बहन की खातिर उसके मंगेतर से चुद गयी (Hot Sali Ke Sath Sex)

हॉट साली के साथ सेक्स का मजा मैंने दिया अपनी छोटी बहन के होने वाले पति को. उसने मेरे सामने शर्त रखी कि अगर मैं उसे अपना जिस्म दूंगी, तभी वो मेरी बहन से शादी करेगा.

यह कहानी सुनें.

Hot Sali Ke Sath Sex

नमस्कार दोस्तो,

मैं आपकी सखी प्रकृति शांडिल्य, पेश हूं वसुंधरा सीरीज की दूसरी कहानी के साथ।

पहले मैं आपको अपना परिचय दे देती हूं।

मेरा नाम प्रकृति है और मैं लखनऊ की रहने वाली हूं, इस समय एमबीए का कोर्स कर रही हूं और सिर्फ 24 साल की हूं।
जिस्म गोरा, कद 5 फुट 5 इंच और फिगर 32C 28 36 है।

मैं खाली वक्त में शेरो शायरी, कहानियां इत्यादि लिखती हूं।

एक दिन विचार आया कि क्यों न कामुक कथाओं के लेखन में भी हाथ आजमाया जाए!

ये कहानियां मेरे दिल की अन्तर्वासना पर आधारित हैं।

उन्ही को मिलाकर मैंने कुछ शृंखलाएं तैयार की हैं जिनमें से पहली शृंखला वसुंधरा नाम की स्त्री के जीवन पर आधारित है।

यह वसुंधरा सीरीज की कहानी है और मुझे उम्मीद है कि आप इसे खूब पसंद करेंगे। यह कहानी बताएगी कि कैसे वसुंधरा नाम की संभ्रांत स्त्री अपनी भावनाओं और हालातों के चलते अपनी कामवासना की पूर्ति के सफर पर चल पड़ती है।

वसुंधरा की पहली कहानी थी: पति की बेरुखी से मैं फिसल गयी

तो चलिए शुरू करते हैं हॉट साली के साथ सेक्स का मजा!

दोस्तो, मैं वसुंधरा, मेरी उम्र 30 वर्ष और फिगर 34C 30 36 है।
पहले मैं आपको अपनी फैमिली के बारे में बता देती हूं।

शादी से पहले हम चार लोग एक साथ रहते थे, मम्मी पापा, मेरी छोटी बहन रागिनी और मैं!
पापा बैंक मैंनेजर थे और हमारा कोई भाई नहीं था।

मेरी दीदी प्रतिभा की शादी को 12 साल हो चुके थे और अब वो इस दुनिया में नहीं हैं।
उनकी एक 10 साल की बेटी चारु है।

दीदी के जाने के बाद मेरे पापा ने मेरी शादी प्रतिभा दीदी के पति यानि विकास जीजू से करवा दी ताकि चारु को मां का प्यार मिल सके।
मैं चारू से 15 साल बड़ी थी। यानि जब मेरी शादी हुई तो उस वक्त मेरी उम्र 25 साल थी और मैं अपनी जवानी के चरम पर थी।

मेरी शादी को पांच साल हो चुके हैं।

मैं एक प्राइवेट कॉलेज टीचर हूं और रागिनी एक बड़े संस्थान में लेक्चरर है।
अब घर पर रागिनी की शादी की भी बातें चलने लगी थी।
इधर उधर लड़के देखे जाने लगे थे।

मैं शुरुआत से ही कामुक स्वभाव की थी लेकिन रागिनी ऐसी नहीं थी. हम दोनों बहनें सुंदर हैं लेकिन मेरा रूप अलग ही लगता हैं. लोग अक्सर कहते हैं कि जो बात मुझमें है वो रागिनी में नहीं है।
रागिनी पढ़ने में मुझसे अच्छी थी और वो साधारण रहना पसंद करती थी, वहीं दूसरी तरफ मैं एक तड़क भड़क पसंद करने वाली लड़की थी और आजाद ख्यालों की थी।

इस वाकये की शुरुआत तब हुई जब रागिनी के लिए रिश्ता आया था एक डॉक्टर आनन्द ठाकुर का जो कि राजनगर का एक जाना माना डॉक्टर था।

घर वाले इस रिश्ते से काफी खुश थे, सभी ये प्रार्थना कर रहे थे कि यह शादी किसी तरह से हो जाए क्योंकि लड़का अच्छा था और साथ ही कमाई भी अच्छी थी, समाज में एक अच्छा स्थान था।

लड़के वाले वो पहले लड़की देखना चाहते हैं, उसी के बाद शादी की बात आगे बढ़ेगी।
हमने कोई आपत्ति नहीं की क्योंकि हमारा भी मानना था कि इससे उनके बीच अच्छी बॉन्डिंग बन जायेगी।

खैर कुछ दिनों बाद लड़के वाले हमारे घर आए।
आनन्द और उसके मम्मी पापा तीनों हमारे घर आए थे।

मम्मी ने मुझे घर बुला लिया था ताकि दिखाई के समय मैं भी साथ रहूं।

उस दिन रागिनी ने एक गुलाबी सलवार सूट और मैंने लाल साड़ी पहनी थी।
मेरा ब्लाउज स्लीवलेस था और मैंने भी खुद को अच्छे से सजाया था।

आनन्द और उसके मम्मी पापा हमारे घर आए, हमने अच्छे से उनकी आवभगत की।
जब वो लोग मुंह मीठा कर चुके तो रागिनी एक ट्रे में चाय लेकर आई।
रागिनी के साथ मैं भी थी।

आनन्द ने हमारी ओर देखा और हमारी नजरें मिली।
मैं नोटिस कर सकती थी कि आनन्द रागिनी से ज्यादा मुझे देख रहा था।

आनन्द एक हैंडसम नौजवान था, ऐसा कि उसे देखकर कोई भी लड़की पिघल जाए।
उसका लुक बहुत ही जबरदस्त था और मन को मोहने वाला था।

हम दोनों की नजरें मिली और फिर मैंने लजाकर नजरें नीची कर लीं।
दिल के एक कोने में आवाज आई कि काश यह मेरा बॉयफ्रेंड होता तो मेरे अलग ही मजे होते।

दोनों एक दूसरे को देख चुके थे।
नाश्ते के बाद चलने की बारी आई तो फिर हमने उनसे उनकी इच्छा जाननी चाही.
तो आनन्द ने जवाब दिया कि उसे सोचने के लिए कुछ वक्त चाहिए, इसके बाद उन्होंने विदा ली और फिर घर लौट गए।

कुछ दिनों बाद पापा ने उनका मत जानने के लिए उनसे संपर्क किया लेकिन उनका वही जवाब था कि वो अभी कुछ दिन बाद बताएंगे।
इस तरह कुछ दिन और बीत गए।

आखिर उनका जवाब आया कि आनन्द इस रिश्ते से खुश नहीं हैं, उसके पीछे उन्होंने कोई वजह नहीं बताई लेकिन उन्होंने रिश्ते के लिए ना कर दिया।

इस खबर से हमारे घर पर बहुत बुरा असर पड़ा।
सबको लग रहा था कि रिश्ता अच्छा है अगर रागिनी की शादी हो जाए तो उसकी जिंदगी सुधर जायेगी।
मुझे भी बहुत दुख हुआ लेकिन अब क्या ही हो सकता था।

इस तरह कुछ दिन बीत गए।
जैसा कि मैंने आपको बताया था कि मेरे पति एक मल्टी नेशनल कंपनी में काम करते हैं और अक्सर उनको शहर से बाहर ही रहना पड़ता है, इसलिए मुझे ही सारे रिश्ते नाते शादी पार्टी देखनी पड़ती हैं।

हमारे घर एक दोस्त की शादी का निमंत्रण आया था।
क्योंकि मेरे पति विकास यहां नहीं थे इसलिए मैंने अकेले जाने का फैसला किया।
मैं घर पर अपनी बच्ची चारु के साथ रहती थी जो कि उस वक्त छोटी थी।

मैंने एक सेक्सी सी साड़ी और बैकलेस ब्लाउज शादी में जाने के लिए सेलेक्ट किया।
फिर चारु को सहेली के घर छोड़ कर मैं शादी के लिए निकल गई।

शादी की पार्टी में आनन्द भी आया था, उसने मुझे दूर से देखा तो हेलो किया, बदले में मैंने भी उसे हेलो बोल दिया।

फिर वो कोल्ड ड्रिंक लेकर मेरे पास आ गया और हम दोनों बातों में मसरूफ हो गए।
वह मेरे साथ बहुत ही नॉर्मल बर्ताव कर रहा था जैसे कि कुछ हुआ ही न हो।

पार्टी में आए मुझे करीब 3 घंटे हो चुके थे थी और अब मुझे लगा कि मुझे घर चलना चाहिए।

मैंने सबसे विदा ली और घर जाने लगी तो आनन्द ने कहा कि वो मुझे घर छोड़ देगा।
सबने कहा कि मैं आनन्द के साथ ही घर चली जाऊं ये बेहतर रहेगा।

मैंने सोचा कि इसी बहाने मुझे ये भी पता चल जायेगा कि आनन्द ने शादी के लिए मना क्यों किया इसलिए मैंने हां कर दी।
आनन्द ने मुझे कार में बिठाया और फिर हम दोनों घर की तरफ चल पड़े।

रास्ते में हम दोनों बातें करते हुए जा रहे थे।
मैंने आनन्द से पूछा- आनन्द, मुझे तुमसे कुछ पूछना है, तुम्हें बुरा तो नहीं लगेगा?
आनन्द ने कहा- नहीं वसुंधरा, पूछिए आप जो पूछना चाहती हैं।

मैं- तुमने रागिनी से शादी के लिए ना क्यों की?
आनन्द कुछ देर तक चुप रहा और फिर बोला- वसुंधरा देखो, शायद तुम्हें बुरा लगे लेकिन रागिनी मेरे टाइप की नहीं है।

मैं- मैं कुछ समझी नहीं, तुम क्या कहना चाहते हो?
आनन्द- वसुंधरा, मुझे एक ऐसी लड़की चाहिए जो खुले विचारों की हो, जिसके पहनावे में उसकी बोल्डनेस झलके, जो सेक्सी हो और समझदार भी, मुझे माफ करना लेकिन मुझे रागिनी में ये सब बातें नहीं दिखती हैं। मुझे तुम्हारे जैसी लड़की चाहिए वसुंधरा!

मैं- मेरे जैसी? तुम्हें ये क्यों लगता है कि मैं ऐसी हूं?
आनन्द- वो तो मैंने तुम्हें जब पहली दफा देखा था मैं तभी समझ गया था, जिस तरह से तुम चलती हो, बातें करती हो और तुम्हारे कपड़े पहनने का जो स्टाइल है वो कोई सेक्सी औरत ही कर सकती है।

रास्ते में गाड़ी रोक कर आनन्द ने एक रेड वाइन की बोतल खरीदी।
इसी बातचीत में हमारा घर आ गया।

मैं चारु को लेकर अंदर आई और आनन्द को भी अंदर आने के लिए इनवाइट किया।
आनन्द बिना संकोच अंदर आ गया।

मैंने चारु को अंदर सुला दिया और फिर आकर बाहर हॉल में सोफे पे आनन्द के सामने बैठ गई।
आनन्द ने कहा- वसुंधरा, देखो मैं तुमसे कुछ भी छुपाना नहीं चाहता, मैंने तुम्हारी वजह से इस रिश्ते से ना की थी, असल में मुझे रागिनी से ज्यादा तुम पसंद आई हो।

आनन्द ने एक सिगरेट निकालकर जलाई तो मैंने कहा- एक सिगरेट मुझे भी मिलेगी?
वह मुस्कुराया और एक सिगरेट मेरी ओर भी बढ़ा दिया।

आनन्द ने कहा- वसुंधरा, मुझे यही तो चाहिए, एक ऐसी औरत जो लिमिट्स क्रॉस करना जानती हो, जो नखरे न दिखाए बल्कि स्ट्रॉन्ग और सेक्सी हो जैसी की तुम हो।

मैं- अच्छा, क्या सेक्सी दिख गया तुम्हें मुझमें?
आनन्द- तुम तो ऊपर से नीचे तक कमाल हो, तुम्हारे गुलाबी होंठ, तुम्हारे बूब्स, शायद 34c साइज के होंगे, तुम्हारी बलखाती कमर और तुम्हारे आकर्षक नितम्ब, शायद 36 साइज है उनका, हर एक चीज कमाल है तुम्हारे अंदर!

आनन्द ने मेरा साइज बिलकुल सही बताया था, शायद वो कई लड़कियों के कपड़े उतार चुका था इसलिए उसने सही सही बताया था।

मैं बोली- बिलकुल सही साइज बताया है तुमने, लगता है कि कई लड़कियों के साथ सो चुके हो।
आनन्द- हां, कइयों के साथ सोया हूं और आगे भी सोऊंगा. इसीलिए मैंने कहा, मुझे कोई तुम जैसी सेक्सी औरत चाहिए जिसे इन सब चीजों से कोई दिक्कत न हो।

मैं सिगरेट के कश लेते हुए बोली- मैं शादीशुदा हूं आनन्द … और एक बच्ची की मां भी हूं।
आनन्द- डाइवोर्स लेकर मेरे पास आ जाओ, मैं हमेशा तुम्हारा ख्याल रखूंगा।

मैं उसके इस खुलेपन पर हैरान थी- यह मुमकिन नहीं है आनन्द, मैं अपने पति और बच्ची को नहीं छोड़ सकती।
आनन्द- ठीक है मत छोड़ो, लेकिन मेरे साथ सो तो सकती हो ना!

मैं उसकी इस बात पर हैरान थी।
आनन्द हैंडसम जवान था और कहीं न कहीं मेरे दिल में भी ये ख्वाहिश थी कि मैं उसके साथ भी सेक्स करूं।

मैंने कहा- तुम्हारे साथ सोने में मेरा क्या फायदा होगा?
आनन्द- मैं रागिनी से शादी के लिए हां कह दूंगा।

उसकी यह बात मेरे कानों में पड़ी तो मैं अचानक से होश में आई, जैसे मेरी तंद्रा टूटी हो।
आनन्द की बात से मेरे तन बदन में लहर सी दौड़ गई।

मेरे सामने मेरी मां के आंसू आ गए जो उन्होंने रिश्ता टूटने पर बहाए थे।
मैंने भी सोचा कि अगर डॉक्टर आनन्द रागिनी से शादी कर ले तो हमारे सारे दुख खत्म हो जाएंगे।

कुछ वाइन का नशा भी था और कुछ मेरी हवस भी, कहीं न कहीं मैं भी अपने जिस्म को आनन्द के तले परोसना चाहती थी।
आनन्द की यह अदा मुझे दिल तक भा गई, दिल तो किया कि काश यह मेरा पति होता लेकिन अभी भी बाजी मेरे हाथ में थी।

मैंने कहा- अपने वादे से मुकर तो नहीं जाओगे?
आनन्द- हम ठाकुर हैं वसुंधरा, अगर वचन दे दिया तो दे दिया।

मुझे आनन्द की आंखों में सच्चाई और अपने लिए प्यार उमड़ता दिखाई दे रहा था।

मैंने कहा- ठीक है, यकीन कर रही हूं तुम्हारा ठाकुर साहब, लेकिन एक गुजारिश है, मेरी बहन का ख्याल ताउम्र रखना!
आनन्द- वसुंधरा, हम उन मर्दों में नहीं है जो औरत पर हाथ उठाने में अपनी शान समझते हैं। हम तुम्हारी बहन को रानी की तरह रखेंगे, यह हमारा वादा है।

उसकी बात सुनकर मैं उठकर बेडरूम में चली गई और फिर अपने जेवर और कपड़े उतार दिए और फिर मेकअप भी हटा दिया।

फिर मैंने हाई हील्स के सैंडल पहने और मटकते हुए हॉल की तरफ चल दी और मैं नग्नावस्था में ही आनन्द के सामने आ गई।
आनन्द तो मुझे देखकर मंत्रमुग्ध सा हो गया।

मैंने एक ग्लास में वाइन निकाली और आनन्द को पेश की और फिर आनन्द के सामने खड़ी हो गई।
आनन्द ने वाइन पी और फिर मुझे पीछे की तरफ घुमा दिया।

आनन्द ने मेरी कमर में हाथ डाल कर मुझे अपने से चिपका लिया।
मेरे नितम्ब आनन्द के बदन से चिपक गए थे और उसकी खुरदरी जींस की रगड़ मुझे अपने मुलायम गद्देदार नितम्बों पर बखूबी महसूस हो रही थी।

आनन्द ने अपना हाथ मेरे पेट पर रख दिया और फिर मेरी नाभि से खेलने लगा.
मुझे उत्तेजना और गुदगुदी एक साथ महसूस हो रही थी।

आनन्द ने मेरे स्तनों को पकड़ लिया और उन्हें मसलने लगा जैसे कोई आम को निचोड़ कर उसका रस निकाल रहा हो।
मैंने अपना सर आनन्द के कंधे से टिका दिया, हाई हील्स की वजह से मेरी लम्बाई अब आनन्द के लगभग बराबर हो गई थी।

आनन्द मेरे कंधे और गर्दन पर चुम्बन करते जा रहां था और उसके हाथ अब मेरे चूचुकों पर आ गए.
उसने उन्हें खींचना और मसलना चालू कर दिया, मेरे स्तन तो गोरे से लाल हो गए थे।

आनन्द ने मेरे कान को चूमना शुरु कर दिया और उसकी लोब को अपने दांतों से काटने लगा।
उसके दांत मेरे कान को तब तक नोचते जब तक मैं जोर से आह न भर देती- आनन्द, उफ्फ … मर गई मैं … आह जीजू … प्लीज ऐसे मत करो।

मैं कामोत्तेजना में भरी थी और आनन्द को जीजू कह कर संबोधित करने लगी थी।

आनन्द ने मेरे गले को पकड़ लिया और कहा- वसुंधरा साहिबा, पहले सुहागरात तो हो जाने दीजिए। आपके जीजू तो हम आपकी बहन से शादी करने के बाद बनेंगे। अभी तो आप अपनी बहन की शादी करवाने का फर्ज निभाइए।

आनन्द ने अब मुझे अपनी तरफ घुमाया।
हिल्स की वजह से मेरे और उनके होंठ आमने सामने आ गए थे और तनिक ही देर में हमारे होंठ एक दूसरे से चिपक गए।

आनन्द मेरी जीभ को चूसते हुए अपना रस मेरे मुंह में डाल रहे थे और उनके हाथ मेरी कमर से होते हुए अब मेरे नितंबों पर आ गए।
मैंने अपनी एक टांग उठा कर आनन्द की कमर पर लपेट दी।

आनन्द ने अपना दाहिना हाथ मेरी जांघ पर रखा और फिर मुझे जकड़ कर बड़ी उत्तेजना से किस करने लगे।
उसने अपनी उंगलियां मेरे नितम्बों पर रख दी और उन्हें सहलाने लगे।

आनन्द एक माहिर खिलाड़ी की तरह मुझे उत्तेजित करते जा रहे थे।
यह पहला मौका था जब मेरे पति के अलावा किसी गैर मर्द ने मेरे जिस्म को इतने पास से, इतने उत्तेजक तरीके से छुआ था।

जब से मैंने उन्हें पहली बार देखा था तभी से मेरे दिल में आनन्द के नीचे आने की तमन्ना घर कर गई थी लेकिन उसका एहसास इतना उत्तेजित करने वाला होगा इसकी उम्मीद मुझे जरा भी नहीं थी।

आनन्द के साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए हां करते समय ही पता था कि अब हम दोनों के बीच किस तरह का रिश्ता जन्म लेने वाला है.
समाज की नजरों में यह पाप था और समाज मुझे बहन की लौड़ी कहता.
आनन्द की नजरों में भी आज के बाद मेरी छवि दो कौड़ी की रंडी वाली होने वाली थी।

लेकिन सारी शर्मोहया भुलाकर मैं वासना की आग में खुद को झोंक चुकी थी।
मैं भी उनको अपनी ओर से पूरा मज़ा देना चाहती थी।

अब आनन्द ने मेरे होंठों को छोड़कर मेरी गर्दन को चूमना शुरु कर दिया और अपने दांतों से मेरे गले को कुरेदने लगे।
कुछ ही देर बाद उन्होंने मुझे अपनी गोद में उठा लिया, मैंने अपनी दोनों टांगों को उनकी कमर पर लपेट दिया और कॉउगर्ल पोजिशन में आ गई।

आनन्द सोफे पे बैठ गए और मैं उनकी गोद में थी।
उन्होंने मेरी कलाइयों को पीछे कर के एक हाथ से पकड़ लिया और दूसरे हाथ से मेरे बालों को पकड़ कर अपने होंठ मेरे सीने पर लगाते हुए मेरे स्तनों को चूमने लगे।

मेरे मुलायम और सफेद स्तन उनके चुम्बन से लाल होने लगे।
मैं मदमस्त मादा की तरह उनको स्तनपान करा रही थी।

मेरे स्तनों को ठीक से निचोड़ लेने के बाद उन्होंने मुझे अपने से अलग कर के जमीन पर बिठा दिया।

मैंने उनके इशारे को समझा और फिर उनकी बेल्ट ढीली करके उनकी पैंट निकाल दी।
तब मैंने उनकी अंडर वियर पर हाथ फेरा तो आनन्द के चेहरे पर एक अलग ही सुख की भावना झलक रही थी।

आनन्द मस्ती में कहने लगे- उम्म्हह वसु, तुम इतनी सेक्सी हो कि दिल करता है कि तुम्हें रोज चोदूं। शादीशुदा औरतों को चोदने में मजा इसीलिए आता है क्योंकि उनको चुदाई में शर्म नहीं आती, बिलकुल रंडी बनकर चुदती हैं वो!

ये कहकर उन्होंने अपनी अंडरवियर निकाल दी।
उनका 7 इंच का लंड मेरी आंखों के सामने आ गया।

मैंने कहा- जीजू, आखिर साली आधी घरवाली होती है, अब इस नाते आप मेरे आधे पति हुए! और पति से क्या शर्माना, वैसे भी आपने मुझे बहन की लौड़ी तो बना ही दिया है।

आनन्द मेरे खुले बालों में अपनी उंगलियाँ फ़िरा रहे थे।

फिर मैं घुटनों के बल उनके सामने बैठ गई और उनके लंड को अपने हाथों में लेकर निहारने लगी।

मैंने मुस्कुरा कर उनकी ओर देखा तो उन्होंने मेरे गालों को सहलाना शुरू कर दिया।
उनके लंड की चमड़ी पीछे की तो उनका गोल सुपारा मेरी आंखों के सामने आ गया।
मैंने उसकी टिप पर अपने होंठ लगा दिये, एक छोटा सा किस लेकर अपने चेहरे के सामने उनके लंड को सहलाने लगी।

उनके लंड को अपने मुँह में लेने की इच्छा तो हो रही थी लेकिन मैं आनन्द को उत्तेजना में तड़पता देखना चाहती थी।
मैं उनके सामने यह नहीं दिखाना चाहती थी कि मैं पहले से ही कितना खेली खाई हुई हूँ।

आनन्द- इसे मुँह में लेकर प्यार करो साली साहिबा! बिना मुंह में जाए ये पूरे जोश में नहीं आता।

मैं पहले जरा सा सकुचाई और फिर उसके लंड को अपना दुलार देने लगी।

असलियत में तो मैं उस लंड को मुँह में लेने के लिये बेकरार थी लेकिन अगर सारी पहल मैं ही करती तो भला मुझमें और बाजारू रंडी में भला क्या फर्क बचता।

मैं अपनी जीभ निकाल कर उनके लंड के टोपे पर फिराने लगी।
आनन्द मेरी जीभ का स्पर्श पाकर वासना की आग में जलने लगा।

आनन्द ने मेरे बाल पकड़ लिए और उनको पोनीटेल बना कर मेरी चोटी अपने काबू में कर ली और फिर मेरे सर पर धक्का लगा कर उसे अपनी लंड की जड़ तक ले जाने लगे।

इस तरह वो अपना जोर लगाकर मेरा मुंह चोद रहे थे।
आनन्द के मन पर अब वासना चढ़ चुकी थी और उनके शब्दों में अब मेरे लिए इज्जत का स्थान गालियों ने ले लिया था।

आनन्द- ठीक से चूस बहन की लौड़ी, दम नहीं है क्या तेरे मुंह में, इतना धीरे धीरे चूसेगी तो एक घंटा तक चूसती ही रहेगी, थोड़ा और अंदर ले ना, इसे अपने गले तक उतार!

मैंने उनके लिंग से मुंह हटाया और कहा- जीजू, मेरा मुंह है कोई चूत नहीं जो आप जितना अंदर तक डालोगे, घुसता चला जायेगा।
आनन्द मेरी भाषा सुनकर हंसने लगे।

बदले में मैं भी मुस्कुरा दी तो उन्होंने कहा- रुक जा लौड़ी, तेरे मुंह की गहराई अभी मैं बढ़ाता हूं।

आनन्द ने मेरी सोफे पे लिटा दिया और इस तरह लिटाया कि मेरा सर सोफे से नीचे लटकने लगा, इस अवस्था में मेरी सांस नली मेरे मुंह के छेद में बिलकुल सीधी थी।

आनन्द मेरे सर के पास खड़े हो गए और अपना लंड मेरे मुंह में घुसा दिया।

उनका लंड सरसरता हुआ मेरे मुंह से होकर मेरे गले में उतर गया।

मेरी तो सांस ही रुक गई थी लेकिन आनन्द ने जल्दी ही उसे बाहर निकाल लिया और फिर कुछ क्षण रुक कर दोबारा अंदर डाला।
उनके इस काम को मैं समझ चुकी थी इसलिए मैंने अपनी सांसें उन्हीं के धक्कों के अनुसार एडजस्ट कर ली।

अब आनन्द के टट्टे मेरे माथे पर टकरा रहे थे और उनका लिंग मेरी श्वासनली में लगातार प्रवेश करता जा रहा था।

मैं इस अहसास को महसूस कर ही रही थी कि आनन्द के हाथ मेरे स्तनों पर आ गए।

आनन्द ने मेरे स्तन को अपनी हथेली में भर लिया और फिर उनको मसलते हुए मेरे मुंह में अपना लिंग ठेलने लगे।
वो पूरे जोर से मेरे स्तनों को नोचते।

उस अहसास से मेरी रीढ़ में एक सनसनी फ़ैल जाती और मैं खुद को ऊपर उठाने का प्रयत्न करती लेकिन उनका लिंग मेरे मुंह में घुसा हुआ मुझे अलग नहीं होने दे रहा था।

यह प्रक्रिया मुझे आनन्द और पीड़ा दोनों दे रही थी इसलिए आनन्द ने कुछ लम्हों के बाद मुझे उठा दिया, मुझे राहत मिली।

आनन्द सोफे पे बैठ गए और मैं उनके सामने नीचे आ गई।
अब आनन्द अपने हाथ से अपना लिंग रगड़ने लगे।

आनन्द- उफ वसुंधरा, तू इतनी सेक्सी निकलेगी मैंने सोचा नहीं था. तू बिलकुल परफेक्ट माल है मेरी लौड़ी बनने के लिए, तेरे साथ सोने के लिए तो रागिनी क्या मैं किसी से भी शादी कर लूंगा, तू बस ऐसे ही मुझे खुश करती रहना।

मैं- ठीक है जीजू, आप जो कहेंगे मैं करूंगी. अब आपने मुझे बहन की लौड़ी बना ही दिया है तो शर्माना कैसा?
आनन्द- ऐसे नही, पहले लौड़ी बनाने की रस्म तो पूरी हो जाए!

मैं उनकी बात को समझी नहीं!
आनन्द खड़े हो गए और उन्होंने मेरी चोटी पकड़ ली और अपने लिंग को जोर जोर से रगड़ने लगे, कुछ ही लम्हों के बाद उनके लिंग से उनके वीर्य का लावा फूट पड़ा।
उन्होंने अपने लिंग का सुपारा मेरी मांग पर सटा दिया और फिर उनके लिंग से निकला वीर्य मेरी मांग में जा भरा।

आनन्द- अब रस्म पूरी हुई … आज से तू मेरी लौड़ी है वसुंधरा!

मैं मुस्कुरा दी और आनन्द सोफे पे बैठ कर हांफने लगे।
अपनी मांग में भरे वीर्य की गर्माहट को मैं महसूस कर रही थी।

मैंने अपने कपड़े उठाए और अपने बालों में भरे वीर्य को साफ करने लगी।
कुछ देर बाद आनन्द संयत हुए और उन्होंने एक झटके में मुझे अपनी बांहों में उठा लिया और अपनी बांहों में उठाये हुए बाथरूम में ले गये।

बाथरूम में ले जाकर उन्होंने मुझे जमीन पर घुटनों के बल बिठा दिया।
आनन्द गहरी सांस ले रहे थे।

मुझे समझ नहीं आया कि आनन्द क्या करना चाह रहे हैं।

आनन्द ने कहा- वसुंधरा, मैं तुमसे खेलना चाहता हूं।
मैंने कहा- जैसे दिल करे, वैसे खेलिए!
आनन्द ने कहा- ठीक है, अपनी आंखें बन्द कर लो।
मैंने अपनी आंखें बन्द कर ली और इंतजार करने लगी की आगे क्या होने वाला है।

करीब 10 सेकंड के इंतजार के बाद एक गर्म पानी की धार मेरे चेहरे पर आ पड़ी।
आनन्द ने मूतना शूरू कर दिया था।

वो मजे से मेरे चेहरे के साथ साथ मेरे स्तनों पर भी मूत्र त्याग कर रहे थे और मैं आंखें मीचे सांस रोके ये सब सह रही थी।

आनन्द की इस हरकत का मुझे अंदाजा नहीं था।
पता नहीं मर्दों को हम औरतों को अपने गर्म पानी से नहलाकर कौन सा रस मिल जाता है।
यह पहला मौका था जब किसी मर्द ने मुझ पर मूत्र त्याग किया था।

लेकिन पाठको, इस अहसास को बयान कर पाना मुश्किल है, चाहे कितना भी बुरा कहूं मैं इसे लेकिन उस वक्त आनन्द की इस हरकत ने मुझे उत्तेजित करने के साथ साथ बेशर्म भी बना दिया था।
यह एक मीठा अहसास था जो मुझे आगे भी ऐसे करने को लालायित कर रहा था।

मुझे अपने मूत्र से नहलाने के बाद आनन्द ने मुझ पर ताजा पानी डाला ताकि मेरे जिस्म पर मौजूद उसके पेशाब का हर अंश मेरे बदन से अलग हो जाए।

आनन्द मुझे शावर के नीचे ले आए और एक दूसरे को मसल-मसल कर नहलाने लगे।
नहाते वक्त भी मेरे पैरों में सैंडल मौजूद थे।

नहाने के साथ-साथ हम एक दूसरे को छेड़ते जा रहे थे।

सैक्स के इतने रूप, मैंने सिर्फ ख्यालों में ही सोचे थे।
आज आनन्द ने मेरे पूरे वजूद पर अपना हक जमा दिया।

आनन्द घुटनों के बल बैठ गए और पीछे की तरफ़ से मेरी चूत और मेरी गांड के छेद पर अपनी जीभ फिराने लगे।

“आह जीजू … उफ्फ मर गई … प्लीज जीजू, उफ्फ आह जीजू … मेरी गांड … प्लीज जीजू … आह और तेज … और अंदर … उफ्फ जीजू … और अंदर डालो ना!”

आनन्द ने मेरी गांड के छेद को अपनी उंगलियों से फैला कर उसके अंदर भी एक बार जीभ डाल दी।

मेरी चूत में आग लगी हुई थी।
उत्तेजना और नशे में मैं अपने ही हाथों से अपने मम्मों को बुरी तरह मसल रही थी।

मैं कामोत्तेजना में मिन्नतें करने लगी- जीजू प्लीज … अब मुझे और मत तड़पाओ … प्लीज जीजू … मेरी चूत आपकी है. मैं आपकी होने वाली बीवी की लौड़ी हूं जीजू … प्लीज मुझे चोदो।

मेरे इस तरह के वाक्य सुनकर आनन्द ने मेरे चूत को चाटा और फिर मुझे आंगन में ले आए।

मैंने झट से उनकी गर्दन में अपनी बांहें डाल दीं जिससे वो मुझसे दूर नहीं जा सकें।

अब मेरे जिस्म में उत्तेजना की वो आग लगी थी कि इंच भर की दूरी भी बर्दाश्त से बाहर हो रही थी।
मैं उनके लंड के दाखिल होने का इंतज़ार करने लगी।
उनके लंड को मैं अपनी चूत के ऊपर सटे हुए महसूस कर रही थी।

आनन्द अब मेरे नितम्बों पर थप्पड़ रसीद करने लगे।
मेरे नितम्ब फूली हुई पावरोटी की तरह लहर जाते।

मैं उत्तेजित हो गई थी और अब खुद को चुदवा कर खुद को तृप्त करना चाहती थी।

मैंने आनन्द का लिंग पकड़ा और उसे अपनी योनि पर टिका दिया और अंदर डालने लगी.
पर आनन्द ने उसे हटा लिया।

मैंने कहा- जीजू क्या हुआ, प्लीज अब और सब्र नहीं होता, प्लीज मुझे चोद डालो!
आनन्द- ऐसे नहीं कुतिया, पहले ये बता तू मेरी कौन है?
मैं- मैं आपकी होने वाली साली और आपकी बीवी की लौड़ी हूं।

आनन्द- शादी के बाद अगर तूने मुझे छोड़ दिया तो?
मैं- मैं कभी आपको नहीं छोड़ूंगी और इसी तरह आपको खुश करती रहूंगी. मैं वादा करती जीजू, प्लीज अब डाल दो मेरे अंदर!

आनन्द- अच्छा यह बता कि मेरा बीज अपने अंदर लेगी या नहीं, मैं तुझे अपने वीर्य से लबालब भर दूंगा।
मैं- हां जीजू, प्लीज मैं आपके वीर्य को अपने अंदर लेना चाहती हूं, प्लीज मुझे अपने वीर्य से नहला दीजिए जीजू, प्लीज!

मैंने फिर से उनका लिंग पकड़ा और अपने छेद पर रखा और कहा- जीजू देखो, तुम्हारी लौड़ी तुमसे क्या कह रही है. मैं इसी तरह आपसे चुदूंगी और शादी के बाद आपकी लौड़ी बन कर रहूंगी। आप मेरी बहन से शादी करना और सेक्स मेरे साथ करना, मैं आपके नीचे रहूंगी. प्लीज जीजू, मुझे चोद दो. आनन्द, अब मुझसे रहा नहीं जा रहा है … प्लीज।

आनन्द- ठीक है साली साहिबा, आपकी ख्वाहिश पूरी कर देते हैं।

तब आनन्द अपना एक हाथ मेरे गले के पीछे ले गए और फिर मेरे बालों को काबू किया, अपने बाएं हाथ से उन्होंने अपना लिंग पकड़ा और फिर मेरी योनि में घुसा दिया।

मेरी चूत बुरी तरह से गीली हो रही थी इसलिये उनके लंड को दाखिल होने में ज्यादा परेशानी नहीं हुई।
उनका लंड पूरी तरह मेरी चूत में समा गया था।

फिर उन्होंने धीरे-धीरे अपने लंड को पूरी तरह से बाहर खींच कर वापस एक धक्के में अंदर कर दिया।

उन्होंने एक हाथ मेरी टांग के बीच डाल दिया और फिर उसे खींच कर ऊपर उठा दिया।
अब मैं एक टांग पर आ गई।

नीचे से आनन्द मेरी चूत में धक्के लगा रहे थे, मैंने अपनी बाहों को उनकी गर्दन पर लपेट लिया और फिर अपनी चुदाई का आनन्द लेने लगी।

उनके धक्के मेरी योनि में अंदर तक घुसते और मेरी बच्चेदानी में टकरा कर मुझे दर्द और मजा दोनों देते।
वो मेरे बाल खींचते जा रहे थे, इस दौरान मजे से मेरी आंखें बंद हो गई।
मेरी योनि तर हो चुकी थी और मैं आनन्द के बदन से चिपकी अपनी इज्जत लुटवा रही थी।

आनन्द भी अपशब्दों के साथ मेरी वासना बढ़ाते जा रहे थे।
आनन्द- ले साली अंदर तक … और भीतर ले … इसी तरह तेरी बहन भी चोदूंगा और तुझे भी, अपने लंड की रखैल बना कर रखूंगा तुझे हरामजादी!

मैं इस तरह के शब्दों से उत्तेजित होती जा रही थी और इसी तरह चुदती हुई अपनी योनि से दो दफा पानी छोड़ चुकी थी।

हमें इस तरह खड़े होकर चुदाई करते हुए आधा घंटा हो गया.

फिर आनन्द सोफे पे बैठ गए।
मैं उनकी गोद में बैठ कर कॉउ गर्ल पोजिशन में आ गई और अब अपनी तरफ से आनन्द को चोदने लगी।

आनन्द को बहुत मजा आ रहा था।
उन्होंने मेरी कमर कस ली और मैं मटकते हुए आनन्द को चोदने लगी।

करीब 10 मिनट बाद आनन्द झड़ने वाले हुए- आह वासु, मेरा निकलने वाला है, तेरी चूत में डाल दूं क्या?
मैं- डाल दो जीजू, लौड़ी हूं आपकी, आपका जहां जी करे डालिए!

वे मेरी बात सुनकर और उत्तेजना से भर गए और फिर मेरी चूत में ही हिनहिनाते हुए जा झड़े।

हमारी सांसें बहुत तेज हो गई थी और फिर हम थक कर सोफे पे ही लेट गए.
हम दोनों वापस एक दूसरे से लिपट गये और वह सारी रात एक दूसरे से खेलते हुए गुजर गई।

उन्होंने उस रात में कई बार अलग-अलग तरीके से हॉट साली के साथ सेक्स का मजा लेते हुए चोदा।

सुबह उठने की मेरी इच्छा नहीं हो रही थी, मेरा पूरा जिस्म टूट रहा था।
आनन्द ने मुझे उठाया और अपने साथ बाथरूम ले गये।

किसी तरह मैंने खुद को साफ किया और शावर के नीचे जाकर अपने बदन को ठंडे पानी से धोया।
अब मुझमें ताजगी आ गई थी।

आनन्द भी कल रात होने वाली चुदाई से मेरा आशिक बन गये थे।
मैंने आनन्द से कहा- आनन्द, हमारा ताल्लुक सिर्फ हम तक ही रहना चाहिए, मैं नहीं चाहती कि रागिनी को किसी भी तरह हमारे ऊपर शक हो।

आनन्द- तुम निश्चिंत रहो, मैं उसे कभी पता नहीं लगने दूंगा। तुम अपने घर पर कह दो कि मैं अब रागिनी से शादी करने के लिए तैयार हूं।

उनकी यह बात सुनकर मैंने उसे चूम लिया और फिर हमारे बीच स्मूच का सिलसिला शुरू हो गया।

मैंने आनन्द के लंड को चूसकर उसे मुख मैथुन का आनन्द दिया।

फिर आनन्द वापस अपने घर चले गए।

मैंने अपने घर पर कॉल कर के बताया कि आनन्द रिश्ते के लिए तैयार हैं।
पहले तो किसी को यकीन नहीं हुआ लेकिन मेरे कहने पर सभी लोग मान गए।

कुछ दिनों बाद रागिनी की शादी डॉक्टर आनन्द से हो गई और वे दोनों अपने जीवन में खुश रहने लगे।

मुझे खुशी है कि मेरा ये छोटा सा बलिदान मेरी बहन की जिंदगी में खुशियों की बहार लेकर आया है।

तो दोस्तो, कैसा लगा आपको हॉट साली के साथ सेक्स का मजा?
कमेंट में बताइए।
इसके आगे की कहानी मैं जल्दी ही हाजिर होऊंगी।

About Abhilasha Bakshi

Check Also

जीजा के साथ मेरा सुहागदिन-2 (Jija Ke Sath Mera Suhag Din- Part 2)

मेरी सेक्स कहानी के पिछले भाग जीजा के साथ मेरा सुहागदिन-1 में आपने में पढ़ा …

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *