाय लेकर आता हूँ.
मैं- दीदी कहां गईं?

नौकर- वो चाय को स्टोव पर रख कर वॉशरूम गयी हैं.
मैं- यार ज़रा जल्दी से चाय दे दे.

कुछ समय बाद दीदी बेडरूम मैं आईं और मुझसे बोलीं- तू गेस्ट बेडरूम को बंद कर के सो जा, शाम में तेरी ट्रेन भी है.
मैं- हां दीदी.

मैंने अपना बैग लिया और गेस्ट रूम में सोने चला गया.
मैंने सोने से पहले गर्म पानी से शॉवर लिया और दरवाजा बंद करके सो गया.

सोते समय मैंने अपनी घड़ी में टाइम देखा तो साढ़े बारह बज रहे थे.
मैंने बेडरूम के दरवाजे को सिर्फ़ अन्दर से बंद कर दिया था, लॉक नहीं किया था.

शाम के साढ़े चार बजे मेरी आंख खुली तो मैं सीधा वॉशरूम में गया और चेंज करके दीदी के रूम में गया.
वहां दीदी नहीं थीं.

मैंने नौकर से पूछा तो उसने बताया कि सब नीचे हॉल में हैं.

मैं जींस और टी-शर्ट पहन कर हॉल में गया.

जब हॉल में पहुंचा तो दीदी के और उनकी सासू मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया.
मुझे दीदी की सासू मां ने अपने बाजू की सीट ऑफर की.

दीदी की सासू मां- कबकी ट्रेन है तुम्हारी?
मैं- जी, नौ बजे की है.

सासू मां- टिकट कन्फर्म हो गयी है?
मैं- जी हां!

सासू मां- सेकंड एसी में है या थर्ड एसी है?
मैं- नहीं आंटी, मेरी टिकट नॉन एसी की कन्फर्म हुई है.

सासू मां- अच्छा, हमारी शिवानी (दीदी की ननद) भी इसी ट्रेन से जा रही है.
दीदी- हां मां जी.

सासू मां- तुम ज़रा उसका ध्यान रखना.
मैं- जी!

हम तीनों बैठे चाय पी रहे थे कि ऊपर से प्रेरणा और शिवानी सीड़ियों से नीचे आने लगीं.
प्रेरणा दीदी की जेठानी है जो मुझसे पहले चुद चुकी थी.

शिवानी ने उस समय एक वन-पीस पहना हुआ था, जो उसके घुटनों से सिर्फ़ दो तीन इंच नीचे था.

सासू मां- इस ड्रेस में तू ससुराल जाएगी?
शिवानी- अरे नहीं मां, स्टेशन आने से पहले चेंज करके साड़ी पहन लूँगी. वैसे ये ड्रेस कल ही मार्केट से लेकर पूनम दीदी ने गिफ्ट किया है.

सासू मां- ये ड्रेस तुझ पर बहुत अच्छा लग रहा है. परी लग रही है मेरी लाडो.
शिवानी- मां सब के सामने तो लाडो ना बोला करो.
सासू मां- अरे यहां कौन पराया है?

शिवानी मेरी ओर देखने लगी.

सासू मां- अरे ये तो पूनम का छोटा भाई है … समर्थ.
शिवानी- ओह … मैं तो इससे पहचानी ही नहीं.
मैं- नमस्ते जी.

प्रेरणा- अरे सिर्फ़ नमस्ते कर रहे हो? उठ कर पैर छुओ और आशीर्वाद लो.
दीदी- नहीं नहीं … शिवानी और सैम दोनों हम उम्र हैं.
सासू मां- हां पूनम सही कह रही है.

मैं- मैं अपना सामान नीचे लेकर आता हूँ.
प्रेरणा- चलो, मैं भी तुम्हारी थोड़ी मदद कर देती हूँ.

हम दोनों ऊपर मेरे कमरे में पहुंचे, तो प्रेरणा ने मुझे दीवार से सटा दिया और अपने होंठों को मेरे तपते हुए होंठों पर रख दिए और मेरी पैंट की चैन खोलने का प्रयास करने लगी.

मैंने भी ब्लाउज में से उसके मम्मों को निकाला और चूसने लगा.
प्रेरणा ने उस समय साड़ी पहनी हुई थी.

मैंने उसका पेटीकोट ऊपर करके उसकी पैंटी को नीचे किया और अपना लंड बाहर निकाल कर उसे अपनी गोद में उठा कर लंड पेल दिया.
मैं उसे चोदने लगा.

कुछ समय बाद दीदी ने आवाज़ लगाई- क्या हुआ … कहां रह गए?
मैं- दीदी, मेरा ब्लू ट्रैक सूट नहीं मिल रहा है.

दीदी- अरे वो तो मैंने ऊपर छत पर डाला है.
प्रेरणा- ओके दीदी, मैं ले आती हूँ.

जबकि वो ट्रैक सूट तो ऑलरेडी मेरे बैग में था. दीदी समझ गयी थीं कि काम चालू है.
ये हमारा कोडवर्ड था.

दीदी- ये लड़का हमेशा लास्ट मोमेंट तक अपनी पैकिंग नहीं करता है. अच्छा है प्रेरणा साथ में गयी है वरना कोई काम ढंग से नहीं करता है.

प्रेरणा को मैं चोद ही रहा था कि उस समय दीदी मेरे रूम में आ गईं और चुदाई देख कर बाहर चली गईं.
दीदी और प्रेरणा की नज़रें आपस में मिल चुकी थीं.

दस मिनट बाद मैं और प्रेरणा दोनों एक साथ झड़ गए.
मैंने कुछ समय तक प्रेरणा को अपने सीने से लगाए रखा.

प्रेरणा- सैम, दीदी ने हम दोनों को देख लिया है.
मैं- क्या सच?

प्रेरणा- उन्होंने मुझे देख कर आंख भी मारी और बाहर चली गईं.
मैं- तुम टेंशन मत लो, मैं दीदी से बात करूंगा.

हम दोनों कुछ समय बाद अपने कपड़े सीधे करके नीचे हॉल में पहुंच गए.

उस समय हाल की घड़ी में 7.30 बज रहे थे.
शिवानी ने अपनी मां के पैर छूकर आशीर्वाद लिया और फिर मैंने, दीदी ओर प्रेरणा ने भी आशीर्वाद लिया और सामान लेकर बाहर आ गए.

हम सब गाड़ी में बैठे और स्टेशन की ओर गाड़ी चल पड़ी.
दोस्तो, अब चलती ट्रेन में शिवानी के साथ किस तरह से सेक्स हुआ, वो मैं अपनी अगली सेक्स कहानी में लिखूंगा.
मेरे लंड का नसीब कितना तगड़ा है कि उसे चूत की कमी नहीं होती है.

आपको यह पोर्न फॅमिली फक स्टोरी कैसी लगी? मुझे मेल जरूर करें.
[email protected]

पोर्न फॅमिली फक के बाद की कहानी:

About Abhilasha Bakshi

Check Also

मेरा गुप्त जीवन- 184 (Mera Gupt Jeewan- part 184 Mer Khade Lund Ki Kahani)

This story is part of a series: keyboard_arrow_left मेरा गुप्त जीवन- 183 keyboard_arrow_right मेरा गुप्त …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *